कश्मीर के गांव ने दिखाया बड़ा दिल, इंसानियत के लिए करोड़ों की संपत्ति कर दी वक्फ – Zee News

Bandipora Waqf Property Donation: इस भागदौड़ भरे जमाने में जब लोग एक-एक रुपये जोड़ कर महंगी संपत्ति खरीदने का सपना देखते हैं, उस दौर में कश्मीर के बांदीपोरा के मुसलमानों ने इंसानियत की अद्भुत मिसाल पेश की है. जिले गुंडपोरा गांव के मुसलमानों ने करोड़ो रुपये की संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान कर दी. जिसकी अब सरकार से लेकर आम लोग तक तारीफ कर रहे हैं. जानें क्या है पूरा मामला?
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Kashmir News: उत्तर कश्मीर के एक छोटे से गांव ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि धार्मिक संस्थाओं का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यहां के लोगों ने आपसी सहमति से करोड़ों की संपत्ति खुद ही वक्फ बोर्ड को सौंप दी, ताकि धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सके, और उससे होने वाली आमदनी से गरीबों, बच्चों और बेसहारा महिलाओं की मदद की जा सके.
मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुंडपोरा गांव के निवासियों ने करीब 15 करोड़ रुपये की दरगाह से जुड़ी संपत्ति को अपनी मर्जी से जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड को सौंप दिया. अधिकारियों ने बताया कि इस संपत्ति में हजरत सुल्तान-उल-आरिफीन दरगाह, एक स्कूल और लगभग 15 दुकानें शामिल हैं, जिन्हें अब बोर्ड के मैनेजमेंट और देखरेख के लिए ट्रांसफर किया गया है.

इस संपत्ति का ऑफिशियली ट्रांसफर शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद किया गया. इसमें जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के सदस्य सैयद मोहम्मद हुसैन हक्कानी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. इस मौके पर सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं और पूरी संपत्ति के जिम्मेदारी ऑफिशियल तौर पर बोर्ड को सौंप दिया गया.

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दरगाह के पूर्व मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों ने बताया कि यह फैसला सामूहिक रूप से लिया गया है. उनका कहना था कि इस कदम का मकसद दरगाह और उससे जुड़ी संपत्तियों का बेहतर रखरखाव, पारदर्शिता और तरक्की को सुनिश्चित करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वक्फ बोर्ड के मैनेजमेंट में आने के बाद यहां आने वाले जायरीनों के लिए सहूलियत और बेहतर होंगी. साथ ही प्रशासनिक इंतजाम भी ज्यादा बेहतर हो सकेगा.
वहीं, वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि इन संपत्तियों का मैनेजमेंट तय नियमों के तहत किया जाएगा. उन्होंने बताया कि दुकानों से होने वाली आय का सही रिकॉर्ड रखा जाएगा और इस धन का इस्तेमाल दरगाह की देखरेख और सामाजिक कल्याण के कामों में किया जाएगा. साथ ही, बोर्ड स्थानीय लोगों के साथ मिलकर दरगाह की जरूरतों का आंकलन करेगा और तरक्की के कामों की योजना तैयार करेगा.
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में कई मुस्लिम संगठन वक्फ अमेंडमेंट एक्ट-2025 को लेकर चिंता जता रहे हैं. उनका मानना है कि इस कानून से धार्मिक संपत्तियों के मैनेजमेंट पर असर पड़ सकता है. हालांकि, बांदीपोरा का यह मामला एक अलग तस्वीर पेश करता है, जहां स्थानीय लोगों ने खुद आगे आकर अपनी धार्मिक संपत्ति को संस्थागत प्रबंधन के तहत देने का फैसला लिया है.
गांव के लोगों का कहना है कि इस कदम के बाद दरगाह में साफ-सफाई, पहुंच की इंतजाम और नजराने के मैनेजमेंट जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है. उनका मानना है कि वक्फ बोर्ड के जरिए इन सभी इंतजामों को ज्यादा पारदर्शी और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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