Feedback
आज के दिन ही 28 फरवरी 1991 कुवैत इराक के चंगुल से मुक्त हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश सीनियर ने टेलीविजन प्रसारण में घोषणा की थी – कुवैत मुक्त हो गया है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के सामने कई कठोर मांगें रखीं थी.
जब कुवैत पर इराक ने जबरन कब्जा कर लिया था. तब अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ा. अमेरिका ने ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म शुरू किया. इसे फारस की खाड़ी का युद्ध या प्रथम खाड़ी युद्ध के नाम से भी जाना जाता है. 1991 में तब शुरू हुआ जब इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने अगस्त 1990 की शुरुआत में पड़ोसी देश कुवैत पर आक्रमण और कब्ज़ा करने का आदेश दिया.
इन कार्रवाइयों से चिंतित होकर, सऊदी अरब और मिस्र जैसी अरब शक्तियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से हस्तक्षेप करने का आह्वान किया. हुसैन ने जनवरी 1991 के मध्य तक कुवैत से हटने की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मांगों को मानने से इनकार कर दिया.
इसके बाद ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म की शुरुआत हुई. इसके जरिए अमेरिका के नेतृत्व में एक बड़ा हवाई हमला किया गया. 42 दिनों के निरंतर हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने 28 फरवरी को युद्धविराम की घोषणा की. उस समय तक, कुवैत में अधिकांश इराकी सेना या तो आत्मसमर्पण कर चुकी थी या भाग गई थी.
ऐसे इराक ने कुवैत पर किया था कब्जा
संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से अगस्त 1988 में हुए युद्धविराम के साथ ईरान-इराक युद्ध समाप्त हो गया था. करीब दो साल बाद 1990 में हुसैन ने अपने पड़ोसी देश कुवैत पर अपनी साझा सीमा पर स्थित अर-रुमैला तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल की चोरी का आरोप लगाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि कुवैत और सऊदी अरब इराक के 30 अरब डॉलर के विदेशी ऋण को माफ करें. इसके साथ ही उन पर पश्चिमी तेल-खरीददार देशों को खुश करने के लिए तेल की कीमतों को कम रखने की साजिश रचने का आरोप लगाया.
यह भी पढ़ें: आज ही हुई थी कार्बन-14 की खोज, जिससे तय होती है जीवाश्मों की आयु
हुसैन के भड़काऊ भाषण के अलावा, इराक ने कुवैत की सीमा पर सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी थी. इन कार्रवाइयों से चिंतित होकर, मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने अमेरिका या खाड़ी क्षेत्र से बाहर की अन्य शक्तियों के हस्तक्षेप से बचने के प्रयास में इराक और कुवैत के बीच वार्ता शुरू की.
2 अगस्त 1990 को इराक ने किया कुवैत पर हमला
सद्दाम हुसैन ने महज दो घंटे बाद ही बातचीत तोड़ दी और 2 अगस्त, 1990 को कुवैत पर आक्रमण का आदेश दिया. हुसैन की यह धारणा कि उसके साथी अरब देश कुवैत पर उसके आक्रमण को चुपचाप देखते रहेंगे और इसे रोकने के लिए बाहरी मदद नहीं लेंगे, एक गलत अनुमान साबित हुई.
यह भी पढ़ें: जब अमेरिका में फ्रांस का वर्चस्व खत्म हुआ, 7 साल तक चला था युद्ध
8 अगस्त को, जिस दिन इराकी सरकार ने औपचारिक रूप से कुवैत को अपने कब्जे में ले लिया – हुसैन ने इसे इराक को 19वां प्रांत कहा – उसी दिन ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड नामक सैन्य ऑपरेशन के रूप में पहले अमेरिकी वायु सेना के लड़ाकू विमान सऊदी अरब पहुंचने लगे. इसके बाद कुवैत को इराकी कब्जे से मुक्त कराने का अभियान शुरू हो गया.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू