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(इस खबर के कुछ विवरण विचलित कर सकते हैं)
"वह कुछ लोगों के अलावा किसी को पास आने नहीं देते. बड़े-बड़े लोगों को छोड़कर किसी को पास आने नहीं देते और महिलाओं को प्राथमिकता देते हैं. जब हमने यह सब देखा, तब से हमने वहाँ जाना बंद कर दिया."
मिरगाँव के संतोष हिंगे अशोक खरात के बारे में बात कर रहे थे. मिरगाँव, नासिक ज़िले के सिन्नर तालुका का एक गाँव है, जिसकी आबादी लगभग ढाई हज़ार है. इसी गाँव में अशोक खरात ने 'शिवनिका संस्थान' की स्थापना की थी.
अशोक खरात को महिलाओं का यौन शोषण करने के मामले में पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. नासिक ज़िला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें 29 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा है.
जब हम मिरगाँव पहुँचे, तो गाँव के लोग अशोक खरात के बारे में बात करने से बच रहे थे. कुछ ने कहा, "हमारा इंटरव्यू मत लीजिए, हमें डर लगता है."
लोगों ने यह भी कहा कि अगर अशोक खरात जेल से बाहर आए तो वह उन्हें परेशान करेंगे.
अशोक खरात मूल रूप से सिन्नर के कहांडलवाडी गाँव के रहने वाले हैं. शिवनिका संस्थान की पुस्तिका में दावा किया गया है कि उन्होंने बीएससी तक पढ़ाई की है और मर्चेंट नेवी के सबमरीन विभाग में 22 साल तक कप्तान के रूप में काम किया है.
मिरगाँव के संतोष हिंगे बताते हैं, "अशोक खरात को हमारे गाँव में आए हुए 15-16 साल हो गए. उन्होंने पहले यहाँ 17-18 एकड़ ज़मीन खरीदी. उसके बाद ईशान्येश्वर महादेव की स्थापना की. भव्य मंदिर बनाया और उसे आकर्षक रूप दिया. उसके कारण महाशिवरात्रि और श्रावणी सोमवार को लोगों की भीड़ बढ़ने लगी. यात्राएं होने लगीं."
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महाराष्ट्र समेत देशभर में इस समय नासिक के अशोक खरात मामले की चर्चा है.
इस मामले में धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा के नाम पर महिलाओं के यौन शोषण के आरोप का मामला सामने आया है. इस संबंध में मुख्य अभियुक्त अशोक खरात के ख़िलाफ़ गंभीर शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं.
अशोक खरात के राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर से लेकर कई बड़े राजनीतिक नेताओं के साथ फोटो और वीडियो सामने आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.
इस पृष्ठभूमि में रूपाली चाकणकर ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पद के साथ-साथ राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष पद से भी इस्तीफ़ा दे दिया है.
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और एनसीपी नेता रूपाली चाकंकर के इस्तीफ़े पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "वह महिला आयोग की अध्यक्ष हैं और उनका उस व्यक्ति से घनिष्ठ संबंध था जिसने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया या जिसे वह अपना गुरु मानती थीं. ऐसी स्थिति में इन सभी मामलों में न्याय नहीं मिल पाता, उन्होंने यह बात स्वीकार की और इस्तीफ़ा दे दिया."
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.
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अशोक खरात अंक-गणना करके लोगों को भविष्य बताते थे. उन्होने जो बातें भूतकाल के बारे में बताईं, लोग उन्हें सच मानते थे. इसलिए लोगों को विश्वास हो गया कि यह व्यक्ति उनके भविष्य की परेशानियां दूर करेगा.
अशोक खरात भक्तों से पूजा-पाठ और कर्मकांड करवाते थे. एक शिकायतकर्ता ने पुलिस में दर्ज एफ़आईआर में कहा कि वह एक चिंचोका (धार्मिक वस्तु) 10 हज़ार से 1 लाख रुपये तक में बेचते थे. वहीं, पत्थर लाखों रुपये में बेचते थे. मिरगाँव के मंदिर में नकली साँप और नकली बाघ रखकर वह लोगों को डराते थे, यह भी एफ़आईआर में दर्ज है.
मिरगाँव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर अशोक खरात का फ़ार्महाउस है. यह पूरी तरह पत्थर से बना हुआ है. पहले यहाँ एक शेड जैसी छोटी-सी कोठरी बनाई गई थी, लेकिन अब यह तीन से चार मंज़िला फ़ार्महाउस बन चुका है.
स्थानीय लोग दावा करते हैं कि 16 एकड़ में बने फ़ार्महाउस के निर्माण में लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. हर आठ-दस दिन में अशोक खरात यहाँ आते थे. उस समय उनके साथ बड़ी-बड़ी गाड़ियों का काफ़िला भी होता था.
अशोक खरात का फ़ार्महाउस जामनदी नदी के किनारे है. यहीं शिवनिका संस्थान का ईशान्येश्वर महादेव मंदिर भी है. गाँववालों का कहना है कि अशोक खरात ने नदी के तल में अतिक्रमण किया है.
मिरगाँव के भागवत शेलके बताते हैं, "साल-डेढ़ साल पहले अशोक खरात ने मंदिर को जाली से घेर लिया. हमारे चचेरे भाई की 5 एकड़ ज़मीन ले ली. नदी के तल में ज़मीन लेकर वहां कंपाउंड बनाया और हमारा रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया. इसके कारण हमें खेत छोड़कर गांव में आना पड़ा."
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2020 में महाराष्ट्र सरकार ने अशोक खरात के शिवनिका संस्थान को पीने के लिए 39 लाख लीटर पानी, 48 किलोमीटर दूर दारणा बाँध से देने का निर्णय लिया था.
अब इस पानी की आपूर्ति बंद करने के आदेश दिए गए हैं. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि खरात ने इस पानी का इस्तेमाल खेती के लिए किया.
इससे पहले राज्य सरकार ने अशोक खरात के ईशान्येश्वर देवस्थान के विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ 5 लाख रुपये मंज़ूर किए थे. 2017-18 में यहाँ के कामों के लिए 25 लाख रुपये की राशि देने की भी मंज़ूरी दी गई थी.
ज़मीन के सौदों में भी अशोक खरात शामिल रहते थे. गांव वालों का कहना है कि अकेले मिरगाँव में उन्होंने 50 से 55 एकड़ ज़मीन खरीदी है.
अब तक की जाँच में यह सामने आया है कि अशोक खरात के पास कुल 40 करोड़ 87 लाख रुपये की संपत्ति है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इस बारे में जानकारी दी थी.
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स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि अशोक खरात के भक्तों में क्लास वन अधिकारी, राजनेता, उद्योगपति और डॉक्टर जैसे हाई-प्रोफ़ाइल लोग शामिल थे. अशोक खरात की अपॉएंटमेंट के लिए 10 हज़ार रुपये लगते थे और दो महीने तक इंतज़ार करना पड़ता था.
अशोक खरात का ऑफ़िस नासिक के 'कनाडा कॉर्नर' क्षेत्र में है. शटर पर बड़े अक्षरों में लिखा है- "ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स."
वर्तमान में इस ऑफ़िस पर ताला लगा हुआ है और सन्नाटा है. जब हमने वहाँ के कुछ लोगों से बात की तो उनका कहना था कि उन्हें इस तरह की घटनाओं या महिलाओं के यौन शोषण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही कोई अंदाज़ा.
जिस महिला ने अशोक खरात के ख़िलाफ़ पहली शिकायत दर्ज कराई, उन्होंने कहा, "इस ऑफ़िस में मुझे बार-बार बुलाया गया. पहले शादी कराने के नाम पर, फिर वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर करने के नाम पर और धार्मिक विधि के नाम पर मेरे साथ बार-बार अत्याचार किया गया."
अशोक खरात के काम करने का एक ख़ास ढंग दिखाई देता है. जिन महिलाओं ने उसके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई, उनका कहना है कि वह उन्हें धमकाते थे कि इस बारे में बाहर कहीं भी बात न करें.
एक महिला ने शिकायत में कहा कि खरात ने उसके मन में डाल दिया था कि "अगर इस बारे में बाहर किसी को बताया तो मेरे पति की मौत हो जाएगी."
दूसरी महिला को धमकाया था कि "उसके बच्चों का बुरा होगा."
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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए हम अशोक खरात के घर गए, लेकिन वहाँ कोई उपलब्ध नहीं था. उसके रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया, लेकिन उनका फ़ोन बंद मिला.
बीबीसी के नासिक स्थित सहयोगी पत्रकार प्रवीण ठाकरे ने खरात के वकील, एडवोकेट सचिन भाटे से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
पुलिस की प्राथमिक जांच में अशोक खरात से जुड़ी कुछ गंभीर बातें सामने आई हैं. 24 मार्च को अशोक खरात मामले पर बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा, "पुलिस की जांच में 8 महिलाओं के 35 वीडियो सामने आए हैं. इन वीडियो में दिखता है कि अशोक खरात ने ढोंग और जादूटोना और तंत्र मंत्र का इस्तेमाल करके कई महिलाओं से बलात्कार और अश्लील हरकतें की हैं."
अशोक खरात के ख़िलाफ़ यौन अत्याचार और महाराष्ट्र नरबलि एवं जादूटोना प्रतिबंधक क़ानून के तहत 5 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं. इस मामले की आगे की जांच एसआईटी कर रही है.
लेकिन महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का कहना है कि जादूटोना विरोधी क़ानून का प्रभावी रूप से पालन नहीं हो रहा है.
नासिक में समिति के राज्य कार्यवाह कृष्णा चांदगुडे कहते हैं, "जादूटोना विरोधी क़ानून का प्रभावी रूप से पालन नहीं होता. उस क़ानून के नियम अभी बने ही नहीं हैं. इतना ही नहीं, उस क़ानून के तहत हर पुलिस स्टेशन में एक सतर्कता अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा गया है, लेकिन किसी भी पुलिस स्टेशन में ऐसी नियुक्ति नहीं हुई है."
"महत्त्वपूर्ण यह है कि इस क़ानून को लेकर पुलिस के मन में भ्रम है. कई मामलों में पुलिस हमारी मदद लेती है. हम उनके प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित करते हैं. लेकिन सरकार को इस क़ानून का प्रभावी रूप से पालन और प्रचार-प्रसार करना ज़रूरी है."
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अशोक खरात मामले में अन्य पीड़ितों की तलाश जारी है और आरोपी की संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है.
यह भी जांच हो रही है कि क्या उसके साथ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत थी. इस बीच, अशोक खरात को कठोर सज़ा देने की मांग उठ रही है.
मिरगाँव के संतोष हिंगे कहते हैं, "हमारे गाँववालों का कहना है कि इस पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए. उसे बड़ी सज़ा मिलनी चाहिए ताकि कोई दूसरा ढोंगी बाबा हमारे इलाके में सिर न उठा सके."
अशोक खरात के पक्ष में आए सरकारी फ़ैसले और उनके साथ कई हाई प्रोफ़ाइल लोगों की खिंचवाई गई तस्वीरों के कारण यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.
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