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मिडिल ईस्ट में युद्ध की आहट के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने साफ कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान पर हमला करती है, तो यह उनके लिए एक खतरनाक जुआ खेलने जैसा होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी हमले की सूरत में ईरान चुप नहीं बैठेगा और अपनी रक्षा योजनाओं के तहत क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा. हालांकि युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच उन्होंने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है और उम्मीद जताई है कि अमेरिका समझौते के लिए संजीदगी दिखाएगा. ईरान और चीन के बीच होने वाली घातक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 की संभावित डील ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा दी है.
जंग की बढ़ती आशंकाओं के बीच ईरान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन जल्द ही अपनी घातक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 ईरान को बेच सकता है. यह मिसाइल करीब 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और पलक झपकते ही दुश्मन के बड़े जहाजों को समुद्र में डुबो सकती है. चीन के साथ इस संभावित डील ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है. अगर यह समझौता फाइनल होता है, तो मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और सुरक्षा के नए समीकरण बन सकते हैं.
यह भी पढ़ें: PM Modi Israel Visit: द्विपक्षीय वार्ता, प्राइवेट डिनर, संसद में संबोधन… इजरायल दौरे पर PM मोदी का क्या है पूरा प्लान?
तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार, 26 फरवरी को जिनेवा में दूसरे दौर की अहम बातचीत होनी है. ईरान ने कहा है कि वह पूरी ईमानदारी के साथ इस बैठक में शामिल होगा और जल्द से जल्द एक समझौते पर पहुंचना चाहता है. दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप का पहला विकल्प हमेशा कूटनीति ही रहता है. लेकिन अमेरिका ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह सैन्य बल का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. दोनों देशों के इस रुख से पूरी दुनिया की नजरें जिनेवा वार्ता पर टिक गई हैं.
एक तरफ ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है. ईरान के कई विश्वविद्यालयों में छात्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. इन विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि छात्रों को अपनी बात रखने का हक है, लेकिन उन्हें अपनी मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी है कि गुस्से में भी देश के झंडे और पवित्र चीजों जैसी रेडलाइंस को पार नहीं करना चाहिए. सरकार का कहना है कि वे छात्रों के गुस्से को समझते हैं, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है.
मिडिल ईस्ट में युद्ध की आहट के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने साफ कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान पर हमला करती है, तो यह उनके लिए एक खतरनाक जुआ खेलने जैसा होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी हमले की सूरत में ईरान चुप नहीं बैठेगा और अपनी रक्षा योजनाओं के तहत क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा. हालांकि युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच उन्होंने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है और उम्मीद जताई है कि अमेरिका समझौते के लिए संजीदगी दिखाएगा. ईरान और चीन के बीच होने वाली घातक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 की संभावित डील ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा दी है.
जंग की बढ़ती आशंकाओं के बीच ईरान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन जल्द ही अपनी घातक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल CM-302 ईरान को बेच सकता है. यह मिसाइल करीब 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और पलक झपकते ही दुश्मन के बड़े जहाजों को समुद्र में डुबो सकती है. चीन के साथ इस संभावित डील ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है. अगर यह समझौता फाइनल होता है, तो मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और सुरक्षा के नए समीकरण बन सकते हैं.
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तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार, 26 फरवरी को जिनेवा में दूसरे दौर की अहम बातचीत होनी है. ईरान ने कहा है कि वह पूरी ईमानदारी के साथ इस बैठक में शामिल होगा और जल्द से जल्द एक समझौते पर पहुंचना चाहता है. दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप का पहला विकल्प हमेशा कूटनीति ही रहता है. लेकिन अमेरिका ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह सैन्य बल का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. दोनों देशों के इस रुख से पूरी दुनिया की नजरें जिनेवा वार्ता पर टिक गई हैं.
एक तरफ ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है. ईरान के कई विश्वविद्यालयों में छात्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. इन विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि छात्रों को अपनी बात रखने का हक है, लेकिन उन्हें अपनी मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी है कि गुस्से में भी देश के झंडे और पवित्र चीजों जैसी रेडलाइंस को पार नहीं करना चाहिए. सरकार का कहना है कि वे छात्रों के गुस्से को समझते हैं, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है.
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