दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के सामाजिक अध्ययन विभाग द्वारा ‘भीख में संलग्न बच्चों के लिए विशेष सेवाएं’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भिक्षावृत्ति के उन्मूलन पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। सीयूएसबी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांति गोपाल पाइन ने कहा कि सरकार विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, परंतु भिक्षावृत्ति के उन्मूलन के बिना विकसित भारत 2047 संभव नहीं है। प्रो. प्रणव कुमार, डीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज ने बताया कि भीख मांगने में संलग्न बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और उन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है। वहीं, प्रो. बिष्णु मोहन दास ने कहा कि भिक्षावृत्ति एक व्यवसाय का रूप ले चुकी है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बाल गरीबी का उन्मूलन आवश्यक है।
स्कूल ऑफ सोशल वर्क, नई दिल्ली के डॉ. के लिंगास्वामी ने भीख मांगने वाले बच्चों के लिए एकीकृत संरक्षण एवं पुनर्वास पर प्रकाश डाला। चाणक्य विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के प्रो. सुदेशना मुखर्जी ने बाल भिक्षावृत्ति के मार्गों का मानचित्रण और लक्षित सेवाएं विषय पर व्याख्यान दिया।
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