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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मंगलवार को बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के जरिए जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा भारतीय सेना का अपमान किया गया है.
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय के नामपट्ट पर काली स्याही पोत दी. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि परिसर के अंदर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) से जुड़े संगठन ‘स्पार्क’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम भारत विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला था. उनका दावा है कि कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है.
प्रदर्शनकारियों द्वारा साझा किए गए पोस्टर के मुताबिक कार्यक्रम 23 फरवरी को ‘कुनन-पोशपोरा’ घटना से संबंधित था. पोस्टर में लिखा था कि 23-24 फरवरी 1991 की रात कथित सामूहिक दुष्कर्म की एक भयावह घटना हुई थी और 35 वर्ष बाद भी किसी को सजा नहीं मिली है. इसमें यह भी कहा गया कि पीड़ित अब भी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यह कश्मीर में हुई कई घटनाओं में से एक है.
एबीवीपी का आरोप है कि इस प्रकार के कार्यक्रम देश को विभाजित करने की साजिश का हिस्सा हैं. संगठन के एक कार्यकर्ता ने दावा किया कि जब उन्होंने कार्यक्रम का विरोध किया तो उन्हें परिसर के अंदर रोका गया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई. उनका कहना था कि उनके कार्यकर्ता तिरंगा झंडा लिए हुए थे, फिर भी उन पर चप्पलों से हमला किया गया. एबीवीपी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा.
विश्वविद्यालय सूत्रों ने बताया कि संबंधित कार्यक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आयोजित नहीं था और न ही उसे आधिकारिक समर्थन प्राप्त था. हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. बेंगलुरु ग्रामीण जिला पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि एहतियातन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए. मामले की जांच जारी है.
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. संगठन ने एआईएसए और उससे जुड़े संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने तथा परिसर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्रों और पदाधिकारियों की जांच कराने की मांग भी की है.
बेंगलुरु रूरल SP ने आजतक से कहा कि हालात शांतिपूर्ण हैं. पुलिस की जानकारी या पहले से इजाज़त के बिना वे गेट के सामने जमा हो गए और उन्होंने कुछ नारे लगाने शुरू कर दिए. इसलिए हमने उन्हें बचाव के तौर पर हिरासत में ले लिया है. 18 सदस्य थे, उन सभी को हिरासत में ले लिया गया. मामले की गंभीरता के आधार पर हम ज़रूरी कार्रवाई करेंगे.
कश्मीर विरोधी नारों पर पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं है. किसी ने पोस्ट किया है और लोगों ने बिना सोचे-समझे उस पर रिएक्ट किया है. उन्हें कम से कम यह तो वेरिफाई करना चाहिए था कि इसे किसने पोस्ट किया है. ऐसा किए बिना, लोगों ने विरोध के साथ रिएक्ट किया है. वे कानून अपने हाथ में नहीं ले सकते. उन्हें पहले बता देना चाहिए था कि वे विरोध करना चाहते हैं. क्या वे कानून से ऊपर हैं? नहीं, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है.
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