सिटी रिपोर्टर|दरभंगा
मैट्रिक परीक्षा के तीसरे दिन बुधवार को जिले के कुल 63 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। प्रथम पाली में सुबह 9:30 बजे से 12:45 बजे तक व द्वितीय पाली में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक द्वितीय भारतीय भाषा के अंतर्गत 100 अंकों की हिंदी और संस्कृत विषय की परीक्षा आयोजित की गई। सभी केंद्रों पर परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू हुई और कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न कराई गई। परीक्षा केंद्रों के बाहर परीक्षार्थियों के निकलने के दौरान कुछ स्थानों पर जाम की स्थिति बनी रही। विशेषकर शहर के प्रमुख केंद्रों के आसपास अभिभावकों और वाहनों की भीड़ के कारण यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि तैनात पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। किसी भी परीक्षा केंद्र से छात्र के निष्कासन या कदाचार की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। शहर में जिला स्कूल, सीएम साइंस कॉलेज, सीएम कॉलेज, मिल्लत कॉलेज, महारानी कन्या कॉलेज, एमएलएसएम कॉलेज, मारवाड़ी हाई स्कूल, मिथिला महिला कॉलेज और राजेंद्र प्रसाद गर्ल्स स्कूल सहित कुल 49 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा बेनीपुर अनुमंडल क्षेत्र में 5 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जा रही है। शेष केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि परीक्षा की सतत निगरानी के लिए विशेष परीक्षा सेल का गठन किया गया है, जो प्रत्येक दो घंटे पर सभी केंद्रों से रिपोर्ट प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई है। छात्रों से समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचने और नियमों का पालन करने की अपील की गई है। शुक्रवार को दोनों पालियों में सामाजिक विज्ञान व 21 फरवरी को विज्ञान विषय की परीक्षा आयोजित की जाएगी। मैट्रिक परीक्षा में गुरुवार को प्रथम पाली की परीक्षा में कुल 26,824 में से 26,445 छात्र उपस्थित रहे। जबकि 379 छात्र अनुपस्थित रहे। दूसरे पाली की परीक्षा में कुल 25,618 छात्रों में 25,294 उपस्थित रहे। जबकि 324 छात्र अनुपस्थित रहे।
10 अंकों के गद्यांश को हल करने में कुछ दिक्कत हुई परीक्षा देकर निकले छात्रों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। हिंदी विषय के परीक्षार्थियों ने बताया कि वस्तुनिष्ठ प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन थे। व्याकरण से भी प्रश्न पूछे गए थे। 10 अंकों के गद्यांश को हल करने में कुछ दिक्कत हुई, हालांकि अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम से ही थे। वहीं संस्कृत विषय के छात्रों ने कहा कि हिंदी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद करने में कठिनाई हुई, लेकिन प्रश्न सिलेबस के अनुरूप थे।
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