बांग्लादेश में तारिक रहमान का पीएम बनना तय: क्या ये पाक-चीन के लिए झटका और भारत के लिए अच्छा; 6 जरूरी सवालो… – Dainik Bhaskar

बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने वाली है। उनकी पार्टी BNP ने 299 में से 212 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BNP की जीत पर बधाई दी है।
तारिक रहमान की बड़ी चुनौतियों में से एक अपने पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को बहाल करना होगा। दशकों से भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश, शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से चीन और पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। बांग्लादेश में नई सरकार से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: बांग्लादेश चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं?
जवाब: 12 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक 299 सीटों पर वोटिंग हुई। करीब 55% वोट पड़े। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई और 13 जनवरी को नतीजे आए…
BNP के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पार्टी को 212 सीटें मिलीं हैं। 20 नवंबर 1965 को जन्में तारिक रहमान पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं।
17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से लौटे। वापसी के सिर्फ 5 दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
इसके बाद BNP की कमान पूरी तरह तारिक के हाथों में आ गई। उन्हीं के चेहरे पर BNP चुनाव में उतरी। तारिक ने खुद दो सीटों- ढाका-17 और बोगरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की।
दरअसल, तारिक ने खुद को युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं से कनेक्ट किया। उन्होंने खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस करने वाले नेता की तरह पेश किया। इसके अलावा तारिक को उनकी मां के निधन के बाद मिली सिम्पैथी और उनकी पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग से भी फायदा हुआ।
सवाल-2: क्या तारिक रहमान भारत के साथ रिश्ते सुधारेंगे?
जवाब: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गिरावट आई। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत के परंपरागत विरोधी पाकिस्तान और चीन से दोस्ती बढ़ाई।
ऐसे में भारत को उम्मीद थी कि बांग्लादेश की नई सरकार से रिश्ते ठीक किए जाएंगे। माना जाता है कि BNP भारत का पसंदीदा ऑप्शन है और वे संपर्क में भी है।
जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया।
BNP ने अपने मेनिफेस्टो में विदेश नीति ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ नारों के इर्द-गिर्द तैयार की है। एक चुनावी रैली में तारिक रहमान ने कहा, ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि’। यानी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रभाव से मुक्त रहने की बात कही।
पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास मानती हैं कि हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी बदले नहीं जा सकते। हमें एक-दूसरे के साथ काम करना ही पड़ता है। भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी सत्ता में आए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं।
BNP ने चुनावी वादा किया है कि…
बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर रहे हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि तारिक रहमान समझ चुके हैं कि एक सफल पीएम बनने के लिए उन्हें भारत के समर्थन की जरूरत है, या कम से कम भारत की दुश्मनी वह मोल नहीं लेना चाहेंगे। अब देखना यह होगा कि उनकी कथनी और करनी मेल खाती हैं या नहीं।
अमेरिकी थिंकटैंक Atlantic Council में साउथ एशिया सेंटर की सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन मानते हैं कि भारत को उम्मीद है कि नई सरकार बातचीत करने को तैयार होगी। वह उन किरदारों से प्रभावित न हो, जो भारत के हितों के लिए खतरा हैं। BNP और भारत दोनों ही एक-दूसरे के साथ काम करने को तैयार हैं।
13 फरवरी की सुबह पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा,
यह जीत दिखाती है कि बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा है। भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक और आगे बढ़ते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मैं दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने को तैयार हूं।
सवाल-3: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सुधरना दोनों के लिए क्यों जरूरी है?
जवाब: बांग्लादेश की 94% सीमा भारत से लगती है। बांग्लादेश लगभग चारों तरफे भारत से घिरा हुआ है, इसलिए इसे ‘इंडिया लॉक्ड’ देश कहा जाता है। ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है।
वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों से बाकी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए भारत को कभी पूर्वोत्तर को लेकर बांग्लादेश की ओर से किसी परेशानियों की चिंता नहीं करनी पड़ी, लेकिन उनके तख्तापलट के बाद एक सिक्योरिटी थ्रेट खड़ा हो गया।
मार्च 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे में कहा, ‘भारत के पूर्वोत्तर राज्य जमीन से घिरे हुए हैं। समुद्र तक पहुंचने के लिए बांग्लादेश ही उनका एकलौता रास्ता है।’
इसके अलावा कई बांग्लादेशी नेताओं ने ‘सेवन सिस्टर्स’ को अलग करने की धमकी तक दी और उसे बांग्लादेश का हिस्सा बताया।
पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को बाकी देश से सिलिगुड़ी कॉरिडोर जोड़ता है, जो सिर्फ 40 किमी लंबा और 22 से 30 किमी चौड़ा है। इसे ही चिकन नेक कहते हैं। इसके एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ बांग्लादेश है। यहां से चीन महज 200 किमी दूर है।
मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की सीनियर फेलो स्मृति पटनायक के मुताबिक, पूर्वोत्तर की सुरक्षा को लेकर भारत जरा भी ढील नहीं देगा। ये मुद्दा बेहद अहम है और इसको लेकर भारत कोई समझौता नहीं करेगा। ये मैसेज बांग्लादेश की पूरी लीडरशिप तक पहुंचा दिया गया है।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर रंजीत बरठाकुर मानते हैं कि बांग्लादेश में चिकन नेक से छेड़छाड़ करने की कुव्वत नहीं है। वह कट्टरपंथियों की मदद करके और घुसपैठ से भारत को परेशान कर सकता है, लेकिन चिकन नेक को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं करेगा। असल दिक्कत चीन है और हमें तैयार रहना होगा।
हालांकि बांग्लादेश में भारत के एम्बेस्डर रहे अनिल त्रिगुणायत मानते हैं कि तारिक रहमान के सत्ता में आने से भारत की सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में घुसपैठ कर रहे पाकिस्तान और अन्य भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों पर नजर रखना होगा।
सवाल-4: क्या तारिक सरकार पाकिस्तान से और नजदीकियां बढ़ाएगी?
जवाब: 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद से पाकिस्तान से उसके रिश्ते लंबे वक्त तक तनाव भरे रहे। BNP की पिछली सरकारों यानी खालिदा जिया के समय पाकिस्तान से रिश्ते सुधरे, लेकिन शेख हसीना ने फिर दूरी बना ली। हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से 3 बार मुलाकात की। दोनों देशों के नेता और सैन्य अधिकारी भी मिले। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी मुलाकात की।
दोनों देशों के बीच दशकों बाद सीधी समुद्री सेवा शुरू हुई। रक्षा साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और हथियार बनाने पर सोचा गया।
पूर्व हाई कमिश्नर हर्षवर्धन श्रृंगला के मुताबिक, 2001-2006 के BNP शासन के दौरान बांग्लादेश ने भारत विरोधी रुख अपनाया और पाकिस्तान के बेहद करीब हो गया। तब तारिक रहमान सरकार में अहम व्यक्ति थे और उनका प्रभाव कहीं ज्यादा था।
दरअसल, उस वक्त भारत में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। वहीं बांग्लादेश में BNP की खालिदा जिया सरकार चला रहीं थीं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा, नदी जल बंटवारा, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, इमिग्रेशन और सशस्त्र विद्रोह जैसे मुद्दों पर विरोध था।
तब भारत ने BNP पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की मदद करने का आरोप भी लगाया था, जिनका ढाका ने का खंडन किया था।
ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेलवर हुसैन मानते हैं कि सत्ता में कोई भी आए, बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्ते और बेहतर होंगे और अचानक बदलाव की कोई संभावना नहीं है। BNP सरकार का पाकिस्तान से मजबूत रिश्ते होने का अतीत रहा है।
हालांकि पाकिस्तान के लिए नई सरकार मुद्दा नहीं है। वह देखेगा कि नई सरकार की भारत को लेकर क्या पॉलिसी होगी और पाकिस्तान को किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
इंटरनेशनल रिलेशंस एक्सपर्ट स्मृति पटनायक मानती हैं कि बांग्लादेश पाकिस्तान से चाहे जितने मजबूत रिश्ते बना लें, उन्हें बिना सिक्योरिटी चेक के बांग्लादेश बुला ले। यह भारत की चिंता का मुद्दा नहीं है।
दरअसल, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिलकर SAARC को फिर से एक्टिव करना चाहता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई सरकार से कश्मीर जैसे मुद्दे पर साथ या तटस्थ रहने की उम्मीद करता है।
सवाल-5: चीन से कैसे रिश्ते रखेंगे तारिक रहमान?
जवाब: बांग्लादेश पर जैसे-जैसे भारत का प्रभाव कम हुआ, उस गैप को चीन ने भरा। आमतौर पर बांग्लादेशी नेता शपथ के बाद पहली विदेश यात्रा भारत की करते हैं, लेकिन यूनुस ने चीन को चुना। 26 से 29 मार्च 2025 तक उन्होंने चीन का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने चीन के साथ 9 समझौते साइन किए। इनमें तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट, 98% प्रोडक्ट्स पर जीरो टैरिफ, डिफेंस लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और लालमोनिरहाट एयरपोर्ट को रिन्यू करने जैसे समझौते हैं।
भारतीय थिंकटैंक सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के कॉन्स्टेंटिनो जेवियर का कहना है कि चीन भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संकट का फायदा उठाते हुए खुले तौर पर और पर्दे के पीछे दोनों तरह से अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है।
अमेरिकी थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के फेलो जोशुआ कुर्लांट्जिक मानते हैं कि बंगाल की खाड़ी के मामले में चीन की स्ट्रैटजी का बांग्लादेश केंद्र बन चुका है। चीन को भरोसा है कि बांग्लादेश इसमें उसकी मदद करेगा।
चीन में बांग्लादेश के एम्बेस्डर रहे मुंशी फैज अहमद के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए चीन का जगह किसी अन्य देश से नहीं बदली जा सकती। क्योंकि पिछले कुछ साल में चीन एक बड़े निवेशक के साथ-साथ ट्रेड पार्टनर के तौर पर उभरा है।
बांग्लादेश के नेशनल रेवेन्यू बोर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बांग्लादेश का चीन के साथ ट्रेड 21.3 अरब डॉलर से ज्यादा का था। वहीं भारत के साथ करीब 11.5 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।
अहमद मानते हैं कि भले ही लोग सोचते थे कि भारत हमारे बहुत करीब हैं, लेकिन ट्रेड और कॉमर्स के मामले में चीन से हमारे रिश्ते लगातार बढ़ रहे हैं। हमारे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में चीन का पैसा लगा है। लंबे समय तक बांग्लादेश चीन से नजदीकियां जारी रखेगा, क्योंकि चीन जो दे सकता है, वह कोई नहीं कर सकता।
सवाल-6: बांग्लादेश में जनमत संग्रह का नतीजा क्या रहा और इससे क्या फर्क पड़ेगा?
जवाब: जनमत संग्रह के पक्ष में 68.1% लोगों ने वोट दिया। वहीं इसके खिलाफ में 31.9% वोट पड़े। यानी अब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर लागू हुआ। नई संसद पहले 180 दिनों तक एक ‘संवैधानिक सुधार परिषद’ की तरह काम करेगी और चार्टर की सिफारिशों को कानून में बदलेगी।
दरअसल, बांग्लादेश में राजनीतिक और संवैधानिक सुधार लाने के लिए नेशनल कंसेंशन कमीशन बनाया गया। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसके चेयरमैन बने।
इस कमीशन के 5 अलग-अलग आयोगों ने 33 पॉलिटिकल पार्टियों और अलायंस से 72 मीटिंग कर 166 सिफारिशों पर चर्चा की। इसके बाद ‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025‘ तैयार हुआ, जिसमें 84 सिफारिशें शामिल थीं। इसमें कुछ बदलाव होने जा रहे हैं…
2 बार पीएम बनने की सीमा: कोई भी व्यक्ति दो बार यानी अधिकतम 10 साल से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं बन पाएगा। यह लंबे कार्यकाल को रोकने के लिए लाया गया है। जैसे शेख हसीना 15 साल पीएम रहीं।
अब एक नहीं, दो सदन होंगे: अब तक बांग्लादेश में सिर्फ एक सदन ‘जातीय संसद’ है। लेकिन अब भारत की राज्यसभा की तरह 100 सीटों वाला ‘अपर हाउस’ भी बनेगा, जो निचले सदन के फैसलों को रिव्यू करेगा।
सांसद मर्जी से वोट दे सकेंगे: संविधान के आर्टिकल 70 में सुधार किया जाएगा। अब सांसद अपनी ही पार्टी के फैसलों के खिलाफ वोट दे पाएंगे। पहले ऐसा करने पर सदस्यता चली जाती थी। हालांकि बजट और अविश्वास प्रस्ताव पर पार्टी लाइन माननी होगी।
शक्ति का संतुलन: प्रधानमंत्री की शक्तियों को कम कर राष्ट्रपति और संसद को ज्यादा शक्तिशाली बनाया जाएगा, ताकि सत्ता केंद्रीकरण न हो सके। यानी सिर्फ एक व्यक्ति के पास ज्यादा शक्तियां न हो।
हर चुनाव से पहले केयरटेकर सरकार: हर चुनाव से पहले चुनी हुई सरकार इस्तीफा देगी और एक निष्पक्ष ‘केयरटेकर सरकार’ चुनाव कराएगी। इससे सत्ताधारी पार्टी के चुनाव में धांधली करने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
‘बंगाली’ से ‘बांग्लादेशी’ की ओर: संविधान में नागरिकों की परिभाषा ‘बंगाली’ (भाषाई पहचान) से बदलकर ‘बांग्लादेशी’ (नागरिक पहचान) की जाएगी। सभी मातृभाषाओं को बंगाली के साथ राज्य भाषा का दर्जा दिया जाएगा।
चुनाव आयोग को ज्यादा ताकत: चुनाव कराने वाली संस्था को पूरी तरह स्वायत्त बनाया जाएगा यानी चुनाव आयोग के पास अपनी अलग बजट और प्रशासनिक शक्ति होगी, ताकि चुनावों में धांधली की आशंका न रहे।
जजों की नियुक्ति के लिए आयोग: जजों की नियुक्ति अब प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र ‘न्यायिक नियुक्ति आयोग’ करेगा। इससे अदालतों पर सरकार का कंट्रोल खत्म होगा।
——————
बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…
बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत: तारिक रहमान का PM बनना तय; देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री
बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News