US-Iran War: जंग ईरान से, मार चीन-ताइवान पर, एक्सपर्ट बोले- ये है मिडिल ईस्ट युद्ध में ट्रंप की छिपी हुई जीत! – AajTak

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते पैदा हुए तेल-गैस संकट ने दुनिया की टेंशन बढ़ाई है. लेकिन इसका असर सिर्फ Oil-Gas तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कहीं ज्यादा पड़ता नजर आ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि ये ग्लोबल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को इस तरह बदलता नजर आ रहा है, जिससे आखिरकार अमेरिका ही फायदे में रहने वाला है. एनर्जी इकोनॉमिस्ट अनस अलहाजी ने ईरान युद्ध में छिपी हुई डोनाल्ड ट्रंप की जीत और चीन, ताइवान जैसे देशों की मुसीबत के बारे में बताया. 
इससे पहले बीते गुरुवार को ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर युद्ध जल्द खत्म नहीं होता है, तो मई की शुरुआत तक ग्लोबल इकोनॉमी क्रैश हो सकता है. इसके पीछे उन्होंने होर्मुज की वजह से एनर्जी सेक्टर में पड़ रहे असर को बताया था. 
इस जरूरी चीज के आयात पर संकट
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अलहाजी का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते लंबे समय से बंद होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) का सबसे बड़ा प्रभाव सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन में दरार के रूप में भी नजर आ रहा है. ये खासतौर पर एशियाई देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में संकट के साये के समान है. इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर निर्माण में एक जरूरी चीज हीलियम होती है और यही सबसे गंभीर समस्या बनकर खड़ी है. 
Hormuz Helium Tension
एक्सपर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हम हीलियम की बात करें, तो दुनिया के 35% हीलियम का व्यापार होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ही होता है. इस जरूरी चीज के बिना कंप्यूटर चिप्स या सेमीकंडक्टर बनाना संभव ही नहीं है.
चीन, कोरिया से जापान तक परेशान
अलहाजी ने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि, ‘हीलियम की सप्लाई में रुकावट से एशिया में इसका प्रभाव कहीं अधिक गंभीर हो सकता है. खासतौर पर साउथ कोरिया, ताइवान और चीन के लिए ये एक बड़ा झटका साबित होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मैंने वैश्विक स्तर पर 35% कहा था, लेकिन वास्तव में जब आप एशिया के नजरिए से देखते हैं, तो होर्मुज से इस चीज की सप्लाई करीब 90% से अधिक है.’
इस सप्ताह की शुरुआत में आई रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि होर्मुज बंद होने के कारण हीलियम की आपूर्ति में आई कमी ने ग्लोबल टेक सप्लाई चेन में कुछ प्रोडक्शन को प्रभावित करना शुरू भी कर दिया है. इसके अलावा हीलियम का यूज चिप निर्माण के दौरान कूलिंग से लेकर लीक का पता लगाने तक कई चरणों में होता है. वेस्ट एशिया संकट के बाद से इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं.
China Tension
‘सबसे बड़ा विजेता ट्रंप और अमेरिका’
एनर्जी एक्सपर्ट ने ईरान युद्ध से अमेरिका को सेमीकंडक्टर सेक्टर में जीत हासिल होने के पीछे तर्क दिया कि जियो-पॉलिटिकल परिणाम वाशिंगटन के पक्ष में हो सकता है, क्योंकि सबसे बड़ा विजेता ट्रंप और US है, उसके बाद पुतिन और फिर कुछ अन्य देश. इसकी वजह है कि अमेरिका लंबे समय से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को वापस अपने देश में लाने का प्रयास कर रहा है, जिसे एशिया पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से नीतिगत उपायों और निवेशों से लगातार सपोर्ट किया गया है. 
डोनाल्ड ट्रंप भी यही चाहते हैं कि सेमीकंडक्टर का निर्माण अमेरिका में अधिक हो, न कि साउथ कोरिया, ताइवान में और न ही चीन में और उन्होंने हीलियम को बाहर निकालकर उस लक्ष्य को हासिल कर लिया, जबकि इस सेक्टर में अव्वल देशों की चिंता बढ़ा दी है. 
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