उत्तराखंड के रुद्रपुर में नमाज़ पढ़ने को लेकर मारपीट का वीडियो वायरल, एफ़आईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने क्या बताया – BBC

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उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर ज़िले के रुद्रपुर में एक मंदिर के पास खुले मैदान में नमाज़ पढ़ रहे एक मुस्लिम मज़दूर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है. इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.
वीडियो में एक व्यक्ति नमाज़ पढ़ रहे शख़्स को लात-घूँसों और डंडे से मारते और धार्मिक नारा लगाने के लिए कहते हुए दिखाई देता है.
ऊधम सिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि नमाज़ पढ़ने वाले मोहम्मद शाहिद की शिकायत पर पुलिस ने अरविंद शर्मा नाम के व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शाहिद ने शिकायत में कहा है कि नमाज़ पढ़ने के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और धार्मिक नारे न लगाने पर नहर में फेंकने की धमकी दी गई.
अभियुक्त अरविंद शर्मा एक मंदिर के प्रबंधक हैं. उन्होंने आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि संबंधित व्यक्ति को पहले भी वहाँ नमाज़ पढ़ने से रोका गया था, लेकिन न मानने पर उन्होंने उसे वहाँ से हटाया गया.
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रुद्रपुर के दूधिया नगर निवासी मोहम्मद शाहिद पिछले लगभग 22 वर्षों से मिस्त्री का काम कर रहे हैं. वह इन दिनों अटरिया देवी मंदिर के पास एक निर्माणाधीन मकान में काम कर रहे थे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में शाहिद ने कहा कि मंदिर के पास एक छोटा मैदान है और वे पिछले चार दिनों से वहीं नमाज़ पढ़ रहे थे. उनका दावा है कि उन्होंने वहाँ के माली से अनुमति भी ली थी और उन्हें लगा कि किसी को आपत्ति नहीं होगी.
शाहिद के मुताबिक़ घटना के दिन, वह दोपहर लगभग डेढ़ बजे नमाज़ पढ़ने के लिए बैठे थे. उन्होंने नमाज़ पढ़ना शुरू ही किया था कि एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया और लातों से मारना शुरू कर दिया.
शाहिद का आरोप है कि जब वह अपनी टोपी, रूमाल और आधार कार्ड उठाकर जाने लगे तो हमलावर ने बांस के डंडे से उन्हें पीटना शुरू कर दिया.
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शाहिद ने कहा, "उसने मुझसे धार्मिक नारा लगाने को कहा. उसने कहा कि अगर नहीं लगाऊंगा तो नहर में फेंक देगा. जान बचाने के लिए मैंने वही किया जो उसने कहा."
शाहिद का कहना है कि उनके बाएं हाथ, कंधे और पसलियों में दर्द है और डॉक्टर ने कुछ दिन आराम की सलाह दी है.
शाहिद कहते हैं, "मैं दिहाड़ी मज़दूर हूँ. काम बंद होगा तो घर कैसे चलेगा? इलाज के पैसे की भी बड़ी चिंता है."
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दूधिया नगर के पार्षद अशफ़ाक़ अंसारी का कहना है कि शाहिद जिस मकान में काम कर रहे थे, वह निर्माणाधीन है और नमाज़ के लिए उपयुक्त नहीं है.
उनके अनुसार, "घटना वाले दिन शाहिद एक खंभे के पीछे नमाज़ पढ़ रहे थे. अरविंद शर्मा नाम के व्यक्ति ने पहले उन्हें मारा और फिर 'जय श्री राम' का नारा लगवाया."
अंसारी का आरोप है कि जब शाहिद वहाँ से चले गए तो अभियुक्त उनके पीछे निर्माण स्थल तक गया और वहाँ मौजूद लोगों से भी कथित तौर पर अभद्र भाषा में बात की.
शाहिद के मेडिकल परीक्षण में बाएं हाथ और पसलियों में चोट की पुष्टि हुई है. उन्हें सिडकुल चौकी ले जाया गया, जहाँ निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया गया."
रुद्रपुर वार्ड नंबर 20 के पार्षद परवेज़ क़ुरैशी के मुताबिक, "जिस ज़मीन पर नमाज़ पढ़ी जा रही थी, वह अटरिया देवी मंदिर के सामने खाली पड़ी है और मेले के आयोजन के लिए अरशद ख़ान नाम के व्यक्ति ने मंदिर को उपलब्ध कराई है. उनका कहना है कि शाहिद पिछले तीन-चार दिनों से वहीं नमाज़ पढ़ रहे थे और वह स्थान मंदिर से कुछ दूरी पर है."
क़ुरैशी आरोप लगाते हैं कि मारपीट के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया, पीड़ित की शिकायत पर मुक़दमा दर्ज हुआ है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है.
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अटरिया देवी मंदिर के प्रबंधक अरविंद शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
उनका दावा है, "संबंधित व्यक्ति पिछले तीन दिनों से वहाँ नमाज़ पढ़ रहा था. उसे एक दिन मना किया गया, वह नहीं माना. दूसरे दिन उसने मेरे कर्मचारी से गाली-गलौज की. तीसरे दिन भी मना करने पर नहीं माना, जिसके बाद मैंने उसे वहाँ से उठाकर भगाया."
अरविंद शर्मा का कहना है कि हर किसी को अपने धर्म की पूजा का अधिकार है, "लेकिन किसी के घर में नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती. अगर मैं किसी के घर में पूजा करने जाऊँ तो क्या कोई मुझे करने देगा?"
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ऊधम सिंह नगर के एसएसपी अजय गणपति ने अभियुक्त की गिरफ्तारी न होने के सवाल पर कहा, "सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार सात साल से कम सज़ा वाले मामलों में पहले नोटिस दिया जाता है. अगर जांच के दौरान सात साल से अधिक सज़ा वाले प्रावधान जुड़ते हैं तो गिरफ्तारी की जाती है."
पंतनगर कोतवाली के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र चौधरी ने कहा कि तहरीर के आधार पर मुक़दमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
उनका कहना है, "किसी भी नागरिक को उसकी धार्मिक आस्था के कारण हिंसा का सामना करना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की."
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि प्रदेश का स्वरूप बिगड़ने न दिया जाए और यदि कोई ऐसी घटना दिखे तो स्थानीय स्तर पर भी इसका विरोध किया जाना चाहिए.
वहीं राज्य में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अजय भट्ट ने इसे दो व्यक्तियों के बीच का विवाद बताया है.
उनका कहना है कि अगर किसी के साथ ग़लत व्यवहार हुआ है तो थाने में रिपोर्ट की जाए और पुलिस सत्यता के आधार पर समाधान निकालेगी.
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