ईरानी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इसराइल के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है.
चंदन कुमार जजवाड़े, रौनक भैड़ा
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ईरानी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इसराइल के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ईरान की आईआरएनए न्यूज़ एजेंसी ने आईआरजीसी के हवाला से बताया है, "विमान पर सुबह पौने चार बजे रिवोल्यूशनरी गार्ड की आधुनिक एयर डिफ़ेंस सिस्टम से हिट किया गया."
आईआरजीसी का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद 'यह तीसरा लड़ाकू विमान है जिसे निशाना बनाया गया है', लेकिन बाक़ी दो विमानों के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी गई.
आईआरजीसी के बयान में यह साफ़ नहीं किया गया कि आज जिस विमान को निशाना बनाने का दावा किया गया है, वह गिरा है या नहीं.
दूसरी ओर, इसराइली सेना ने पहले पुष्टि की थी कि उसके एक लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र में "सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल" का सामना करना पड़ा. हालांकि उन्होंने दावा किया कि 'कोशिश असफल रही और विमान या अभियान को कोई नुकसान नहीं हुआ.'
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी नेताओं को नवरोज़ की बधाई देते हुए कहा कि 'मॉस्को हमेशा तेहरान का वफ़ादार दोस्त और भरोसेमंद साथी रहा है.'
क्रेमलिन द्वारा जारी बयान के अनुसार, "राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान को ईरानी नए साल की शुभकामनाएं दीं और यह भरोसा जताया कि ईरानी जनता कठिन चुनौतियों को सम्मान के साथ' पार करेगी."
इससे पहले रूस ने कहा था कि "अमेरिका-इसराइल के ईरान पर हमलों ने पूरे मध्य पूर्व को तबाही के कगार पर ला दिया है. एक बड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है."
रूसी राष्ट्रपति अमेरिका-इसराइल की उन कार्रवाइयों की भी कड़ी निंदा कर चुके हैं, जिनमें आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या की गई.
गौरतलब है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में पहले कहा गया था कि रूस ईरान को ख़ुफ़िया मदद दे रहा है. लेकिन क्रेमलिन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि रूस ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें और आधुनिक ड्रोन तकनीक दे रहा है.
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ईरान की एटॉमिक एनर्जी ऑर्गेनाइजेशन ने कहा है कि आज सुबह फिर से ईरान के सेंटर में स्थित नतांज़ परमाणु केंद्र पर हमला किया गया है.
ईरानी मीडिया में जारी बयान में बताया गया "जांच में पता लगा कि इस केंद्र से रेडियो एक्टिव पदार्थ का कोई रिसाव नहीं हुआ है. आसपास के इलाक़ों के लोगों के लिए कोई ख़तरा नहीं है."
एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइज़ेशन ने इस हमले की निंदा की है. उसने कहा है, "यह एनपीटी (परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि) और परमाणु सुरक्षा से जुड़े दूसरे नियमों का उल्लंघन है.”
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ने एक्स पोस्ट में लिखा, "हमें ईरान ने बताया है कि आज नतांज़ परमाणु केंद्र पर हमला हुआ है. इस हमले के बाद बाहर के इलाक़ों में रेडिएशन लेवल में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है. एजेंसी इस रिपोर्ट की जांच कर रही है."
"आईएईए के डायरेक्टर जनरल ने फिर से अपील की है कि सैन्य संयम बरता जाए ताकि किसी परमाणु हादसे का ख़तरा न बने."
एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइज़ेशन ने पहले भी नतांज़ पर हमले की बात स्वीकार की थी. उसने 3 मार्च को कहा था कि दो दिन पहले हुए हमले के बाद भी रेडियोएक्टिव पदार्थ का कोई रिसाव दर्ज नहीं किया गया.
पिछले साल जून में अमेरिका ने तीन परमाणु केंद्रों 'नतांज़, फ़ोर्दो और इस्फ़हान' पर बम गिराए थे. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 'पूरी तरह ख़त्म' कर दिया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान को ईद और नवरोज़ की शुभकामनाएं दी हैं. इस बात की जानकारी खुद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर दी.
पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, "राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की और ईद और नवरोज़ की शुभकामनाएं दीं. हमने उम्मीद जताई कि यह त्योहारों का समय पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और तरक़्क़ी लाए."
उन्होंने लिखा, " मैंने क्षेत्र में ज़रूरी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को ख़तरे में डालते हैं और वैश्विक सप्लाई चेन को बिगाड़ते हैं. मैंने समुद्री रास्तों की आज़ादी को सुरक्षित रखने और यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया कि शिपिंग लेन खुले और सुरक्षित रहें."
"ईरान की ओर से भारत के नागरिकों की सुरक्षा और सलामती के लिए लगातार दिए जा रहे सहयोग की सराहना की."
गौरतलब है कि मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य संघर्ष से समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बाधित हो गया है. हालांकि, कुछ देशों के जहाज़ों को यहां से गुज़रने दिया जा रहा है.
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भारत के 275 पूर्व जज, अफ़सर और सेना के पूर्व अधिकारियों ने यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (यूएससीआईआरएफ़) की हालिया रिपोर्ट की आलोचना की है.
संयुक्त बयान जारी करते हुए 275 पूर्व जजों और अफ़सरों ने अमेरिकी सरकार को लिखा है, "इस 'पक्षपाती और ग़लत रिपोर्ट' बनाने वालों की पूरी जांच की जाए.''
उनका आरोप है कि कुछ लोग भारत की छवि ख़राब करने की कोशिश कर रहे हैं.
दरअसल, हाल ही में यूएससीआईआरएफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय से भारत को विशेष चिंता वाले देश (सीपीसी) के रूप में नामित करने की मांग की है.
यूएससीआईआरएफ़ ने भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि अमेरिका को रॉ और आरएसएस पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाने चाहिए.
इस रिपोर्ट के ख़िलाफ़ संयुक्त बयान में पूर्व अधिकारियों और जजों ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. यहां मज़बूत न्याय व्यवस्था, सक्रिय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संसद की निगरानी है. ऐसे में किसी व्यक्ति या संगठन के लिए धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करके बच निकलना लगभग नामुमक़िन है."
संयुक्त बयान में ऐसे आंकड़े भी दिए गए हैं, जिनमें 'भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ती हुई दिखाई गई' है. जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि 'वहां अल्पसंख्यक हिंदू आबादी घट रही है.'
आरएसएस पर बैन लगाने की मांग का विरोध करते हुए पूर्व जजों और अधिकारियों ने कहा, "1925 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बने आरएसएस भारत की पहचान और सभ्यता को मज़बूत बनाने के लिए काम करती रही है. पिछले 100 सालों से आरएसएस ने ग्रामीण विकास, महिलाओं की प्रगति, स्वास्थ्य और शिक्षा में निस्वार्थ सेवा दी है."
संयुक्त बयान पर पूर्व राजदूत भास्वती मुखर्जी, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एम. मदन गोपाल और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आदर्श कुमार गोयल समेत 275 लोगों के हस्ताक्षर हैं.
गौरतलब है कि इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को पहले ही ख़ारिज कर दिया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा "यूएससीआईआरएफ़ भारत की ग़लत तस्वीर पेश करता रहा है, जो सही तथ्यों पर आधारित नहीं है."
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ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका-इसराइल के साथ 'युद्धविराम नहीं चाहता बल्कि युद्ध का स्थाई अंत' चाहता है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने जापानी मीडिया संस्था 'क्योडो न्यूज़' से कहा, "ऐसी किसी भी पहल का स्वागत करेंगे जो इस युद्ध को पूरी तरह ख़त्म कर सके." उन्होंने कहा, "यह संघर्ष देश पर 'थोपा गया' है."
अब्बास अराग़ची ने कहा, "ईरान ऐसे प्रस्तावों को सुनने और उन पर विचार करने के लिए तैयार है, जिससे युद्ध रुक सके. कुछ देश मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का हल ढूंढ रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं लगता कि अमेरिका अपनी आक्रामकता रोकने के लिए तैयार है."
अराग़ची ने यह भी कहा, "ईरान युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि वह 'युद्ध का पूरा, व्यापक और स्थाई अंत' चाहता है."
दरअसल, इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि वह ईरान से जल्द ही जंग ख़त्म करने की सोच रहे हैं. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के ज़रिये उन्होंने कहा कि हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बहुत क़रीब हैं.
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दुनिया भर में लोग ईद-उल-फ़ितर के त्योहार को उत्साह के साथ मना रहे हैं.
ये ईद मुसलमानों के पवित्र महीने रमज़ान की समाप्ति पर मनाई जाती है. रमज़ान के दौरान मुसलमान पूरे महीने रोज़ा रखते हैं और रमज़ान का महीना ख़त्म होने की ख़ुशी में ईद मनाई जाती है.
सुबह से ही लोग देश-दुनिया में मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ अदा कर रहे हैं. भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड और लेबनान में भी लोगों ने नमाज़ अदा की.
तस्वीरों में देखें कैसे ईद मना रहे लोग:
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अमेरिका-इसराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स के मुख्य कमांडर ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल क़ानी का पहला बयान सामने आया है.
कुद्स फोर्स परआईआरजीसी के विदेशों में होने वाले अभियानों को संभालने की जिम्मेदारी है.
ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने इस्माइल क़ानी का बयान प्रकाशित किया है, जिसमें ‘एक्सिस ऑफ़ रेजिस्टेंस’ यानी ईरान के सहयोगी देशों और प्रॉक्सी गुटों के गठबंधन के कमांडरों और नेताओं को संबोधित किया गया है.
इस बयान में क़ानी ने तर्क दिया है कि वरिष्ठ हस्तियों के न रहने से उनका आंदोलन कमज़ोर नहीं होगा.
क़ानी ने कहा, "भले ही रेजिस्टेंस के शहीदों के नेता अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आयतुल्लाह खुमैनी और आयतुल्लाह ख़ामेनेई के तय किए गए इस्लामिक गणराज्य के वैचारिक मार्ग अब नए सर्वोच्च नेता, मोजतबा ख़ामेनेई के नेतृत्व में "मजबूती और अधिकार" के साथ आगे बढ़ते रहेंगे."
ईरान में देश के अधिकारियों और कमांडरों के नाम से लिखित संदेश प्रकाशित करने का चलन यहां के मीडिया संस्थानों में बढ़ता हुआ दिखता है.
शनिवार को मोजतबा ख़ामेनेई का एक लिखित संदेश सरकारी टीवी के एंकर ने पढ़कर सुनाया.
यह उनके पिता आयतुल्लाह ख़ामेनेई की ओर से दिए जाने वाले नवरोज़ संदेशों से बिल्कुल अलग था, जो पारंपरिक रूप से कैमरे के सामने आकर अपना संदेश देते थे.
मोजतबा ख़ामेनेई को इसी महीने की शुरुआत में उनके पिता का उत्तराधिकारी चुना गया था. ईरान के नए सर्वोच्च नेता चुने जाने के बाद से वे अब तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगी.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.
– मोजतबा ख़ामेनेई ने नवरोज़ के संदेश में पाकिस्तान और बाकी पड़ोसी देशों को लेकर क्या कहा?
– यूएनआई दफ़्तर सील, दिन में कोर्ट का फ़ैसला आया शाम को पुलिस पहुंच गई
– साढ़े आठ किलोमीटर सड़क के लिए 697 पेड़ काटने का मामला क्या है
– ट्रंप का दावा, 'ईरान के साथ जंग जल्द ख़त्म करने जा रहे' लेकिन रखी ये शर्त
– धरी रह गई अमेरिकी सुरक्षा गारंटी, कैसे चकनाचूर हुआ दुबई जैसे शहरों का भ्रम
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक 'गोरक्षक' की मौत पर हंगामा हो गया है.
आगरा रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार पांडे ने बताया है कि थाना कोसी क्षेत्र में शनिवार तड़के एक घटना में फरसा बाबा नाम के एक शख़्स की मौत हो गई है, जो 'एक गोरक्षक' थे.
डीआईजी ने बताया, "इन लोगों ने एक ट्रक को रोका था और उसकी जांच कर रहे थे. आज घना कोहरा था और पीछे से एक ट्रक ने रोके गए ट्रक को टक्कर मार दी और इस हादसे में चोट लगने से फरसा बाबा की मौत हो गई. उसके बाद लोगों ने उनका शव छाता-शेरगढ़ तिराहे पर रखकर जाम लगाया."
उन्होंने आगे कहा, "इन लोगों से काफ़ी देर बातचीत हुई लेकिन कुछ लोगों ने पुलिस पार्टी पर पथराव किया और आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को खदेड़ा गया. शव को वहां से हटा लिया गया है और इलाक़े में हालात पूरी तरह नियंत्रण में है."
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डीआईजी ने बताया है, कि रोके गए ट्रक में गोवंश या उससे जुड़ा कुछ भी नहीं था और "उपद्रव करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है और कुछ को गिरफ़्तार भी किया गया है. जो लोग भी पत्थरबाज़ी में शामिल हैं, उनके वीडियो फुटेज हमारे पास हैं, ऐसे किसी भी शख़्स को बख्शा नहीं जाएगा.''
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शनिवार तड़के, कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के हेब्रोन शहर के आसमान में कई मिसाइलें देखी गई हैं. इसराइल का दावा है कि उसने पिछले कुछ घंटों में ऐसे कई हमलों का जवाब दिया है.
इसराइली सेना का कहना है कि ये हमले ईरान की तरफ से हुए हैं.
इसराइली डिफ़ेंस फोर्सेस ने कहा है कि इन हमलों को लेकर सावधानी के तौर पर लोगों को अलर्ट भेजे गए थे, साथ ही उसके डिफ़ेंस सिस्टम "ख़तरे को नाकाम" के लिए काम कर रहे थे.
वहीं सऊदी अरब का कहना है कि उन्होंने रात भर दर्जनों ड्रोन हमलों को रोका है
जबकि पड़ोसी देश कुवैत ने पुष्टि की है कि "दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन ख़तरों" को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया गया था.
इससे पहले ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के शहर रास अल-खैमाह पर 'निर्णायक ताक़त' से हमला करने की धमकी दी है.
ईरान ने फ़ारस की खाड़ी के दो द्वीपों के मुद्दे पर यूएई के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर यह धमकी दी है.
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ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के शहर रास अल-खैमाह पर 'निर्णायक ताक़त' से हमला करने की धमकी दी है.
ईरान ने फ़ारस की खाड़ी के दो द्वीपों के मुद्दे पर यूएई के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर यह धमकी दी है.
सरकारी मीडिया ने टेलीग्राम पर जारी एक संदेश में, ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि ‘अबू मूसा और ग्रेटर टुनब द्वीपों पर किसी भी नई आक्रामकता का जवाब यूएई के उस शहर पर हमले से दिया जाएगा.’
संदेश में यह तो स्पष्ट नहीं किया गया है कि आक्रामकता किस तरह की होगी, लेकिन यह धमकी ऐसे समय में आई है जब दशकों से ये दोनों द्वीप ईरान के कब्ज़े में हैं.
ये द्वीप फ़ारस की खाड़ी में स्थित हैं और रणनीतिक तौर पर काफ़ी अहम माने जाते हैं. यूएई इन दोनों द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है.
यूएई में बढ़े ईरानी हमले, वहां रहने वाले भारतीयों ने क्या बताया
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने जापान की क्योडो न्यूज़ को बताया है कि ईरान, होर्मुज़ स्ट्रेट से जापान से जुड़े जहाजों को गुज़रने की अनुमति देने के लिए तैयार है.
क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अराग़ची ने कहा है कि पाबंदी को अस्थायी रूप से हटाने के मक़सद से, जापानी पक्ष के साथ बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है.
अराग़ची की टिप्पणियों के जवाब में, जापान सरकार के एक अधिकारी ने क्योडो से कहा कि "पाबंदी हटाने का सबसे प्रभावी तरीक़ा ईरानी पक्ष के साथ सीधी बातचीत करना है."
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को उकसाने से बचने के लिए अत्यधिक सावधानी बरती जानी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि भले ही जापानी जहाज़ों को इस समुद्री रास्ते से गुज़रने की अनुमति मिल जाए, लेकिन इससे मौजूदा ऊर्जा संकट का समाधान नहीं होगा.
जापान के विदेश मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने क्योडो से कहा कि अराग़ची के बयान के पीछे के "असली इरादे" का "सावधानीपूर्वक आकलन" किया जाना चाहिए.
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बीबीसी गुजराती के पत्रकार तेजस वैद्य को 'जेंडर रिपोर्टिंग' के लिए कमला मानकेकर पुरस्कार में स्पेशल मेंशन मिला है.
उन्हें दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ ने सम्मानित किया. तेजस वैद्य को जेंडर से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ने वाली उनकी रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया गया है.
उन्हें अहमदाबाद में रोटी बनाने वाली महिलाओं, गुजरात के गांवों में हॉकी खेलने वाली महिला खिलाड़ियों और जलवायु परिवर्तन के महिलाओं पर पड़ने वाले असर पर उनकी रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया गया है.
यह पुरस्कार 'द मीडिया फ़ाउंडेशन' नामक संगठन की तरफ़ से दिया जाता है. तेजस वैद्य को इससे पहले दो बार प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिल चुका है.
इसके साथ ही द मीडिया फ़ाउंडेशन ने वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार ऐना एम.एम. वेट्टिकाड को साल 2025 के लिए चमेली देवी जैन पुरस्कार दिया है.
द मीडिया फ़ाउंडेशन ने कहा, "हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि साल की उत्कृष्ट महिला मीडिया हस्ती के लिए चमेली देवी जैन पुरस्कार, एक स्वतंत्र पत्रकार ऐना एम.एम. वेट्टिकाड को दिया जा रहा है."
ऐना एम.एम. वेट्टिकाड फ़िल्मों पर लिखती हैं और वो बीबीसी हिन्दी के लिए भी लिखती रही हैं, जिसे पाठकों ने खूब पसंद किया है.
द मीडिया फ़ाउंडेशन का कहना है कि ऐना एम.एम. वेट्टिकाड का लेखन भारतीय मनोरंजन उद्योग पर पड़ने वाले व्यापक राजनीतिक और सामाजिक दबावों को उजागर करता है.
द मीडिया फ़ाउंडेशन के मुताबिक़, “एक ऐसे क्षेत्र में, जहाँ पत्रकार अक्सर प्रचार और प्रोपेगैंडा का माध्यम बन जाते हैं, वेट्टिकाड की मनोरंजन उद्योग पर की गई रिपोर्टिंग नए कीर्तिमान स्थापित करती हैं और हमारे समाज की गहरी समझ विकसित करने में मदद देती है, क्योंकि फ़िल्मों में लाखों लोगों के मन को प्रभावित करने की क्षमता होती है."
पीके रोज़ी: दलित महिला ने जो राह बनायी, उस पर कितना चल पाया है भारत का सिनेमा
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इसराइल डिफेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने कहा है कि वे ईरान की राजधानी तेहरान में "ईरानी आतंकी शासन के ठिकानों" पर हमला कर रहे हैं.
आईडीएफ़ ने अपने इस हमले के बारे फ़िलहाल ज़्यादा जानकारी नहीं दी है और ईरान की तरफ से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
आईडीएफ़ ने बताया कि लेबनान पर इसराइली हमलों के बाद ईरान पर हमला किया गया है.
आईडीएफ़ ने इससे पहले कहा कि वे बेरूत पर हमला कर रहे थे. इस हमले से कुछ समय पहले ही उसने बेरूत के दक्षिण में सात इलाकों को फ़ौरन खाली करने की चेतावनी जारी की थी.
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दिल्ली में समाचार एजेंसी यूएनआई (यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया) का दफ़्तर सील कर दिया गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इस दफ़्तर को सील किया है.
यूएनआई के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, “शाम को केंद्र सरकार के संपत्ति विभाग के कुछ कर्मचारी आए और उन्होंने कहा कि आपकी लीज़ ख़त्म हो गई है और आप फ़ौरन जगह खाली कर दें. वो हमारे न्यूज़ रूम में घुस गए… और ज़बरन लोगों को खींचकर बाहर निकाल दिया."
हालांकि नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि दफ़्तर खाली कराने में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और कुछ भी ग़लत नहीं हुआ, क्योंकि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई थी.
अंग्रेज़ी अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा, "दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 मार्च को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत यूएनआई को 9, रफी मार्ग पर स्थित प्रमुख सरकारी ज़मीन का आवंटन रद्द कर दिया गया था."
"दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 मार्च के अपने फैसले में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी तत्काल प्रभाव से विवादित संपत्ति का कब्ज़ा ले लें और यह सुनिश्चित करें कि उसका उपयोग कानून के अनुसार ही किया जाए."
यूएनआई ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए यह जानकारी दी है. सोशल मीडिया पर कई वीडियो आए हैं, जिनमें यूएनआई परिसर में बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं और पत्रकारों-कर्मचारियों से दफ़्तर खाली करने को कह रहे हैं.
यूएनआई ने एक्स पर लिखा, "देश की सबसे पुरानी और सबसे सम्मानित समाचार एजेंसियों में से एक, 'यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया' के दफ़्तर को सील करने से प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी हो गई हैं."
यूएनआई ने आरोप लगाया है कि उसके कर्मचारियों से ज़बरन दफ़्तर खाली कराया गया और कई लोगों को अपने निजी सामान तक ले जाने से रोका गया. यह भी आरोप लगाया गया है कि इस दौरान कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया.
यूएनआई ने अपनी पोस्ट में एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उसके दफ़्तर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी नज़र आ रहे हैं और कर्मचारी आरोप लगा रहे हैं कि उनके साथ धक्का-मुक्की हो रही है.
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अंग्रेज़ी अख़बार द स्टेट्समैन ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत में मीडिया की आज़ादी पर एक अभूतपूर्व अत्याचार और हमले के तौर पर देश की सबसे पुरानी समाचार एजेंसी यूएनआई के रफ़ी मार्ग स्थित दफ़्तर पर पुलिस बल ने सचमुच हमला बोल दिया."
"कर्मचारियों को अपना सामान समेटने या प्रबंधन से बात करने का भी समय नहीं दिया गया."
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इसराइल ने दावा किया है कि ईरान ने उसकी तरफ मिसाइलें दाग़ी हैं, जिनकी पहचान की गई है और उसके डिफेंस सिस्टम ख़तरे को रोकने के लिए काम कर रहे हैं.
आईडीएफ़ ने एक एक्स पोस्ट में बताया, "पिछले कुछ मिनटों में, होम फ्रंट कमांड ने संबंधित इलाक़ों में मोबाइल फोन पर सीधे एक शुरुआती निर्देश जारी किया है."
आईडीएफ़ ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ज़िम्मेदारी से काम लें और निर्देशों का पालन करें, जो लोगों की जान बचा सकते हैं.
इसमें कहा गया है कि अलर्ट मिलने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाना चाहिए और नई घोषणा होने तक वहीं रुके रहना चाहिए.
आईडीएफ़ ने कहा है कि लोग सुरक्षित जगहों से तभी बाहर निकलें जब उन्हें इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाएं.
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इराक़ में इस्लामिक रेसिस्टेंस ने कहा है कि उसने पिछले चौबीस घंटों में 27 ऑपरेशन किए हैं. इसमें "इराक़ और इस क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों के ख़िलाफ़" दर्जनों ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए.
यह ऐसे समय में हुआ है जब हमें बग़दाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक अमेरिकी राजनयिक सुविधा पर फिर से ड्रोन हमलों की ख़बरें मिल रही हैं.
सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि राजनयिक और लॉजिस्टिक्स हब पर कम से कम तीन हमले हुए, जिसके बारे में उनका कहना है कि वहां अमेरिकी सैनिक रहते हैं.
एक अधिकारी ने एएफ़पी को पुष्टि की कि तीसरे हमले के बाद ठिकाने के पास आग लग गई.
कुछ दिन पहले ही इराक़ के बग़दाद में अमेरिकी दूतावास पर कई ड्रोन और रॉकेट हमले हुए थे, जबकि पिछले हफ़्ते भी बग़दाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ था.
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अमेरिका वित्त विभाग ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा रहा है. यह तेल अभी समुद्र में है और इसे ज़्यादातर देशों को बेचने की अनुमति दी जा रही है.
अमेरिका के इस फ़ैसले का मक़सद वैश्विक बाज़ार में तेल की क़ीमतों को कम रखना है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर एक बयान में कहा कि इस "अल्पकालिक अनुमति से लगभग 14 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाज़ारों में आ सकेगा."
बेसेंट ने कहा कि ईरान को इस बिक्री से होने वाले किसी भी वित्तीय लाभ तक "पहुँचने में मुश्किल होगी."
बेसेंट ने कहा, "यह अनुमति सख़्ती से केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से ही रास्ते में है और यह नई ख़रीद या उत्पादन की अनुमति नहीं देती है. असल में, हम तेल की क़ीमतें कम रखने के लिए ईरान के बैरल का इस्तेमाल उसके ख़िलाफ़ ही करेंगे."
युद्ध शुरू होने के बाद से, और मध्य पूर्व में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरानी हमलों के बाद से, तेल और गैस की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं.
ब्रेंट क्रूड ऑयल की क़ीमत क़रीब 112 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. इसमें शुक्रवार को 3% और पिछले एक साल में 53% की बढ़ोतरी हुई है.
नमस्कार!
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