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अमेरिका में एक नया ट्रेंड चल रहा है. इसे ‘द ग्रेट अन-रिटायरमेंट’ कहा जा रहा है. इस ट्रेंड के अनुसार अब रिटायर हो चुके 60-70 साल के अनुभवी प्रोफेशनल अब फिर से काम पर लौट रहे हैं. गोल्फ, यात्राएं या घरेलू आराम छोड़कर वे ऑफिस या रिमोट काम की ओर वापस आ रहे हैं.
फोर्ब्स ने इसे लीडरशिप स्ट्रेटजी के रूप में भी देखा है. वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी कई रिपोर्ट्स में बताया है कि बड़े उम्र के लोग काम पर लौट रहे हैं. AARP सर्वे (फरवरी 2026) के मुताबिक पिछले 6 महीनों में 7% रिटायर्ड लोगों ने दोबारा काम शुरू किया. देखा जाए तो यह आंकड़ा पहले 6% था. इनमें से 48% लोगों ने कहा कि वे पैसे की जरूरत से वापस आए हैं.
इन तीन वजहों से लौट रहे हैं लोग?
1. महंगाई और बढ़ते खर्च
फिक्स्ड पेंशन और बचत अब रोजमर्रा के खर्च पूरे नहीं कर पा रही. अपनी पुरानी लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए काम जरूरी हो गया है.
2. अकेलापन और मानसिक खालीपन
घर पर लंबे समय तक रहने से बोरियत और अकेलापन होने लगा.
काम से दोस्त-मित्र मिलते हैं और दिमाग भी सक्रिय रहता है. (फोर्ब्स रिपोर्ट में इसे बताया गया है)
3. कंपनियों को अनुभव की जरूरत
टेक और मैनेजमेंट में युवाओं में जोश है, लेकिन संकट संभालने और मेंटरिंग का गहरा तजुर्बा इन दिग्गजों के पास है. कंपनियां उन्हें हाथों-हाथ ले रही हैं.
कंपनियां क्यों दे रही हैं वेलकम बैक?
आजकल जेन-जी में नौकरी बार-बार बदलने का चलन ज्यादा है. वहीं रिटायर हो चुके लोग ज्यादा वफादार होते हैं. उन्हें ज्यादा ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ती और काम में अनुशासन और स्थिरता लाते हैं.
भारत में क्या स्थिति है?
भारत में सरकारी नौकरियों में रिटायरमेंट की उम्र ज्यादातर 58-60 साल है. अभी अमेरिका जितना बड़ा ट्रेंड नहीं दिख रहा, लेकिन बदलाव शुरू हो गया है. गिग इकोनॉमी, कंसल्टेंसी और मेंटरिंग के जरिए कई 50-60 से ज्यादा उम्र के लोग दूसरी पारी शुरू कर रहे हैं.
आने वाले समय में भारत के कॉर्पोरेट जगत में भी ‘सिल्वर इकोनॉमी’ का बड़ा योगदान दिख सकता है.
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