भारत में धर्म को कर्तव्य और प्रकृति को ईश्वर का अंश माना जाता है: डॉ गोपाल – Dainik Bhaskar

भास्कर संवाददाता | मुरैना
भारत की परंपरा वसुधैव कुटुंबकम् की रही है। जहां धर्म को कर्तव्य और प्रकृति को ईश्वर का अंश माना जाता है। जब देश अंग्रेजी शासन में था, तब डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज की विखंडित स्थिति पर चिंतन करते हुए 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। उनका उद्देश्य था समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त बनाना। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्थापना दिवस पर एसएएफ सामुदायिक भवन में बुधवार को आयोजित संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल कह रहे थे। कृष्ण गोपाल ने कहा कि हम धर्म को मानने वाले लोग हैं। जहां धर्म को कर्तव्य मानते हैं। भारत को माता मानते हैं प्रकृति को भी ईश्वर का अंश मानते हैं। भगवान राम ने भी रामसेतु की स्थापना करने के लिए समुद्र से अनुमति ली।
सारा हिंदू समाज बराबर है कोई भी छोटा नहीं है। हमें अपनी शक्ति को संगठित रखना होगा। उन्होंने संघ द्वारा चलाए जा रहे पंच परिवर्तन के बारे में बताया जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य से हमारे अच्छे समाज का निर्माण किया जा सके। कार्यक्रम से पूर्व भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर प्रारंभ किया। मंचासीन अतिथि महेंद्र शर्मा विभाग संघ चालक एवं महेश मोदी नगर संघ चालक रहे। मंच संचालन डॉ भारतेंदु सिंह तोमर ने किया। आरएसएस की स्थापना दिवस पर मुरैना में संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मौजूद संगठन के लोग और पदाधिकारी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर तीन बार लगाया प्रतिबंध जब आरएसएस के संगठन का विस्तार हुआ तो सबसे पहले गांधी जी की हत्या का असत्य आरोप संघ पर लगा। बाद में संघ को कोर्ट में बरी किया गया। इसके बाद बाबरी मस्जिद टूटने के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। लेकिन जब जब सरकार ने प्रतिबंध लगाने की कोशिश की तब तब संघ दोगुनी ताकत से आगे बढ़ा। देश में लगभग 1 लाख 30 हजार स्थान पर संघ के कार्य करता एकत्रित होते हैं और विद्या भारती द्वारा देश में 30 हजार विद्यालय का संचालन हो रहा है। जिसमें पूरे देश भर में लगभग 40 लाख विद्यार्थी अध्ययन करते हैं और जो डॉक्टर आईएएस आईपीएस इंजीनियर साइंटिस्ट बनाकर के पूरे विश्व में फैले हैं।
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