‘बिल्ली के गले में घंटी…', एमके स्टालिन ने विधानसभा में पेश की राज्यों की स्वायत्तता पर रिपोर्ट – AajTak

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को विधानसभा में राज्यों की स्वायत्तता मांगने से संबंधित एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों का सम्मान नहीं कर रही है और आज भी राज्यों को अपने फंड के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कुरियन जोसेफ के नेतृत्व वाली कमेटी ने 16 फरवरी को यह रिपोर्ट सौंपी थी. 
स्टालिन ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि राज्यों में स्वायत्तता और केंद्र में गठबंधन सरकार ही एकमात्र समाधान है. 
उन्होंने तर्क दिया कि 76 साल में संविधान में 106 बार संशोधन हुआ है, इसलिए लोगों के जीवन स्तर और विकास के लिए इसे फिर से संशोधित किया जाना चाहिए.
‘बिल्ली के गले में बांधी घंटी’ – सीएम स्टालिन
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने इस मांग को उठाकर ‘बिल्ली के गले में घंटी’ बांध दी है. उनके मुताबिक, यह केवल द्रमुक (DMK) की विचारधारा नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों की आजीविका और विकास की मांग है. उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वशासन ही एकमात्र उपाय है और इसे हासिल करने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन करना जरूरी है. स्टालिन ने यकीन जताया कि अगर कोशिश की जाए, तो देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए बदलाव मुमकिन है.
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कांग्रेस का समर्थन और गठबंधन पर रुख
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थागई ने मुख्यमंत्री की इस मांग का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्यों की स्वायत्तता की जरूत का समर्थन करती है. संविधान संशोधन के सवाल पर उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि वे इस मामले को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के समक्ष ले जाएंगे. 
हालांकि, जब उनसे पार्टी के अंदर सत्ता साझा करने की मांग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस पर आखिरी फैसला एआईसीसी ही लेगी.
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बीजेपी ने साधा निशाना, बताया ‘हार का डर’
बीजेपी लीडर डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुख्यमंत्री स्टालिन की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन 27 जिलों में ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनाव न कराकर खुद स्थानीय निकायों के अधिकार छीन रहे हैं और आज स्वायत्तता की बात कर रहे हैं. सुंदरराजन ने कहा कि केंद्र सरकार बिना किसी पक्षपात के सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार कर रही है. उन्होंने तंज कसा कि जब द्रमुक केंद्र में सत्ता में थी तब वह स्वायत्तता भूल गई थी और अब हार के डर से इस मुद्दे को फिर से उठा रही है.
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स्वायत्तता और फंड की लड़ाई
मुख्यमंत्री ने सदन में दोहराया कि राज्यों को अपने अधिकार और वित्तीय संसाधनों के लिए केंद्र से लड़ना पड़ता है. उन्होंने कहा कि राज्यों में आत्मनिर्भर सरकार और केंद्र में तमाम दलों के गठबंधन वाली सरकार ही देश का नेतृत्व करने का सही तरीका है. स्टालिन ने इस रिपोर्ट को पेश करते हुए इसे भारत का नेतृत्व करने के प्रयास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, जिससे राज्य अपनी विकास नीतियों को स्वतंत्र रूप से लागू कर सकें.
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