भास्कर न्यूज|झंझारपुर
मिथिला और भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर (चेतना) प्रज्ञा प्रवाह, युवा आयाम, उत्तर बिहार द्वारा आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन डॉ.अनुराग मिश्र के कुशल संचालन में किया गया। विषय प्रवेश करते हुए एलएमएनयू रसायन शास्त्र विभाग के डॉ.सोनू राम शंकर ने कहा कि भारत पर आक्रमण केवल मात्र भू-राजनीतिक नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास भी था। भारतीय ज्ञान परंपरा उस वर्चस्ववादी विरासत को चुनौती देने का कार्य कर रही है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू की प्रो.वंदना झा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मिथिला की संस्कृति में एक शाश्वत ज्ञान संस्कृति विद्यमान है। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सीता संस्कृति को अपनाने की आवश्यकता है, जो त्याग, मर्यादा और संतुलन का प्रतीक है। सीता संस्कृति कृषि संस्कृति है। सतत् विकास की संस्कृति है। साथ ही उन्होंने राजा जनक की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए मिथिला की दार्शनिक विरासत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रज्ञा प्रवाह के उत्तर पूर्व क्षेत्र क्षेत्रीय संयोजक देवव्रत प्रसाद ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के विमर्श को सशक्त बनाने में प्रज्ञा प्रवाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऑनलाइन संगोष्ठी में विजय शाही (प्रांत संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह), प्रो.पंकज कुमार सिंह, प्रो. विमलेश कुमार सिंह, प्रो. सरोज रंजन आदि थे।
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