केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि सरकार अब किफायती घरों (Affordable Housing) के लिए फंड जुटाने का नया रास्ता अपनाएगी. उन्होंने बताया कि बैंक और पारंपरिक वित्तीय संस्थान अक्सर सस्ते घर बनाने वाले प्रोजेक्ट्स को कर्ज देने में हिचकिचाते हैं, इसलिए केंद्र सरकार अब ऐसी चैरिटेबल संस्थाओं को बढ़ावा देगी जो इन प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा सकें.
‘नारेडको कॉन्क्लेव 2026’ (NAREDCO Conclave 2026) के दूसरे दिन अपनी बात रखते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सालों से अटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करना और शहरों में खाली पड़ी बेकार जमीन का सही इस्तेमाल कर गरीबों के लिए घर बनाने की प्रक्रिया को तेज करना है.
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मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि किफायती आवास, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए फंडिंग की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. उन्होंने बताया कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इस क्षेत्र में लोन देने के लिए सक्रिय रूप से आगे नहीं आते हैं. इस कमी को दूर करने के लिए मंत्रालय ऐसी चैरिटेबल संस्थाओं को बढ़ावा देगा जो इस खास मकसद के लिए फंड जुटा सकें.
उन्होंने सुझाव दिया कि ये संस्थाएं ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (CSR) के जरिए संसाधन इकट्ठा कर सकती हैं, जिससे समाज के गरीब तबके के लिए घर बनाना आसान होगा. खट्टर के अनुसार, यह मॉडल मौजूदा सरकारी योजनाओं को मजबूती देगा और उन लोगों के लिए फंडिंग का एक समर्पित जरिया बनेगा जिन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से मदद नहीं मिल पाती है.
इसके साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि सरकार ‘रेरा’ (RERA) लागू होने से पहले के अटके हुए प्रोजेक्ट्स के लिए एक विशेष फंड बनाने पर भी विचार कर रही है.
₹2.5 लाख करोड़ के फंड का प्रस्ताव और झुग्गी पुनर्विकास
कॉन्क्लेव के दौरान, नारेडको (NAREDCO) ने अटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार समर्थित लगभग ₹2.5 लाख करोड़ का फंड बनाने का प्रस्ताव रखा. इस पर मंत्री खट्टर ने कहा कि इस फंड के आकार और ढांचे पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि अधूरे प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने के लिए समय पर पैसा मिलना बेहद जरूरी है.
शहरी पुनर्विकास (Urban Redevelopment) पर खट्टर ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) और उसके आसपास की लगभग 700-750 झुग्गी बस्तियों को विकसित करने की योजना बना रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि “एक बार यह प्रस्ताव शुरू हो जाने के बाद, दिल्ली-एनसीआर में किफायती आवास क्षेत्र को एक बड़ी मजबूती मिलेगी.”
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जमीन की उपलब्धता से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए मंत्री ने किफायती आवास के लिए अलग से सस्ती जमीन देने की संभावना से इनकार कर दिया. इसके बजाय, उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनती है, तो क्रॉस-सब्सिडी (Cross-Subsidisation) के माध्यम से जमीन की उपलब्धता को बढ़ावा दिया जा सकता है.
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुलदीप नारायण ने शहरों के बीचों-बीच स्थित ऐसी जमीन के पुनर्विकास पर जोर दिया, जिसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरों में जमीन के ऐसे कई हिस्से हैं, जहां दशकों से इमारतें खाली या बेकार पड़ी हैं, इन्हें गूगल मैप्स जैसे टूल्स की मदद से पहचाना जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि “ऐसी जमीन को हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल में लाकर उपयोगी बनाया जा सकता है.” साथ ही, उन्होंने बताया कि सरकार रेंटल हाउसिंग के मॉडल पर भी विचार कर रही है.
नारेडको (NAREDCO) के चेयरमैन डॉ. निरंजन हिरानंदानी ने कहा कि सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में हाउसिंग सेक्टर को प्राथमिकता देने के लिए काफी प्रयास किए हैं, लेकिन अभी और बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “अगर भारत को ‘विकसित भारत’ बनना है, तो 2047 तक जीडीपी में हाउसिंग सेक्टर का योगदान बढ़कर 15% होना चाहिए.” उन्होंने रेंटल हाउसिंग को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए जल्द नीतिगत फैसले लेने की मांग की.
कार्यक्रम के दौरान, नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन और मंत्री खट्टर ने एक संयुक्त KPMG-NAREDCO नॉलेज रिपोर्ट भी जारी की. इस रिपोर्ट में “विकसित भारत” के विजन के अनुरूप रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया गया है.
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