भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों और ब्रोकिंग इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कैपिटल मार्केट्स से जुड़े नए सख्त नियमों के लागू होने की तारीख को आगे बढ़ाते हुए अब 1 जुलाई 2026 कर दिया है। पहले ये नियम 1 अप्रैल से लागू होने वाले थे। इस फैसले से खास तौर पर मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का इस्तेमाल करने वाले निवेशकों और ब्रोकर्स को तीन महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है।
MTF ट्रेडर्स को मिली राहत
RBI के इस फैसले के बाद फिलहाल ब्रोकर्स 50% मार्जिन के साथ बैंक गारंटी का इस्तेमाल करना जारी रख सकेंगे। अगर ये नियम समय पर लागू हो जाते, तो ब्रोकर्स की लागत बढ़ जाती, जिसका सीधा असर ट्रेडर्स पर पड़ता। एनालिस्ट्स का मानना है कि नए नियमों के चलते ब्रोकरेज फीस बढ़ सकती थी या फिर ट्रेडर्स के लिए मार्जिन आवश्यकताएं सख्त हो जातीं। ऐसे में RBI का यह कदम मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
क्यों टाले गए नियम?
RBI ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण ग्लोबल और घरेलू बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने फरवरी में इन नियमों की घोषणा की थी, जिनका उद्देश्य बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी और जोखिम को नियंत्रित करना था। हालांकि, मौजूदा अस्थिर माहौल को देखते हुए इनके लागू होने को फिलहाल टाल दिया गया है।
नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित थे
नए नियमों के तहत बैंकों की ओर से ब्रोकर्स और दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को दिए जाने वाले कर्ज पर सख्त शर्तें लागू की जानी थीं। इनमें प्रोपाइटरी ट्रेडिंग (ब्रोकर द्वारा खुद के लिए ट्रेडिंग) के लिए फंडिंग पर रोक, 100% कोलेटरल की अनिवार्यता और बैंक लोन के गलत इस्तेमाल को रोकने के उपाय शामिल थे।
हालांकि RBI ने कुछ शर्तों में नरमी भी दी है, जैसे कि फुल कैश कोलेटरल के खिलाफ प्रोपाइटरी ट्रेडिंग के लिए फंडिंग की अनुमति और मार्केट मेकर्स के लिए कुछ राहत।
ब्रोकिंग इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन यह भी कहा है कि मूल नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ समय बढ़ाने का फैसला है, जबकि नियमों का असर भविष्य में जरूर दिखेगा। इससे प्रोपराइटरी ट्रेडिंग फर्म्स के लिए पूंजी जुटाना महंगा हो सकता है और उनकी मुनाफाखोरी पर दबाव पड़ सकता है।
कैपिटल मार्केट शेयरों पर रहेगा असर
RBI के इस फैसले के बाद मंगलवार, 1 अप्रैल को कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों पर खास नजर रहेगी। इसमें BSE, एंजल वन समेत कई ब्रोकिंग और एक्सचेंज कंपनियां शामिल हैं।
बता दें कि फरवरी में जब RBI ने इन नियमों की घोषणा की थी, तब इन कंपनियों के शेयरों में 2% से 10% तक की गिरावट देखी गई थी। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, इन नियमों का सबसे ज्यादा असर एक्सचेंज और ब्रोकर्स की कमाई पर पड़ सकता है। ब्रोकरेज ने कहा कि, प्रोपराइटरी ट्रेडिंग पर सख्ती से कुछ कंपनियों की कमाई पर करीब 10% तक असर पड़ सकता है।
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