चित्तौड़गढ़ | साधुमार्गी जैन संघ की साध्वी श्री मननप्रज्ञा ने कहा कि सामायिक समभाव में रमण करने की क्रिया है। जो यह अभ्यास भी कराती है कि हमें संसार में रहना है, उसमें रमण नहीं करना।
कुंभानगर स्थित वर्धमान भवन में साध्वी ने सती सुभद्रा के प्रसंग से समझाया कि वे समभाव के कारण ही सभी परिस्थितियों में सफल रहीं। सामायिक करने के बाद या दौरान भाव कैसे हैं, सफलता इसी पर निर्भर रहती है। सम्यक आत्माएं संसार में रहती है लेकिन रमती नहीं है। आचार्य रामेश फरमाते हैं कि जब तक जीवन तब तक सहना। सहनशीलता बढ़ाएं, दुःख में घबराए नहीं।
जीवन तो सुख दुःख का मेला है। साध्वी संस्कारश्री ने कहा कि संयमी आत्माएं जब गोचरी के लिए जाते हैं तो लक्ष्य शुद्ध आहार का होता है। संयमी आत्माओं के लिए बनाया गया आहार ग्रहण करने योग्य नहीं होता। श्रावक श्राविकाओं का कर्तव्य है कि शुद्ध आहार दान का लाभ लें। संचालन गौतम पोखरना ने किया। कुंभानगर प्रतापनगर संघ अध्यक्ष अतुल सिसोदिया, बलवंत बाघमार, नवनीत मोदी, रमेश नागौरी आदि की विनती पर रविवार को भी प्रवचन वधर्मान भवन में होंगे। साध्वी मंजुलाश्रीजी ने मंगलपाठ सुनाया।
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