प्राइवेट स्कूलों में किताब और ड्रेस के बदले में होने वाली उगाही पर ZEE NEWS ने एक खास मुहिम चलाई है. सीधे करोड़ों लोगों से जुड़ी इस मुहिम पर अब भाजपा सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी है.
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ZEE NEWS प्राइवेट स्कूलों में किताब के नाम पर होने वाली मुनाफाखोरी और धोखाधड़ी को EXPOSE कर रहा है. हमारे देश में 10 करोड़ बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं. आपमें से बहुत सारे परिवार ऐसे हैं, जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. आपमें से ज्यादातर लोगों ने अपने बच्चों के लिए नए एकेडमिक सेशन में किताबें खरीदी होंगी, लेकिन क्या आपने ये सोचा है कि किताब के नाम पर प्राइवेट स्कूल वाले, आपसे 10 गुना ज्यादा वसूली कर रहे हैं. यानी किताबों की कालाबाजारी हो रही है. दस गुना ज्यादा मुनाफाखोरी हो रही है.
देश भर के प्राइवेट स्कूलों में नए एकेडमिक सेशन की शुरुआत हो गई है और अभिभावक बच्चों के लिए किताबें खरीद रहे हैं लेकिन हैरानी की बात ये कि प्राइवेट स्कूल किताब के नाम पर वसूली कर रहे हैं. स्कूल बच्चों की पीठ पर बोझ बढ़ा रहे हैं और अभिभावकों की जेब हल्की कर रहे हैं. NCERT की एक किताब अगर 65 रुपये की मिल रही है तो, वैसी ही दूसरी किताब जिसे किसी प्राइवेट पब्लिशर ने छापा है, वो प्राइवेट स्कूल 650 रुपये में जबरन बेच रहे हैं. अभिभावकों को मजबूर होकर इसे खरीदना पड़ रहा है.
ये हाल तब है, जब प्राइवेट पब्लिशर की किताब में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है. कुछ भी ऐसा नहीं है, जिससे उस किताब की ज्यादा कीमत होने को जस्टिफाय किया जा सके. किताब के नाम पर कैसे अभिभावकों की जेब काटी जा रही है, यहां समझिए.
वीडियो में देखिए
कैसे होती है प्राइवेट स्कूलों में किताबों ने पर वसूली
CBSE से मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए पहली से 12वीं क्लास तक NCERT तय सिलेबस के मुताबिक किताबें प्रकाशित करती है. सरकारी स्कूलों में NCERT की किताबें ही पढ़ाई जाती है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों ने मुनाफे के लिए एक चोर दरवाजा खोज लिया. प्राइवेट स्कूलों में सिलेबस तो NCERT का होता है. NCERT की किताबों का सेट भी छात्रों को दिया जाता है, लेकिन उसके साथ ही छात्रों को प्राइवेट पब्लिशर्स की किताब भी जबरन थमा दी जाती हैं.
NCERT से 10 गुना ज्यादा हैं कीमतें
प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें भी NCERT के सिलेबस को ही कवर करती हैं, लेकिन इनकी कीमत NCERT की किताबों के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा होती है. दस गुना महंगी किताब लेने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि बच्चे उस किताब में जो पढ़ेंगे वो सही पढ़ेंगे. क्योंकि NCERT के मुकाबले जो किताब प्राइवेट स्कूल वाले बेच रहे हैं, उनमें अशुद्धियों की मात्रा ज्यादा है.
5 करोड़ लोगों से सीधा जुड़ा है मुद्दा
आखिर अशुद्धियों वाली और महंगी किताबें खरीदने की मजबूरी से हमें आजादी क्यों नहीं मिलनी चाहिए? क्या ‘स्कूल बैग’ अब ‘आर्थिक बोझ’ का प्रतीक बन गया है? ये सवाल देश के 5 करोड़ परिवार से सीधे तौर पर जुड़ा है. ये सवाल देश के हर उस शख्स से जुड़ा है, जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहा है या पढ़ाना चाहता है. इसलिए ZEE NEWS इसे गंभीरता से उठा रहा है.
ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए- भाजपा सांसद दिनेश शर्मा
इस संबंध में जी न्यूज ने जब भाजपा सांसद दिनेश शर्मा से पूछा तो उन्होंने बताया,’जब मैं उत्तर प्रदेश का शिक्षा मंत्री था तो, मैंने एक नियम बनाया था, उसके अंतर्गत मैंने यह तय कर दिया था कि कोई भी अगर किताबों का मूल्य NCERT की निर्धारित कीमतों से ज्यादा नहीं वसूल सकता और मैं समझता हूं कि वो नियम आज भी लागू है. अगर ऐसा होता है, तो लोग इसकी शिकायत कर सकता है. जो नियम अभी-भी लागू है और कोई उसका उल्लंघन करता है तो वो सजा के पात्र है. शर्मा ने आगे बताया कि यह नियम निजी स्कूलों पर भी लागू होता है. ‘
सांसद जनार्दन सिंह ने ZEE NEWS को कहा धन्यवाद
इसके अलावा भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा,’दुर्भाग्य की बात है कि मैं कहूंगा कि स्कूल किताबों को महंगी दरों पर बेच रहे हैं, वो 50 रुपये की किताब है उसको 500-500 रुपये में बेचा जा रहा है.’ उन्होंने कहा कि NCET की किताबें सही कीमत पर बिकनी चाहिए, सरकार के लिए प्रयास भी कर रही है, ताकि बच्चों को पढ़ाने में अभिभावकों को कोई दिक्कत ना हो. इस मौके पर जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने जी न्यूज का भी शुक्रिया अदा किया.
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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुं…और पढ़ें
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