एक वक्त था जब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सबसे भरोसेमंद दोस्त माना जाता था। “पैसा FD में डाल दो, निश्चिंत हो जाओ।”, यह सोच पिछली पीढ़ी की देन थी, लेकिन सितंबर 2025 में खड़े होकर अगर पीछे मुड़कर देखें, तो क्या सच में FD अब भी उतना ही फायदेमंद है?आज टॉप बैंक FD सिर्फ 6.25% से 7.1% का रिटर्न दे रहे हैं, जबकि महंगाई दर 5.3% से 6% के बीच है। यानी आपका पैसा असल में बढ़ नहीं रहा, बल्कि महंगाई से लड़ाई हार रहा है।
चलिए आपको दो केस स्टडी देता हूं। मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं।
पूरे ₹10 लाख एक बैंक FD में 6.5% पर लगा दिए।
सालाना कमाई:₹65,000
फायदा:बिल्कुल सुरक्षित, कोई टेंशन नहीं।
नुकसान:महंगाई काटकर हाथ में कुछ नहीं बचता।
अगर आपका कुल पोर्टफोलियो यानी 100% है। इसमें ₹10 लाख का निवेश है तो एक साल में ₹98,750 का रिटर्न पा सकते हैं। इन पैसों को इस प्रकार लगाएं। जैसे सरकारी बॉन्ड (G-Secs, SDL) में 20% हिस्सेदारी रखें और ₹2 लाख पर 7% के रिटर्न के हिसाब से ₹14,000 का रिटर्न मिलने की उम्मीद।
वहीं, AAA और AA रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड में 30% तक पैसा लगाने वालों को ₹3 लाख पर 9.5% के रिटर्न की दर से ₹28,500 का फायदा। जबकि, A और BBB रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड में 40% हिस्सेदारी रखें। ₹4 लाख के निवेश पर 12% रिटर्न के हिसाब से ₹48,000 तक का फायदा। दूसरी ओर हाई-यील्ड NBFC FD में 10% हिस्सेदारी रखें और ₹1 लाख पर 8.25% की दर से ₹8,250 का रिटर्न लें।
ये रहा जादू: स्मार्ट निवेशक सालाना ₹98,750 कमा रहा है, जो FD वाले से 52% ज्यादा है। और हैरानी की बात? जोखिम अब भी कंट्रोल में है। G-Secs, SDLs और PSU बॉन्ड सरकारी गारंटी के साथ आते हैं। मतलब डिफॉल्ट का जोखिम लगभग जीरो। फिर भी ये 7% से 8% तक का रिटर्न देते हैं।
किसके लिए: बेहद सतर्क निवेशक, इमरजेंसी फंड, शॉर्ट-टर्म गोल।
यहीं पर असली कमाई का राज छिपा है। इन्वेस्टमेंट-ग्रेड कॉर्पोरेट बॉन्ड (AAA से BBB रेटिंग) 8% से 15% तक का रिटर्न दे रहे हैं।
· AAA और AA रेटिंग: कम जोखिम, 8-9% रिटर्न
· A और BBB रेटिंग: थोड़ा ज्यादा जोखिम, 10-14% रिटर्न
स्मार्ट ट्रिक: अलग-अलग रेटिंग और टेन्योर के बॉन्ड में पैसा लगाकर लैडर पोर्टफोलियो बनाएं। युवा हों या रिटायर्ड, हर किसी के लिए फिट।
NBFC FD 8-10% रिटर्न दे रहे हैं और इन पर ₹5 लाख तक का DICGC इंश्योरेंस भी है। 1-3 साल के लिए शॉर्ट-टर्म प्लेसमेंट के लिए बढ़िया ऑप्शन।
पहले बॉन्ड में निवेश करना मुश्किल था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इसे आसान बना दिया है। RBI Retail Direct और SEBI-registered OBPP प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे बॉन्ड खरीद सकते हैं।
1. KYC कराएं: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करें
2. गोल तय करें: 1 साल, 3 साल या 5 साल का प्लान
3. डायवर्सिफाई करें: सरकारी, कॉर्पोरेट और NBFC में बांटें
4. रिपेमेंट ट्रैक करें: ब्याज और मूलधन की तारीख नोट करें
FD में रिटर्न 6.25-7.1% वहीं, बॉन्ड में 7-15% है। एफडी में जहां जोखिम बेहद कम जबकि, बॉन्ड रेटिंग पर निर्भर। लिक्विडिटी की बात करें तो एफडी में प्रीमेच्योर पेनल्टी, जबकि बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट से कैश कराया जा सकता है। एफडी जहां महंगाई से लड़ाई हार रहे हैं वहीं, बॉन्ड जीत रहे।
FD को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। यह अब भी आपके पोर्टफोलियो का एंकर बन सकता है। लेकिन अगर आप सिर्फ FD पर निर्भर हैं, तो महंगाई आपकी मेहनत की कमाई को धीरे-धीरे खा रही है।
स्मार्ट फॉर्मूला: 20-30% FD + 40-50% कॉर्पोरेट बॉन्ड + 20-30% सरकारी बॉन्ड + 10% NBFC FD
यह मिक्स आपको डिफेंस भी देगा, और वो मुस्कान भी जो बढ़ते रिटर्न देखकर आती है।
(Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर संपर्क करें।)
दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में ‘कुछ अलग’ पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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