समाज की एकता और समरसता से ही बनेगा सशक्त भारत : दत्तात्रेय – Dainik Bhaskar

भरतपुर | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत भूमि पर रहने वाले सभी लोग एक ही मातृभूमि की संतान हैं और परिवार भाव से संगठित, समरस तथा परस्पर विश्वास के साथ रहेंगे तो भारत स्वतः ही शक्तिशाली होगा। होसबाले रविवार को भ
कार्यक्रम में संत काठिया महाराज, संत सत्यपाल गिरी महाराज, संत मोहनदास व अतिथि के रूप में सोनिला गौड़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में होसबाले ने कहा कि कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले सौ वर्षों से समाज संगठन के कार्य में निरंतर सक्रिय है। संघ का मूल उद्देश्य समाज को संगठित, जागृत और समरस बनाना है।
उन्होंने कहा कि जाति, भाषा, क्षेत्र और पंथ के आधार पर भेदभाव समाज को विखंडित करता है। भारत के इतिहास में सभी वर्गों और समुदायों ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए सामाजिक विभाजन की मानसिकता को त्यागकर समरसता का वातावरण बनाना समय की आवश्यकता है।
भास्कर न्यूज | भरतपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय चेतना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आधार पर निर्मित है तथा विविध अभिव्यक्तियों के बावजूद उसकी सांस्कृतिक आत्मा एक है। इस एकत्व की भावना को ही भारतीयता अथवा हिंदुत्व कहते हैं। यह विचार किसी के विरोध का नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण की दृष्टि से प्रेरित है होसबाले रविवार को भरतपुर में प्रमुखजन गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रबोध और समाज बोध का विकास भारत की उन्नति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक चेतना में निहित है। यही वैचारिक अधिष्ठान राष्ट्र को सशक्त बनाता है और समाज को संगठित करता है। उन्होंने कहा कि भारत को अनेक संस्कृतियों का देश कहना उचित नहीं, बल्कि यहां संस्कृति एक है, जिसकी अभिव्यक्तियां भिन्न-भिन्न रूपों में दिखाई देती हैं।
भाषा, परंपरा, पर्व और जीवनशैली में विविधता हो सकती है, किंतु उनके मूल में एक समान सांस्कृतिक भाव विद्यमान है। इसी आधार पर राष्ट्रीय एकता का निर्माण होता है। होसबाले ने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण करना है। व्यक्तिगत चरित्र और राष्ट्रीय चरित्र दोनों महत्वपूर्ण हैं। महिला सुरक्षा और सम्मान को उन्होंने सभ्य समाज का प्रमुख मापदंड बताया। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती हैं तो वह समाज सशक्त माना जाता है। मुख्य अतिथि अपना घर संस्थान की डॉ. माधुरी भारद्वाज एवं अध्यक्षता प्रांत संघचालक महेंद्र सिंह मग्गो ने की।
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