अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया है. अमेरिका ने हवाई और समुद्र दोनों मार्गों से ईरान पर हमले किए हैं. अमेरिका-इजरायल ने राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसी और सैनिक स्थल समेत 30 ठिकानों पर हमला किया गया है. ट्रंप ने साफ तौर पर कहा गया है कि हम किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे. इस बीच, ईरान ने भी इजरायल पर अटैक किया है. यह अटैक धीरे-धीरे भीषण जंग में तब्दील हो रहा है, जो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए टेंशन पैदा कर सकती है. खासकर कच्चे तेल के आयात के संबंध में महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.
इस युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में तगड़ा इजाफा हो सकता है. साथ ही इसके सप्लाई चेन में भी बाधा आ सकती है, क्योंकि दुनिया का 40% से ज्यादा कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जलमार्ग से आता है. यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है और यह ईरान के अधीन आता है. भारत-चीन समेत दुनिया के ज्यादातर देश इसी मार्ग से कच्चा तेल आयात करते हैं. यह मार्ग खाड़ी देशों के कच्चे तेल निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है.
अगर ईरान इसे बंद करता है तो दुनिया का ज्यादातर कच्चा तेल बाधित हो सकता है, जिसका दुनिया की इकोनॉमी पर गहरा असर पड़ सकता है. यही नहीं कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश में पेट्रोल-डीजल के भाव पर असर डालकर महंगाई में इजाफा कर सकती हैं. आइए जानते हैं, कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा ये मुसीबतें बढ़ाने वाला साबित हो सकता है?

भारत 50 फीसदी से ज्यादा तेल मंगाता है?
द प्रिंट की एक खबर के अनुसार, कमोडिटी ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों से जानकारी मिलती है कि तेल के कुल आयात में भारत की निर्भतरता इस होर्मुज चोकपॉइंट पर बढ़कर 50 फीसदी हो चुकी है और हाल ही के महीनों में इसमें ज्यादा बढ़ोतरी हुई है. भारत ने इस साल 24 फरवरी तक भारत ने खाड़ी देशों से लगभग 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीपीडी) तेल का आयात किया है, जो यह बताता है कि खाड़ी देशों से कितनी बड़ी आपूर्ति भारत की हो रही है.
होर्मुज के रास्ते कितना भारत आता है तेल?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट है. इस संकरे कॉरिडोर से पूरी दुनिया का करीब 20 फीसदी क्रूड ऑयल गुजरता है. यहां पर कच्चे तेल का प्रवाह मुख्य रूप से खाड़ी उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से आता है और यह तेल चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों में आता है, जो करीब 40 फीसदी है.
🌍 The Strait of Hormuz
The World’s Most Critical Oil Chokepoint
20% of global oil trade moves through this narrow corridor.
Recent flows:
• 14–16 mb/d crude
• 5–6 mb/d products
There are pipelines that bypass it.
But not enough to fully offset a disruption.
A full… pic.twitter.com/N9YZGfY4Po
भारत पर कितना बढ़ेगा बोझ
अमेरिका स्थित ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का 69 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं रास्ते से आता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज में किसी भी प्रकार की बाधा से ऑयल सप्लाई में कमी, माल ढुलाई और बीमा लागत में इजाफा होगा. इससे भारत का तेल आयात की लागत भी बढ़ सकती है. एक्सपर्ट्स की बात माने तो भारत कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-90 प्रतिशत आयात करता है. ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट भारत के लिए लागत बढ़ा सकती है.
भारत कई देशों से कर रहा तेल का आयात
वेबसाइट विजुअल कैपिटलिस्ट के मुताबिक, भारत ने कुछ सालों में अपनी तेल आपूर्ति में विविधता लाई है. भारत अब अपना तेल आयात रूस, इराक, सऊदी अरब, यूएई, पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण और मध्य अमेरिका, अमेरिका, कुवैत, मध्य पूर्व के बाकी देश, मैक्सिको, यूरोप ऊत्तरी अफ्रीका, एशिया प्रशांत और कनाडा से मंगा रहा है.
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