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Hormuz Strait crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी कमर कस ली है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का डर पैदा कर दिया है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने अपना ‘प्लान-बी’ एक्टिव कर दिया है.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है. 22 देशों ने मिलकर ईरान से अपील की है कि वह हमले रोके और समुद्री रास्ता खुला रखे.
युद्ध की खबरों के बीच कई जगहों पर रसोई गैस की ‘पैनिक बाइंग’ देखी गई थी. सरकार ने साफ किया है कि सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों को डरकर एक्स्ट्रा बुकिंग करने की जरूरत नहीं है. तेल वितरण कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपूर्ति सुचारू रखें. साथ ही, कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई में भी प्राथमिकता तय कर दी गई है ताकि अस्पतालों और होटलों जैसे जरूरी संस्थानों को दिक्कत न हो.
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार होता है, वहां भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद क्षेत्रीय नेताओं से बात कर समुद्री व्यापारिक मार्ग खुले रखने की जरूरत पर जोर दिया है.
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