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Last updated on – April 5, 2026 8:15 AM IST
By Ikramuddin
आजादी के बाद पूरे देश में इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) का लगभग एकछत्र राज था. केंद्र से लेकर ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं.
मगर कांग्रेस को पहली बार बड़ा चुनावी झटका 1957 के विधानसभा चुनाव में लगा. यही वो चुनाव था जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी.
कांग्रेस को हराने वाली पार्टी थी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) उस समय यह एक बड़ी वैचारिक जीत मानी गई.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटना केरल राज्य में हुई थी. यह राज्य बाद में भी वैकल्पिक राजनीति का गढ़ बना.
1957 में केरल में बनी सरकार देश की पहली लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई गैर-कांग्रेसी सरकार थी.
इस ऐतिहासिक सरकार का नेतृत्व ईएमएस नंबूदरीपाद ने किया. वे भारत के पहले कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री बने.
यह सिर्फ एक राज्य की जीत नहीं थी. इससे साबित हुआ कि भारत में लोकतंत्र मजबूत है और जनता बदलाव कर सकती है.
इस हार ने कांग्रेस को साफ संकेत दिया कि उसका दबदबा हर जगह कायम नहीं रहेगा. विपक्ष भी मजबूत हो सकता है.
केरल के इस चुनाव के बाद देश में धीरे-धीरे गैर-कांग्रेसी राजनीति मजबूत होने लगी. आगे चलकर कई राज्यों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.
1957 का केरल चुनाव आज भी भारतीय राजनीति के सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट्स में गिना जाता है. यह लोकतंत्र की असली ताकत का उदाहरण है.
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