'खामोशी से महामारी बन रहे सड़क हादसे, हर साल डेढ़ लाख मौतें', UN दूत का बड़ा बयान – Jagran

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सड़क सुरक्षा दूत जीन टोड ने सड़क हादसों को 'खामोश महामारी' बताया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर …और पढ़ें
सड़क हादसे ‘खामोश महामारी’ बन रहे: UN दूत
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में सड़क हादसों से होने वाली मौतों को कम करने के लिए सामूहिक और ठोस प्रयासों की जरूरत पर बल देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सड़क सुरक्षा मामलों के विशेष दूत जीन टोड ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं चुपचाप एक महामारी का रूप ले चुकी हैं।
टोड ने कहा कि भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देशों में यह समस्या हर वर्ष हजारों परिवारों को असमय शोक में डुबो रही है।
इस अवसर पर टोड ने सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अभियान से जुड़ा एक वीडियो जारी कर लोगों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।
प्रेस वार्ता में टोड ने कहा कि भारत में सड़क नेटवर्क और वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे में बेहतर सड़क डिजाइन और सख्त प्रवर्तन तथा दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता जैसे उपायों से मृतकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
टोड की यह यात्रा मराकेश में हुई ‘मराकेश घोषणा’ के लगभग 11 महीने बाद हो रही है। इस घोषणा में यूएन सदस्य देशों ने सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई के दूसरे दशक (2021-2030) के तहत प्रयास तेज करने और 2030 तक हादसों में मरने वालों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य तय किया है।
भारत में सड़क हादसे एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 1.5 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। प्रति एक लाख आबादी पर मृत्यु दर लगभग 15 से अधिक है।
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