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म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूसी तेल आयात को लेकर उठे सवालों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता भारत के इतिहास और राजनीतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और यह किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है.
कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा बाजार आज बेहद जटिल है और तेल कंपनियां उपलब्धता, लागत और जोखिम का आकलन कर अपने हित में निर्णय लेती हैं. उन्होंने कहा, ‘दुनिया बदल रही है और सभी देश लगातार अपने आकलन दोबारा कर रहे हैं. अगर मूल प्रश्न यह है कि क्या भारत स्वतंत्र सोच के साथ फैसले करेगा और क्या ऐसे चुनाव करेगा जो कभी-कभी आपकी या किसी और की सोच से सहमत न हो, तो जवाब है हां, ऐसा हो सकता है.’
हालांकि, उसी कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने दावा किया कि भारत ने वाशिंगटन को आश्वासन दिया है कि वह रूसी तेल की अतिरिक्त खरीद बंद कर देगा. उनका यह बयान अमेरिका द्वारा रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के बीच आया है, जो यूक्रेन युद्ध के लंबे समय तक चलने के कारण मॉस्को की ऊर्जा से होने वाली आय को सीमित करने के प्रयासों का हिस्सा है.
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रुबियो ने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस के तेल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए हैं. भारत के साथ हमारी बातचीत में, हमें उनसे अतिरिक्त रूसी तेल खरीद रोकने की प्रतिबद्धता मिली है. यूरोप ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं.’ मार्को रुबियो का यह दावा भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते के बाद आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि भारत रूसी तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका या संभवत: वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा.
हालांकि, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ऐसे किसी आश्वासन से इनकार करते हुए कहा था कि सिर्फ ट्रंप ही यह दावा कर रहे हैं, हमें भारत सरकार ने इस तरह का कोई संदेश नहीं दिया है. भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रियायती रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है और वर्तमान में वह अपनी कुल जरूरत का लगभग 35 प्रतिशत तेल रूस से लेता है. सरकार का कहना है कि यह फैसला ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है. हालांकि हाल के महीनों में यह थोड़ा कम हुआ है.
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अमेरिकी क्रूड अब भारत के कुल आयात का लगभग 10% है, और भारत ने अमेरिकी एलपीजी के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले भी साफ कर चुके हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप फैसले करेगा. रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों और मास्को के साथ अपने पुराने संबंधों के बीच भारत एक संतुलित कूटनीतिक रास्ता अपनाए हुए है, जिसमें रणनीतिक स्वायत्तता उसकी नीति का मूल आधार बनी हुई है.
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