दक्षिण कोरिया से अपने एंटी-मिसाइल सिस्टम को मध्य-पूर्व क्यों ला रहा है अमेरिका? – BBC

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अमेरिका, दक्षिण कोरिया में लगाए गए मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व ले जा रहा है. यह जानकारी वॉशिंगटन पोस्ट और दक्षिण कोरियाई समाचार रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से दी गई है.
यह कथित कदम अमेरिका–इसरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के 12वें दिन उठाया गया है.
अमेरिका ने ये फ़ैसला उन रिपोर्टों के बाद किया है जिनमें कहा गया कि ईरान ने जॉर्डन में लगे थाड (टर्मिनल हाई-एल्टीट्यूड एरिया डिफ़ेंस) सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले एक महत्वपूर्ण रडार को नष्ट कर दिया है.
थाड को सबसे पहले 2017 में दक्षिण कोरिया में तैनात किया गया था, ताकि परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया से आने वाले खतरों से रक्षा की जा सके.
उस समय दक्षिण कोरिया में इसके ख़िलाफ़ ग़ुस्सा जताया गया था और विरोध प्रदर्शन हुए थे, क्योंकि लोगों को डर था कि इससे दक्षिण कोरिया और बड़ा निशाना बन जाएगा. वहीं, चीन ने चेतावनी दी थी कि इससे इलाक़े में अस्थिरता आ जाएगी.
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इस हफ़्ते की शुरुआत में, वॉशिंगटन पोस्ट ने दो अधिकारियों के हवाले से ख़बर दी थी कि थाड सिस्टम के कुछ हिस्से मध्य पूर्व में भेजे जा रहे हैं.
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और इसरायल, ईरान पर हमले जारी रखे हुए हैं, और इसके जवाब में ईरान बड़ी संख्या में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है. ईरान के निशाने पर क्षेत्र में स्थित इसरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं.
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यह साफ़ नहीं है कि ईरान के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स के आंकड़ों के मुताबिक ईरान अब तक 500 से ज़्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि इनमें से अधिकतर को रोका गया है, लेकिन हमलावर मिसाइलों की संख्या से अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर दबाव पड़ रहा है.
उनका मानना है कि इसके आगे भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि ईरान खुद को एक लंबी थकाऊ लड़ाई के लिए तैयार कर रहा है. इस जंग में मध्य पूर्व के दूसरे देश भी खिंच सकते हैं, जिनमें अमेरिका के सहयोगी शामिल हैं.
इस वजह से थाड का महत्व समझ आता है जो ऊंचाई से मार करने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए ख़ास तौर पर बनाया गया है और इसलिए अमेरिका की रक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने में एक अहम भूमिका निभाता है.
इस महीने की शुरुआत में आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि ईरान के एक हमले ने जॉर्डन में लगे मौजूदा थाड सिस्टम के 300 मिलियन डॉलर वाले राडार को नष्ट कर दिया था.
अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन का बनाया यह एंटी-मिसाइल सिस्टम छह माउंटेड लॉन्चरों के साथ आता है, जिनमें हर लॉन्चर पर आठ इंटरसेप्टर लगे होते हैं. इसके साथ एक रडार सिस्टम होता है जो मिसाइलों का पता लगाता है.
यह छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिरा सकता है, और इसमें हिट-टू-किल तकनीक का इस्तेमाल होता है, यानी आने वाली वारहेड को कायनेटिक एनर्जी (तेज़ रफ़्तार मिसाइल की टक्कर में पैदा होने वाली ऊर्जा) की टक्कर से नष्ट किया जाता है.
यह बहुत ऊंचाई पर, यहां तक कि पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर भी ऐसा कर सकता है. दक्षिण कोरिया में इसे ख़ास तौर पर उपयोगी माना गया था क्योंकि यह किसी परमाणु वारहेड को रास्ते में ही रोककर नष्ट कर सकता था.
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इस सिस्टम की एक यूनिट की लागत लगभग एक बिलियन डॉलर होती है, और इसे चलाने के लिए लगभग 100 सैनिकों को ज़रूरत है. एक यूनिट को बैटरी कहा जाता है.
अमेरिका के पास दुनिया भर में ऐसी सिर्फ आठ बैटरियां हैं, जिनमें से दो जॉर्डन और इसरायल में हैं. इसके अलावा यूएई और सऊदी अरब के पास भी ऐसी तीन और बैटरियां हैं.
एक अमेरिकी अधिकारी ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि इसे दक्षिण कोरिया से हटाकर मध्य पूर्व में लगाना एक 'सतर्कता भरा कदम' है, लेकिन अन्य विश्लेषकों का मानना है कि सिस्टम पर दबाव बहुत ज़्यादा पड़ रहा है.
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर जॉन निल्सन-राइट ने बीबीसी को बताया कि यह कदम साफ़ तौर पर दिखाता है कि "अमेरिका को मध्य पूर्व में मिसाइल रक्षा क्षमताओं के भारी इस्तेमाल की भरपाई करने की ज़रूरत है."
दक्षिण कोरिया के एसबीएस और यॉनहैप जैसे मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट किया है कि थाड लॉन्चरों को सियोल के दक्षिण में स्थित सियोंगजु एयरबेस से बाहर ले जाना शुरू किया जा चुका है.
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने माना कि दक्षिण कोरिया ने अमेरिकी हथियारों की निकासी को लेकर 'विरोध जताया था.'
उन्होंने एक कैबिनेट बैठक में कहा, "ऐसा लग रहा है कि हाल ही में कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना के आर्टिलरी बैटरी और एयर डिफेंस हथियार जैसे कुछ हथियार देश से बाहर भेजने को लेकर कुछ विवाद हुआ है. हालांकि हमने इसका विरोध जताया है, लेकिन हकीकत यह है कि हम अपनी बात पूरी तरह मनवा नहीं सकते."
जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे दक्षिण कोरिया की सुरक्षा रणनीति कमज़ोर होगी, तो उन्होंने जवाब दिया, "मैं पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा."
निल्सन-राइट कहते हैं कि ली का बयान "इस कदम के ख़िलाफ़ एक असामान्य सार्वजनिक विरोध है, जो दक्षिण कोरिया की वाजिब चिंता को दर्शाता है कि इससे देश की रक्षा क्षमता कमजोर पड़ सकती है."
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बुधवार को, जब चीन से पूछा गया कि क्या वह इस संभावित रीलोकेशन पर कोई टिप्पणी करेगा, तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने दोहराया कि 'दक्षिण कोरिया में अमेरिकी थाड मिसाइल तैनात करने को लेकर चीन के विरोध में कोई अंतर नहीं आया है."
साल 2017 में जब थाड लगाया गया था, तब चीन इसका सबसे ज़्यादा विरोध करने वालों में शामिल था.
इसका एक कारण यह था कि इससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ गई थी.
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना था कि यह मिसाइल सिस्टम उत्तर कोरिया के हमलों को रोकने के लिए है, लेकिन चीन का तर्क था कि थाड का रडार इतना शक्तिशाली है कि वह चीन के अंदर तक देख सकता है. इसलिए इससे चीन की मिसाइलों के लॉन्च का पता लगाया जा सकता था और जो उसकी प्रतिरक्षा क्षमता को प्रभावित करता था.
चीन ने इसके जवाब में अनौपचारिक रूप से कोरियाई सामान का बहिष्कार कर दिया, दक्षिण कोरिया के ग्रुप टूर छह साल के लिए बंद कर दिए, और के-पॉप कॉन्सर्ट भी रद्द कर दिए.
सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इयान चोंग का कहना है कि हालांकि चीन थाड को हटाए जाने पर ख़ुशी जता सकता है, लेकिन वह इसे तब तक जीत नहीं मानेगा जब तक यह 'स्थायी रूप से हटाया' न जाए.
लेकिन निल्सन-राइट का कहना है कि चीन इसे इंडो पैसिफ़िक से अमेरिका के ध्यान भटकने से जोड़ सकता है.
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उत्तर कोरिया ने अभी तक इस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है.
निल्सन-राइट के अनुसार, इसकी संभावना कम है कि उसके नेता किम जोंग-उन 'इन बदलावों का फ़ायदा उठाने' की कोशिश करेंगे.
अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कुछ जोखिम बना हुआ है कि वह दक्षिण कोरिया को परखने के लिए उत्तर कोरिया 'छोटी उकसावे' वाली कार्रवाइयां करे.
चोंग कहते हैं कि इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है, "क्या ईरान के साथ लंबा चलने वाला युद्ध अमेरिकी मिसाइल भंडार को इतना कम कर देगा कि दुनिया के अन्य हिस्सों की आपात परिस्थितियों का जवाब देना मुश्किल हो जाए?"
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