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महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और स्वयंभू बाबा अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत होने का दावा सामने आया. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से जुड़े इस खुलासे ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है और विपक्ष ने सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. महाराष्ट्र में अशोक खरात से जुड़े मामले को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है.
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच कम से कम 17 बार फोन पर बातचीत हुई थी. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी खरात से संपर्क किया था. दमानिया के अनुसार, उन्हें अशोक खरात का कॉल डिटेल रिकॉर्ड एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर प्राप्त हुआ.
महाराष्ट्र कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस मामले से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लगातार लीक की जा रही है. पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या महायुति सरकार निजी दुश्मनी निकालने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है.
ऐसे सामने आया मामला
गौरतलब है कि अशोक खरात को 18 मार्च को एक महिला के साथ तीन साल तक दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जांच के दौरान यौन शोषण और वित्तीय अनियमितताओं सहित कई अन्य गंभीर अपराधों का खुलासा हुआ है. अब तक उसके खिलाफ कुल आठ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि इस मामले में सत्ताधारी महायुति के कई नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से जुड़े हालिया खुलासे इन आरोपों को और मजबूत करते हैं.
प्राइवेट जानकारी लीक करने के आरोप
सावंत ने सवाल उठाया कि जांच के दौरान जुटाए गए इतने अहम और गोपनीय सबूत आखिर सार्वजनिक कैसे हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह या तो जांच एजेंसियों की गंभीर लापरवाही है या फिर जानबूझकर जानकारी लीक कर राजनीतिक बदला लिया जा रहा है. उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है.
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी इस मामले से जुड़े महिलाओं के वीडियो वायरल हुए थे, जिससे संबंधित लोगों को भारी मानसिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ा.
कांग्रेस ने पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि इस विवाद से कई लोगों के जीवन और परिवार प्रभावित हुए हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि अगर जांच एजेंसियां ही इस तरह की लीक को रोकने में नाकाम रहती हैं, तो यह राज्य के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.
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