21वीं सदी एशिया की, भारत नेतृत्व करेगा, समन्वय से बढ़ें तो साइबर युग की हर चुनौती का समाधान संभव: मेघवाल – Dainik Bhaskar

केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा है कि किसी भी टेक्नोलॉजी को रोक नहीं सकते हैं। टेक्नोलॉजी सुविधा के साथ आशंकाएं भी लाती हैं। देश में कंप्यूटर आया था, तो उसका भी विरोध हुआ था। अभी इंडस्ट्री 4.0 चल रहा हैं, इसमें आर्टिफिशियल इंटे
साइबर अपराध भी इसी की देन है, लेकिन हमें इससे डरने की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी एशिया की होगी और भारत उसका नेतृत्व करेगा। ऐसे में सरकार, समाज, ब्यूरोक्रेसी व न्यायपालिका चारों स्तंभ यदि समन्वय के साथ आगे बढ़ें, तो साइबर युग की हर चुनौती का समाधान संभव है। यह बात केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने रविवार को रालसा के साइबर सुरक्षा व जागरुकता और न्याय तक समावेशी पहुंच राष्ट्रीय सेमिनार के समापन मौके पर कही।
प्रदेश के न्यायिक अफसर पूरी ताकत से आमजन को न्याय देने के लिए काम कर रहे
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध का हौवा खड़ा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता, प्रशिक्षण और सख्त कानून की जरूरत है।” कार्यक्रम में हाईकोर्ट के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि देश में साइबर सुरक्षा व जागरुकता विषय पर ऐसा सेमिनार एक अभिनव प्रयास है। उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा साइबर पुलिस स्टेशन एवं विशेष साइबर कोर्ट स्थापित किए जाने की घोषणा के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि डिजिटल युग में न्याय को और अधिक सुलभ बनाने हेतु रालसा निरंतर प्रयासरत रहेगा। सेमिनार के तीसरे दिन के अंतिम सत्र में एआई के युग में साइबर सुरक्षा व डेटा संरक्षण की बढ़ती जरूरत पर चर्चा हुई। जस्टिस भाटी बोले, राजस्थान का क्षेत्रफल 126 देशों से बड़ा, जज न्याय देने के लिए एक हजार किमी की यात्रा करते हैं- रालसा के साइबर सुरक्षा सेमिनार में बोलते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेन्द्र भाटी ने कहा कि आमजन हम से उम्मीद करता है कि उसका जीवन खतरे में होगा, जब उसे आर्थिक नुकसान हो रहा होगा, जब उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात होगी, तब न्यायपालिका और लीगल सिस्टम उसकी आवाज को उठाएगा। संकटमोचक की तरह उसकी रक्षा करेगा। उन्होंने सभागार में मौजूद न्यायिक अधिकारियों से कहा कि आप उस राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो क्षेत्रफल के लिहाज से 126 देशों से बड़ा हैं। जिसमें हमारे न्यायिक अधिकारी (जजेज) न्याय देने के लिए एक हजार किलोमीटर की यात्रा करते हैं।
जस्टिस पुष्पेन्द्र भाटी ने कहा कि एक बार हमें दिल्ली के जज कह रहे थे कि ट्रांसफर बहुत छोटी बात है। दिल्ली न्याय क्षेत्र में ट्रांसफर का मतलब है, दस-बीस-तीस किलोमीटर। लेकिन हमने उन्हें गर्व से कहा कि हमारे यहां एक जगह से दूसरी जगह जाने में सैकड़ों किलोमीटर और कभी-कभी हजारों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता हैं। लेकिन उसके बाद भी प्रदेश के न्यायिक अधिकारी पूरी ताकत से आमजन को न्याय देने के लिए काम कर रहे हैं।
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