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> अंग्रेज को मच्छर काट रहे थे उसने सारी लाइट बंद कर दी, तभी रूम में जुगनू आ गया…
अंग्रेज – Oh My God… इंडिया का मच्छर कितना एडवांस है, टार्च लेकर ढूंढ रहा है.
> चप्पू उदास बैठा था.
गप्पू – क्या हुआ, क्यों उदास बैठे हो?
चप्पू – अरे यार पूछ मत, शादी से पहले मैंने भगवान से मांगा था कि अच्छी ‘पकाने’ वाली देना.
लेकिन, यार जल्दबाजी में ‘खाना’ बोलना ही भूल गया था.
> पत्नी अपनी सहेली से- पति से ज्यादा इज्जत, तो मुझे उसकी अलमारी के कपड़े देते हैं.
जब भी खोलती हूं दो- तीन तो पैरों पर ही गिर जाते हैं.
> एक छोटे बच्चे ने अपनी मां से कहा – मां मैं इतना बड़ा कब हो जाउंगा कि आपसे बिना पूछे कहीं भी जा सकूं?
मां ने बहुत प्यार से कहा – बेटा इतना बड़ा तो तेरा बाप भी नहीं हुआ
> मोहन दर्जी के पास गया और उससे पूछा- पैंट की सिलाई कितने की है?
दर्जी – 300 रुपए.
मोहन – और निक्कर की?
दर्जी – 100 रुपए.
मोह – तो फिर निक्कर ही सिल दो, बस लंबाई पैरों तक कर देना.
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> नौकर- सेठ जी मैंने आपको जलते मकान से निकालकर जलने से बचाया था,
इसलिए 100 रुपये दीजिए.
मालिक- यह लो 50 रुपये.
नौकर- पचास ही क्यों?
मालिक- क्योंकि उस वक्त मैं अधमरा था.
> पिता – पेपर कैसा गया?
बेटा – पहला सवाल छूट गया,
तीसरा आता नहीं था,
चौथा करना भूल गया,
पांचवां नजर नहीं आया.
पिता – और सवाल दो?
बेटा – बस सिर्फ वो ही गलत हो गया.
> एक बार एक दादा-दादी ने जवानी के दिनों को याद करने का फैसला किया…
अगले दिन दादा फूल लेकर वहीं पहुंचे जहां वो जवानी में मिला करते थे,
वहां खड़े-खड़े दादा के पैरों में दर्द हो गया
लेकिन दादी नहीं आईं,
घर जाकर दादा गुस्से से, “आईं क्यों नहीं?
दादी शर्माते हुए,’ मम्मी ने आने नहीं दिया’.
> लड़की देखने हरीश सपरिवार पहुंचा.
उनके सामने लड़की के गुणों की प्रशंसा की जा रही थी.
लड़की वालों ने कहा, ‘सीमा की आवाज कोयल जैसी है,
उसकी गर्दन तो मोरनी के जैसी है, चाल हिरणी जैसी और स्वभाव में से तो गाय है.’
हरीश ने कहा, ‘जी, क्या इसमें कोई इंसानी गुण भी हैं?
> औरतों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है..
काम करे तो सांस फूल जाती है..
और बैठ जाए तो सास फूल जाती है..
कुछ न करे तो बेचारी खुद फूल जाती है..
(डिस्क्लेमरः इस सेक्शन के लिए चुटकुले वॉट्सऐप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर हो रहे पॉपुलर कंटेंट से लिए गए हैं. इनका मकसद सिर्फ लोगों को थोड़ा गुदगुदाना है. किसी जाति, धर्म, मत, नस्ल, रंग या लिंग के आधार पर किसी का उपहास उड़ाना, उसे नीचा दिखाना या उसपर टीका-टिप्पणी करना हमारा उद्देश्य कतई नहीं है.)
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