USS Gerald Ford: अमेरिकी नौसेना के सबसे महंगे एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald Ford में सीवेज पाइप फटने की खबर है. 600 से ज्यादा टॉयलेट जाम हैं. जिसको लेकर रोजाना शिकायतें दर्ज हो रही हैं.
USS Gerald Ford: अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक, सबसे घातक और दुनिया के सबसे महंगे जंगी जहाज USS जेराल्ड फोर्ड (USS Gerald Ford) से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुपरपावर अमेरिका की साख पर ‘बदबूदार’ धब्बा लगा दिया है. $17.5 बिलियन यानी करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए की लागत से बना यह सुपरकैरियर, जो ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए तैनात है, इस वक्त दुश्मनों की मिसाइलों से नहीं बल्कि अपने ही ‘सीवेज सिस्टम’ से जूझ रहा है.
मीडिया रिपोर्ट में दावा
Military Watch Magazine की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के सबसे नए और अत्याधुनिक सुपरकैरियर USS गेराल्ड फोर्ड में रा सीवेज बहने की गंभीर समस्या सामने आई है. सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज में जहाज के भीतर गंदगी का सैलाब बहता दिख रहा है. यह घटना तब हुई है जब यह जहाज वेनेजुएला के मिशन के बाद अब ईरान के खिलाफ भूमध्य सागर में तैनात है.
‘वेस्ट मैनेजमेंट’ में तकनीकी खामी
USS जेराल्ड फोर्ड को बनाने में अमेरिका ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन इसके ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ में एक बड़ी तकनीकी खामी रह गई. जहाज के पाइप इतने संकरे हैं कि वे बार-बार जाम हो जाते हैं. हालात इतने खराब हैं कि जहाज पर मौजूद 600 से ज्यादा टॉयलेट्स अक्सर काम करना बंद कर देते हैं. बेचारे अमेरिकी सैनिकों को टॉयलेट जाने के लिए 45-45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ता है.
3.3 करोड़ रुपए में साफ होता टॉयलेट
रिकॉर्ड बताते हैं कि 2025 की तैनाती के दौरान हर दिन औसतन एक ‘सीवेज कॉल’ दर्ज की गई. एक बार तो सिर्फ 4 दिनों के भीतर 205 बार सीवेज सिस्टम फेल हुआ. इसे साफ करने के लिए एक खास ‘एसिड फ्लश’ का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी एक बार की लागत $4,00,000 यानी करीब 3.3 करोड़ रुपए आती है.
सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि यह सफाई केवल बंदरगाह पर ही हो सकती है, समुद्र के बीच मिशन पर नहीं. गंदगी की इस समस्या और तैनाती की अवधि बढ़ने से अमेरिकी नौसैनिकों का मनोबल बुरी तरह गिर गया है.
USS जेराल्ड फोर्ड क्यों हुआ नाकाम?
रिपोर्ट की मानें तो यह दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत है, लेकिन जो तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं. अमेरिकी ताकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐसे में, एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अमेरिका जिस एयरक्राफ्ट कैरियर पर रौब झाड़ता है, इतनी खामियों के बावजूद क्या जंग लड़ेगा. आइए समझते हैं क्यों फेल हुआ USS जेराल्ड फोर्ड.
1. सीवेज सिस्टम: ‘इंजीनियरिंग का फेलियर’- जहाज के संकरे पाइपों का जाम होना अब एक स्थायी समस्या बन गया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस बात का उदाहरण है कि “जहाज कैसे नहीं बनाना चाहिए.”
2. इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट में देरी- जहाज का सबसे मुख्य हथियार उसके विमान होते हैं. लेकिन इसके इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट सिस्टम में इतनी खामियां हैं कि यह अभी तक 5वीं पीढ़ी के F-35C विमानों को पूरी तरह हैंडल नहीं कर पा रहा है. इस मामले में चीन का नया सुपरकैरियर ‘फ्यूजियन’ अब अमेरिका से आगे निकलता दिख रहा है.
3. रडार और सेंसर्स में खराबी- इस जहाज के रडार इतने खराब निकले कि नौसेना को भविष्य के ‘फोर्ड क्लास’ जहाजों के लिए पूरा नया सेंसर सुइट बनाने का फैसला करना पड़ा है.
4. भारी भरकम लागत, कम नतीजे- यह अपने पिछले ‘नमित्ज क्लास’ जहाजों से दोगुना महंगा है, लेकिन 2017 में सेवा में आने के बावजूद इसे अपना पहला फुल ऑपरेशन शुरू करने में 5 साल ज्यादा का समय लग गया.
5. मिशन पर असर?- हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टॉयलेट की समस्या से मिशन की ताकत कम नहीं हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि गंदगी के बीच रहने वाले सैनिकों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करना बेमानी है.
ये भी पढ़ें- Rafale को ‘बर्बाद’ कर देगा ये एशियाई लड़ाकू विमान! 5वीं पीढ़ी से लैस किया जा रहा KF-21; डगमगाएगा Dassault का ग्लोबल दबदबा?
Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, जियो-पॉलिटिक्स, इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी, हथियारों और डिफेंस की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप
प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
By accepting cookies, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.