'50 फाइटर जेट्स ने खामेनेई के मिलिट्री बंकर को उड़ाया', इजरायल ने जारी किया वीडियो – AajTak

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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सातवें दिन भी जंग जारी है और दोनों तरफ से रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं. इस बीच इजरायल की डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने ईरान के सुप्रीम कमांडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खात्मे को लेकर बड़ा दावा करते हुए एक वीडियो जारी किया है.
इस वीडियो के जरिए आईडीएफ ने दावा किया है कि इजरायली एयरफोर्स के लगभग 50 लड़ाकू विमानों ने ईरानी सुप्रीम कमांडर खामेनेई के परिसर के नीचे बने एक भूमिगत सैन्य बंकर को निशाना बनाया था. 
50 इजरायली फाइटर जेट्स ने तेहरान में खामेनेई के भूमिगत बंकर को बनाया था निशाना
दावा किया जा रहा है कि यह बंकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई से जुड़ा हुआ था. जानकारी के मुताबिक, यह हमला तेहरान में स्थित उस परिसर के नीचे किया गया था जहां ईरानी शासन के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सैन्य ढांचे मौजूद होने का इनपुट उन्हें मिला था. 
इजरायल का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को कमजोर करना था. हालांकि इस हमले में हुए नुकसान और अन्य विवरणों को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई अन्य जानकारी अभी सामने नी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
🎥 WATCH: ~50 Israeli Air Force fighter jets dismantled Ali Khamenei’s underground military bunker beneath the Iranian regime’s leadership compound in Tehran. pic.twitter.com/Nw0tvvQMRX
जो वीडियो सामने आया है उसमें देखा जा सकता है कि लगातार बम गिराए जाने के बाद उस पूरे इलाके में नीचे धुएं का गुबार नजर आ रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के मारे जाने के बाद पूरी दुनिया में लोगों के ज़ेहन में ये सवाल उठ रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने आख़िर कैसे इतना सटीक निशाना लगाया और खामेनेई के साथ तमाम टॉप लीडरशिप पर बॉम्बिंग कर दी. 
ट्रैफिक कैमरों और मोबाइल नेटवर्क से ट्रैकिंग कर तैयार किया गया ‘मूवमेंट पैटर्न’
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल ने इसके लिए कई सालों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम में सेंध लगाई. सिर्फ कैमरे ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई. मकसद था ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और उनके सुरक्षा घेरे की हर गतिविधि पर नजर रखना.
रिपोर्ट कहती है कि तेहरान के ज्यादातर ट्रैफिक कैमरे इजरायल की निगरानी में थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जाता था. इससे एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ. कौन कब निकला. कौन साथ था. कौन सा रूट लिया गया. सब रिकॉर्ड होता रहा. बताया जा रहा है कि यह काम एक-दो महीने का नहीं था. यह लंबा ऑपरेशन था. इजरायल की खुफिया यूनिट 8200 और मोसाद ने टेक सिस्टम में गहरी घुसपैठ की.
कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई. मोबाइल नेटवर्क डेटा भी जोड़ा गया. इससे सिक्योरिटी स्टाफ की आवाजाही समझी गई. बॉडीगार्ड्स कहां पार्क करते हैं. किस समय गार्ड बदलते हैं. किस रास्ते से मूवमेंट होता है. धीरे-धीरे एक पैटर्न ऑफ़ लाइफ तैयार हुआ. यानी रोजमर्रा की आदतों का पूरा डिजिटल नक्शा तैयार किया गया और उसके बाद एक लंबी प्लानिंग के बाद उनके ठिकाने पर अटैक कर खामेनेई को खत्म कर दिया गया.
 
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