ईरान में करीब 10 हजार भारतीय, US से जंग की आहट के बीच बढ़ी छात्रों की टेंशन – AajTak

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मिडिल ईस्ट में उथल-पुथल का दौर जारी है. ईरान पर अमेरिकी हमले के खतरे के बीच भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. सरकार ने ईरान में रह रहे नागरिकों को वहां से तुरंत निकलने की सलाह दी है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की संख्या कितनी है और वहां वे किन-किन क्षेत्रों से आजीविका कमा रहे हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में मौजूदा समय में 9000 से दस हजार भारतीय नागरिकों के रहने का अनुमान है. इनमें छात्रों से लेकर कारोबारी और पेशेवर कामगार शामिल हैं. 
ईरान में भारतीय समुदाय का सबसे बड़ा हिस्सा छात्रों का है, विशेष रूप से मेडिकल और पैरामेडिकल शिक्षा के लिए कई भारतीय छात्र तेहरान, मशहद और अन्य शहरों की यूनिवर्सिटियों में पढ़ रहे हैं. किफायती फीस की वजह से ईरान पिछले कुछ वर्षों में भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है. इनके अलावा दवा-उद्योग, पेट्रोकेमिकल्स, छोटे-मोटे ट्रेडिंग कारोबार और आयात-निर्यात से जुड़े भारतीय व्यापारी भी वहां सक्रिय हैं. कुछ लोग आईटी सेवाओं, अनुवाद, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में पेशेवर तौर पर काम कर रहे हैं. शिया धार्मिक स्थलों की वजह से समय-समय पर भारतीय तीर्थयात्री भी बड़ी संख्या में ईरान पहुंचते हैं.
बता दें कि भारत सरकार की यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है, जब वहां क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा है. सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी ने अनिश्चितता बढ़ाई है. ऐसे में प्रोटेस्ट, संभावित सैन्य तनाव और प्रतिबंधों के बीच आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है. ऐसे हालात में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है इसलिए भारतीयों से कहा गया है कि वे भीड़-भाड़ वाले इलाकों और प्रदर्शनों से दूर रहें, अपने दस्तावेज हमेशा साथ रखें, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और दूतावास से नियमित संपर्क बनाए रखें.
ईरान में रह रहे भारतीयों के परिवारों में भी स्वाभाविक रूप से चिंता है, खासकर उन छात्रों के माता-पिता जो पहली बार विदेश में पढ़ रहे हैं. ये एडवाइजरी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद जारी की गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर नए समझौते के लिए 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें असफल होने पर बुरे परिणाम की चेतावनी दी गई है. अमेरिका ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है, जिसमें वॉरशिप्स, फाइटर जेट्स और अन्य संसाधन शामिल हैं.
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