मेड इन पाकिस्तान iPhone! ऐपल को पटाने में लगी शहबाज सरकार, लेकिन 3 शर्तें… – AajTak

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पाकिस्तान में ऐपल को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ऐपल पाकिस्तान में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने वाला है. इसके लिए पाकिस्तान सरकार के सामने कंपनी ने तीन शर्तें रखी हैं. गुरुवार को पाकिस्तनी मीडिया में दावा किया कि पाकिस्तान ऐपल को देश में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने के लिए इंसेंटिव देने के लिए तैयार हो गया है. 
ऐपल नए फ्रेमवर्क के तहत पाकिस्तान में iPhones को रिफर्बिश करेगा, जिससे उन्हें दोबारा एक्सपोर्ट किया जा सके. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाक सरकार को रिफर्बिश्ड iPhone के रिएक्सपोर्ट से पहले साल में 10 करोड़ डॉलर के रेवेन्यू की उम्मीद है. हालांकि, इस बारे में कंपनी ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
दावा किया जा रहा है कि ऐपल के मैनेजमेंट ने पाकिस्तान सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं. उन्होंने डिस्काउंट पर जमीन की मांग की है. इसके अलावा 8 परसेंट का परफॉर्मेंस इंसेंटिव और तीन से चार साल पुराने iPhones को रिपेयर करने के प्लान की मांग की है. 
इंजिनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के CEO हमाद अली मंसूर ने पाकिस्तानी अखबार को बताया, ‘हमने नए प्रपोज्ड मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क में इन तीन शर्तों को शामिल किया है, जिसे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अप्रूव करना है.’
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उन्होंने बताया कि ऐपल इसी प्लान के साथ इंडोनेशिया, मलेशिया और भारत में आया था. जहां कंपनी ने शुरुआत में पुराने फोन्स को रिपेयर करना शुरू किया, जिससे लोकल मैनपावर को ट्रेन किया गया. बाद में कंपनी ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग भी शुरू की. 
पाकिस्तान सरकार पहले ही मौजूदा स्मार्टफोन मैन्युफैक्चर्र्स को 6 परसेंट का परफॉर्मेंस इंसेंटिव दे रही है. हालांकि, इसे ऐपल और दूसरे ग्लोबल मैन्युफैक्चर्र्स को लुभाने के लिए बढ़ाकर 8 परसेंट किया जा सकता है. 
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पाकिस्तान सरकार इस कदम के साथ ग्लोबल मैन्युफैक्चर्स को इनवाइट करना चाहती है. हालांकि, अभी इस प्लान को पाकिस्तानी पीएम का अप्रूवल नहीं मिला है. पाकिस्तान का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी लो-वैल्यू असेंबली तक सीमित है. सरकार के डेटा के मुताबिक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लोकलाइजेशन लगभग 12 परसेंट है. ये क्षेत्र के दूसरे देशों के मुकाबले बहुत कम है. 
पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि नए फ्रेमवर्क के लागू होने से लोकलाइजेशन बढ़ेगा. इसके 35 परसेंट तक पहुंचने की उम्मीद है. पाकिस्तान के सामने एक बड़ी चुनौती पावर सप्लाई, अनुचित टैक्स पॉलिसी, एक्सपोर्ट में दिक्कतों और लिमिटेड ट्रेन्ड लेबर की है.
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