भीड़तंत्र बर्दाश्त नहीं… बांग्लादेश में नई सरकार की प्रदर्शनकारियों की चेतावनी – Hindustan Hindi News

बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद लगातार भीड़ द्वारा की गई हिंसा बढ़ती आ रही थी। यूनुस प्रशासन के दौरान भी अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया था। अब इस हिंसा पर बीएनपी की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी की तरफ से कहा गया है कि देश में भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले बढ़ने को ध्यान में रखते हुए ”भीड़ संस्कृति” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मीडिया से बात करते हुए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नव गठित सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि कानून व्यवस्था का मुद्दा तीन प्राथमिकताओं में से एक है और प्रशासन ”भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा” पर नकेल कसने के लिए कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, ”कानून व्यवस्था की स्थिति चाहे कितनी भी बिगड़ गई हो, हमें उसमें सुधार लाने का प्रयास करना होगा।”

इससे पहले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को अपने नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में उन्होंने वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने, कानून व्यवस्था बनाए रखने और सप्लाई लाइन को सुचारू रूप से चलाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 180 दिनों की प्राथमिकता पर बात की थी। बैठक के बाद, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और निर्बाध बिजली व ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानून व्यवस्था बहाल करने को प्राथमिकता बताया।

इसके बाद अहमद ने मीडिया से बात करते हुए हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश में हाल के महीनों में भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकांश में मोहम्मद यूनुस नीत अंतरिम सरकार के दौरा हिंदू समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया गया था। मानवाधिकार संगठन मानवाधिकार संस्कृति फाउंडेशन ने बताया कि जनवरी 2026 में भीड़ द्वारा पीट कर मार डाले जाने की 21 और पीटे जाने की 28 घटनाएं हुई हैं।

इसके अलावा बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने 2025 में 522 सांप्रदायिक हमले होने का दावा किया है, जिनमें हत्या, बलात्कार और मंदिर में तोड़फोड़ की घटनाएं शामिल हैं। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदाय के 116 लोगों, जिनमें ज्यादातर हिंदू थे, की हत्याएं हुईं। वहीं, मीडिया निगरानी संस्थाओं का दावा है कि अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से पत्रकारों पर 640 से अधिक हमले हुए।

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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