भोजपुरी स्टार, 'कैकेयी' बनकर म‍िली नफरत, इन दिनों कहां गायब हैं एक्ट्रेस पद्मा खन्ना – AajTak

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70 और 80 के दशक के बॉलीवुड में ग्लैमर और हुनर की कोई कमी नहीं थी. कई एक्ट्रेसेस आईं और चली गईं, लेकिन कुछ ऐसे चेहरे थे जिन्होंने पर्दे पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी. एक ऐसी ही अदाकारा हैं पद्मा खन्ना. वह दौर ऐसा था जब फिल्मों में क्लासिकल डांस और कैबरे का मिला-जुला जादू चलता था, और पद्मा खन्ना ने इन दोनों ही रूपों में महारत हासिल की थी. 
पद्मा ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा को भी एक नई पहचान दी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमिताभ बच्चन के साथ ‘सौदागर’ में अपनी सादगी से दिल जीतने वाली और रामानंद सागर की ‘रामायण’ में रानी कैकेयी बनकर दर्शकों का गुस्सा मोल लेने वाली यह एक्ट्रेस आज कहां है? 
पद्मा खन्ना के हुनर की नींव बहुत कम उम्र में ही रख दी गई थी. महज 7 साल की मासूम उम्र में उन्होंने बनारस की गलियों में घुंघरुओं की थाप को पहचान लिया था. उन्होंने बनारस घराने के दिग्गज पंडित किशन महाराज से कथक की बारीकियां सीखनी शुरू की. इसके बाद, डांस के प्रति उनकी इसी दीवानगी ने उन्हें मशहूर डांसर गोपी कृष्ण तक पहुंचाया. यही शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा आगे चलकर फिल्मों में उनके एक्टिंग और अदाओं की जान बनी.
भोजपुरी फिल्मों से रखा कदम
पद्मा खन्ना के फिल्मी करियर का आगाज 1962 की ऐतिहासिक भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ से हुआ था. हालांकि, हिंदी सिनेमा के नक्शे पर उन्हें असली पहचान साल 1970 में मिली. देव आनंद की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ में उन्होंने एक कैबरे डांसर की भूमिका निभाई, जिसने रातों-रात उन्हें मशहूर कर दिया. उनकी खूबसूरती और बेहतरीन डांस मूव्स ने दर्शकों को दीवाना बना दिया, लेकिन इसी सफलता ने उनके साथ एक टैग भी जोड़ दिया- फिल्ममेकर्स उन्हें ज्यादातर डांसिंग रोल्स के लिए ही साइन करने लगे.
सौदागर से मिली पहचान
पद्मा खन्ना के एक्टिंग करियर का सबसे बेहतरीन दौर वह था जब उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘सौदागर’ में काम किया. इस फिल्म में उन्होंने ‘फूलबानू’ का किरदार निभाया, जो आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. कहानी एक चालाक ‘मोती’ (अमिताभ बच्चन) की थी, जो बिजनेस के लिए अपनी पहली पत्नी ‘मजूबी’ को धोखा देता है और फूलबानू से शादी कर लेता है.
इसके बाद 80 के दशक में उन्होंने टीवी की दुनिया में कदम रखा. रामानंद सागर की ‘रामायण’ में रानी कैकेयी का उनका किरदार इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें सचमुच नफरत की नजर से देखने लगे थे, जो एक कलाकार के तौर पर उनकी सबसे बड़ी जीत थी. 

करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में काम
पद्मा खन्ना ने भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में मिलाकर कुल 300 से अधिक फिल्मों में काम किया. उनमें से कुछ प्रमुख फिल्में: ‘साज और आवाज’, ‘बीवी और मकान’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘राहगीर’, ‘बहारों के सपने’, ‘अनहोनी’, ‘दास्तान’, ‘रामपुर का लक्ष्मण’, ‘सौदागर’, ‘माई’, ‘हमार-भौजी’ जैसी फिल्में शामिल हैं.
अब कहां हैं पद्मा खन्ना?
90 का दशक आते-आते पद्मा खन्ना ने एक बड़ा फैसला लिया. वह अपने दिवंगत पति और फिल्म मेकर जगदीश एल. सिदाना के साथ अमेरिका शिफ्ट हो गईं. ग्लैमर की दुनिया को पीछे छोड़कर उन्होंने अपनी पुरानी पसंद यानी ‘कथक’ को अपना पूरा समय देने का मन बनाया. उन्होंने वहां अपनी एक कथक अकादमी ‘इंडियानिका’ शुरू की, जहां वह भारतीय संस्कृति और नृत्य को बढ़ावा देने लगीं. आज 77 वर्षीय पद्मा खन्ना भले ही फिल्मी पर्दे से दूर हों, लेकिन उनकी विरासत को उनके बच्चे उसी अकादमी के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं.
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