चीन ने 5 साल में लॉन्च कीं 10 परमाणु पनडुब्बियां, अमेरिकी नौसेना की ताकत पर मंडराया खतरा; हाथ से जाएगा ताइवान? – Zee News

China Nuclear Submarine: अमेरिका के लिए अब अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की चुनौती है, वहीं भारत को अपनी एंटी-सबमरीन ताकत और P-8I जासूसी विमानों की संख्या बढ़ानी होगी. अगर चीन इसी रफ्तार से चलता रहा, तो 2030 तक उसकी समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
China Nuclear Submarine: चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. एडवांस मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का जखीरा तो तैयार कर ही रहा है. लेकिन समंदर के अंदर भी बड़ी खामोशी से अपनी ताकत बढ़ा रहा है. जिसकी खबर ने अमेरिकी पेंटागन से लेकर दिल्ली तक खलबली मचा दी है. IISS (International Institute for Strategic Studies) की ताजा रिपोर्ट और CNN के खुलासे के मुताबिक, चीन अब अमेरिका से भी तेज रफ्तार से परमाणु पनडुब्बियां बना रहा है. यह केवल हथियारों की रेस नहीं है, बल्कि समंदर के नीचे दशकों से चली आ रही अमेरिकी बादशाहत को सीधी चुनौती है.
चीन ने उतारी 10 पनडुब्बियां
चीन ने पिछले पांच वर्षों 2021-2025 में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के प्रोडक्शन में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया है कि चीन ने इस दौरान 10 परमाणु पनडुब्बियां लॉन्च कीं.
जबकि अमेरिका केवल 7 ही लॉन्च कर पाया. यह फासला केवल संख्या का नहीं, बल्कि ‘वजन’ का भी है, जहां चीन ने अमेरिका के 55,500 टन के मुकाबले 79,000 टन की पनडुब्बियां पानी में उतारी हैं.
वॉशिंगटन की बादशाहत को खतरा
दशकों से अमेरिका यह मानता रहा है कि समंदर के नीचे उसकी परमाणु पनडुब्बियों का कोई मुकाबला नहीं है. लेकिन IISS की नई रिपोर्ट ‘मिलिट्री बैलेंस 2026’ ने इस गुमान को तोड़ दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने हुलुदाओ शिपयार्ड का इतना विस्तार किया है कि अब वहां एक साथ कई पनडुब्बियों का निर्माण हो रहा है.
चीन की इस रणनीति का मुख्य हिस्सा उसकी ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ यानी जमीन, आसमान और पानी- तीनों जगह से परमाणु हमला करने की क्षमता को मजबूत करना है.
क्या है चीन की प्लानिंग?
चीन ने हाल ही में Type-094 (Jin Class) की दो नई बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां लॉन्च की हैं, जो परमाणु हथियारों से लैस होकर हज़ारों किलोमीटर दूर निशाना साध सकती हैं.
इसके अलावा, चीन अब Type-096 जैसी और भी एडवांस पनडुब्बियों पर काम कर रहा है, जो चुपचाप हमला करने में माहिर होंगी.
हालांकि, अमेरिकी विशेषज्ञों का अब भी मानना है कि तकनीक और ‘शांत’ रहने के मामले में अमेरिकी पनडुब्बियां चीन से बेहतर हैं, लेकिन चीन जिस रफ्तार से संख्या बढ़ा रहा है, वह भविष्य में युद्ध का नक्शा बदल सकता है
अमेरिका के लिए चिंता की बात यह भी है कि उसके शिपयार्ड पुरानी पनडुब्बियों की मरम्मत और नई के निर्माण के बीच तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहे हैं.
चीन की बढ़ती पनडुब्बी ताकत
चीन केवल संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि अपनी पनडुब्बियों को घातक बना रहा है.
Type-094 (SSBN)- ये पनडुब्बियां परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस हैं. दो नई पनडुब्बियों के आने से चीन की समुद्री परमाणु ताकत दोगुनी हो गई है.
गाइडेड मिसाइल सबमरीन- चीन ने कम से कम 6 ऐसी पनडुब्बियां लॉन्च की हैं जो वर्टिकल लॉन्च सिस्टम से लैस हैं, यानी ये पानी के अंदर से ही तेज रफ्तार एंटी-शिप मिसाइलें दाग सकती हैं.
Type-096 का इंतजार- यह चीन की अगली पीढ़ी की पनडुब्बी है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह अमेरिकी पनडुब्बियों जितनी ही शांत होगी, जिसे पकड़ना नामुमकिन होगा.
क्या है हुलुदाओ शिपयार्ड?
उत्तरी चीन में स्थित Bohai Shipbuilding Heavy Industry Co. (BSHIC) यानी हुलुदाओ शिपयार्ड को चीन ने पिछले कुछ सालों में काफी बड़ा कर दिया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यहां एक और विशाल निर्माण हॉल बनाया गया है, जिससे पनडुब्बियों के बनने की रफ्तार दोगुनी हो गई है.
चीन अपनी नौसेना के असली आंकड़ों को दुनिया से छिपाता है, इसलिए दुनिया को इन पनडुब्बियों का पता तब चलता है जब वे समुद्र में उतरने के लिए तैयार होती हैं.
भारत के लिए खतरा?
चूंकि चीन की परमाणु पनडुब्बियां बिना ईंधन भरे महीनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं. इसका मतलब है कि वे चुपके से हिंद महासागर में भारत के करीब पहुंच सकती हैं. अमेरिकी एडमिरलों ने चेतावनी दी है कि चीन जिस गति से अपनी नौसेना बढ़ा रहा है, वह जल्द ही ताइवान पर हमला करने की स्थिति में होगा.
भले ही अमेरिकी पनडुब्बियां बेहतर हों, लेकिन अगर चीन के पास संख्या बहुत ज्यादा हो गई, तो वह युद्ध के मैदान में अमेरिका को ‘चारों तरफ से घेर’ सकता है.
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प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
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