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‘जब दुनिया का ध्यान कहीं और है, तब क्राउन प्रिंस अपने विरोधियों को खत्म कर रहे हैं.’ ईरान जंग के बीच सऊदी अरब में एक बिजनेसमैन को फांसी दे दी गई है जिसकी आलोचना करते हुए मानवाधिकार संगठन के लोग ये बात कह रहे हैं. किंगडम में बिजनेसमैन सऊद अल-फराज को सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने के आरोप में फांसी दे दी गई है. यह मामला 2011 का है.
42 वर्षीय फराज को सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित शहर कतीफ में प्रदर्शनों में शामिल होने, एक आतंकी सेल चलाने और पुलिस अधिकारियों की हत्या के आरोप में 2022 में दोषी ठहराया गया था. कतीफ शिया बहुल क्षेत्र है और सुन्नी बहुल सऊदी अरब की सरकार पर अक्सर शिया समुदाय के साथ भेदभाव के आरोप लगते रहते हैं.
सऊदी के गृह मंत्रालय ने बुधवार को शाही आदेश के बाद उनकी मौत की सजा लागू किए जाने की घोषणा की.
मंत्रालय ने कहा, ‘इसकी घोषणा करते हुए गृह मंत्रालय यह साफ करता है कि सऊदी अरब की सरकार सुरक्षा बनाए रखने, न्याय सुनिश्चित करने और निर्दोष लोगों के खिलाफ अपराध करने वालों तथा उनके जीवन और सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने वालों पर इस्लामी शरिया के तहत सजा लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है.’
साथ ही मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ऐसे काम करने के बारे में सोचने वाले किसी भी व्यक्ति को तय कानूनी सजा का सामना करना पड़ेगा.
सऊदी बिजनेसमैन ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से किया था इनकार
फराज ने लंबे समय तक अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया था. उनका कहना था कि उनसे जबरन कबूलनामा लिया गया और पूछताछ के दौरान उन्हें टॉर्चर किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें व्हीलचेयर पर जेल और अस्पताल लाया-ले जाया जाता था और 21 महीने तक एकांत कारावास में रखा गया.
वह उन सैकड़ों सऊदी नागरिकों में शामिल थे, जिन्होंने 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान प्रदर्शन किए थे और देश में ज्यादा लोकतंत्र व सुधारों की मांग की थी.
इन प्रदर्शनों में शामिल कई लोग कतीफ के शिया समुदाय से थे, जो लंबे समय से भेदभाव की शिकायत करते रहे हैं.
2015 में जब देश के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सत्ता में आए तब उन्होंने कई सामाजिक सुधारों की घोषणा की और उन्हें लागू भी किया. लेकिन उनके शासन में विरोधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी देखने को मिली है. उनके आने के बाद से सऊदी अरब में फांसी में मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
सऊदी अरब ने तोड़े फांसी के रिकॉर्ड
समाचार एजेंसी एएफपी के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सऊदी अरब ने एक साल में दी जाने वाली फांसियों का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया. 2025 में सऊदी ने 340 लोगों को मौत की सजा दी गई.
इनमें से ज्यादातर (232) मामले ड्रग्स से जुड़े थे, जबकि कुछ अन्य को आतंकवाद के आरोपों में फांसी दी गई.
कानूनी अधिकार संगठन Reprieve की जीद बस्योनी ने मिडिल ईस्ट आई से कहा कि सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान की आलोचना करने वालों के लिए यह ‘डरावना’ वक्त है. उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट युद्ध में उलझा है, सऊदी अरब अपने विरोधियों को कुचलने में लगा है.
उन्होंने कहा, ‘यह कोई संयोग नहीं है कि पिछले दो सालों में पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान सऊदी शासन ने पहले से कहीं ज्यादा लोगों को फांसी दी है. इसमें पत्रकार और वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने बचपन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. जब दुनिया का ध्यान कहीं और है, तब क्राउन प्रिंस अपने विरोधियों को खत्म कर रहे हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सिर्फ प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण सऊद अल-फराज को टॉर्चर किया गया और उनसे झूठा कबूलनामा लिया गया. यह बेहद चिंताजनक है कि संयुक्त राष्ट्र के कानूनी विशेषज्ञों ने उनकी हिरासत को मनमाना बताया और उनकी रिहाई की भी मांग की, बावजूद इसके सऊदी अधिकारियों ने उन्हें फांसी दे दी.’
मिडिल ईस्ट फिलहाल युद्ध की चपेट में है जहां अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमले कर रहे हैं. जवाब में ईरान ने सऊदी, यूएई समेत कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया है. ईरान खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टार्गेट कर रहा है.
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