Neem Karoli Baba: खुशी, दुख और क्रोध में न करें ये 3 काम, जिंदगी बदल देगी नीम करोली बाबा की ये सीख – News24 Hindi

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Neem Karoli Baba Teachings:उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार में जन्मे नीम करोली बाबा आधुनिक भारत के प्रसिद्ध संत माने जाते हैं. उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है. बाद में वे आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ गए. उत्तराखंड के कैंची धाम आश्रम ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. उनके भक्त मानते हैं कि बाबा ने अनेक चमत्कार किए. कहा जाता है कि वे बिना साधनों के दूर की घटनाएं जान लेते थे. कई लोग उन्हें हनुमान भक्त संत के रूप में पूजते हैं. भारत ही नहीं, अमेरिका और यूरोप तक उनके शिष्य फैले. एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसे नाम भी उनके आश्रम से जुड़े बताए जाते हैं. आज भी लाखों लोग उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं.
बाबा का मानना था कि जीवन बदलने के लिए बड़ी बातों से पहले छोटी आदतों को सुधारना जरूरी है. वे कहते थे कि इंसान अपनी रोज की सोच और व्यवहार से अपना भविष्य बनाता है. उनकी सीख सीधी थी. मन को संभालो. शब्दों को संभालो. फैसलों को संभालो.
अक्सर गुस्से में हम वह बोल देते हैं जो दिल में नहीं होता. बाद में पछतावा होता है. रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं. बाबा की सीख थी कि क्रोध के समय चुप रहना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है. उस पल खुद को रोक लेना कई टूटते संबंध बचा सकता है. गुस्सा शांत होने के बाद कही गई बात ज्यादा असरदार होती है.
यह भी पढ़ें: Vidur Niti: इंसान के रूप में कौन है गीदड़? जानें किन लोगों को विदुर नीति में कहा गया है धरती पर बोझ
बहुत ज्यादा खुशी भी कई बार समझ को कमजोर कर देती है. उस समय किया गया वादा बोझ बन सकता है. बाबा कहते थे कि उत्साह में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है. इसलिए जब मन बहुत प्रसन्न हो, तब भी संतुलन जरूरी है. हर वादा सोच समझकर करें.
दुख के समय मन भारी होता है. सोच साफ नहीं रहती है. ऐसे में लिया गया निर्णय अक्सर गलत दिशा देता है. बाबा ने अपने उपदेश में कहा था कि जब तक मन शांत न हो, तब तक बड़े फैसले टाल देना बेहतर है. धैर्य रखना भी साधना का हिस्सा है.
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज एक विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है. हर साल हजारों लोग वहां पहुंचते हैं. सोशल मीडिया के दौर में भी उनके विचार तेजी से फैल रहे हैं. उनकी शिक्षाएं जटिल नहीं हैं. वे जीवन के साधारण नियमों की याद दिलाती हैं. गुस्सा रोको. खुशी में संभलो. दुख में ठहरो. यही तीन बातें जीवन को नई दिशा दे सकती हैं.
यह भी पढ़ें: Rangbhari Ekadashi: रंगभरी एकादशी कब है, क्यों है खास, जानें शिव-पार्वती को समर्पित इस उत्सव की पूजा विधि और पारण टाइमिंग
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Neem Karoli Baba Teachings:उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार में जन्मे नीम करोली बाबा आधुनिक भारत के प्रसिद्ध संत माने जाते हैं. उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है. बाद में वे आध्यात्मिक जीवन की ओर मुड़ गए. उत्तराखंड के कैंची धाम आश्रम ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. उनके भक्त मानते हैं कि बाबा ने अनेक चमत्कार किए. कहा जाता है कि वे बिना साधनों के दूर की घटनाएं जान लेते थे. कई लोग उन्हें हनुमान भक्त संत के रूप में पूजते हैं. भारत ही नहीं, अमेरिका और यूरोप तक उनके शिष्य फैले. एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसे नाम भी उनके आश्रम से जुड़े बताए जाते हैं. आज भी लाखों लोग उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं.
बाबा का मानना था कि जीवन बदलने के लिए बड़ी बातों से पहले छोटी आदतों को सुधारना जरूरी है. वे कहते थे कि इंसान अपनी रोज की सोच और व्यवहार से अपना भविष्य बनाता है. उनकी सीख सीधी थी. मन को संभालो. शब्दों को संभालो. फैसलों को संभालो.
अक्सर गुस्से में हम वह बोल देते हैं जो दिल में नहीं होता. बाद में पछतावा होता है. रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं. बाबा की सीख थी कि क्रोध के समय चुप रहना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है. उस पल खुद को रोक लेना कई टूटते संबंध बचा सकता है. गुस्सा शांत होने के बाद कही गई बात ज्यादा असरदार होती है.
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बहुत ज्यादा खुशी भी कई बार समझ को कमजोर कर देती है. उस समय किया गया वादा बोझ बन सकता है. बाबा कहते थे कि उत्साह में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है. इसलिए जब मन बहुत प्रसन्न हो, तब भी संतुलन जरूरी है. हर वादा सोच समझकर करें.
दुख के समय मन भारी होता है. सोच साफ नहीं रहती है. ऐसे में लिया गया निर्णय अक्सर गलत दिशा देता है. बाबा ने अपने उपदेश में कहा था कि जब तक मन शांत न हो, तब तक बड़े फैसले टाल देना बेहतर है. धैर्य रखना भी साधना का हिस्सा है.
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज एक विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है. हर साल हजारों लोग वहां पहुंचते हैं. सोशल मीडिया के दौर में भी उनके विचार तेजी से फैल रहे हैं. उनकी शिक्षाएं जटिल नहीं हैं. वे जीवन के साधारण नियमों की याद दिलाती हैं. गुस्सा रोको. खुशी में संभलो. दुख में ठहरो. यही तीन बातें जीवन को नई दिशा दे सकती हैं.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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