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पश्चिम बंगाल में चुनावी शंखनाद हो चुका है. राज्य में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि 4 मई को तय होगा कि बंगाल की गद्दी पर कौन बैठेगा. चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही सियासी गर्मी बढ़ गई है और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आज से खुद मोर्चा संभाल लिया है. दक्षिण कोलकाता के अहिंद्र मंच में आज शाम हुई एक अहम बैठक में सीएम ममता बनर्जी ने भवानीपुर के लिए अपनी खास रणनीति का खुलासा किया.
इस बैठक में उनके साथ अभिषेक बनर्जी और फिरहाद हाकिम जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे. हालांकि यह पार्टी की एक इंटरनल मीटिंग थी, लेकिन सूत्रों की मानें तो उन्होंने साफ संदेश दिया है कि हर कार्यकर्ता को हर वोटर के घर तक पहुंचना होगा. मकसद साफ है कि भवानीपुर सीट से कम से कम 50 से 60 हजार वोटों की लीड हासिल करना. इसके लिए कार्यकर्ताओं को राज्य सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर पसीना बहाने की हिदायत दी गई है.
भवानीपुर में ममता के लिए कितनी बड़ी है चुनौती?
भवानीपुर की यह लड़ाई इस बार आसान नहीं दिख रही है. बीजेपी ने यहां से ममता बनर्जी के पुराने साथी और अब कट्टर प्रतिद्वंदी शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है. शुभेंदु ने दो दिन पहले ही यहां धुआंधार प्रचार शुरू कर दिया है. लेकिन असली पेंच फंसा है वोटर लिस्ट में. दरअसल, SIR प्रक्रिया के तहत भवानीपुर से लगभग 45,000 वोटर्स के नाम कट चुके हैं और 14,000 नाम अभी भी लटके हुए हैं. सीएम ममता ने साफ कहा है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उन्हें पार्टी कानूनी मदद दिलाएगी.
आंकड़ों की बात करें तो 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी यहां से करीब 58 हजार वोटों से जीती थीं, लेकिन उससे पहले आम चुनाव में टीएमसी की जीत का अंतर सिर्फ 28 हजार था. ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम कट जाना समीकरणों को चुनौतीपूर्ण बना रहा है. आज की इस रणनीति बैठक के बाद ममता बनर्जी अब उत्तर बंगाल का रुख करेंगी, जहां वह 24 मार्च से ताबड़तोड़ रैलियां करने वाली हैं. वहीं, अभिषेक बनर्जी भी उसी दिन से दक्षिण 24 परगना में मोर्चा संभालेंगे.
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