पावर, परफॉर्मेंस या माइलेज पर असर! 160 रुपये लीटर वाले 100 ऑक्टेन पेट्रोल में क्या है ख़ास – AajTak

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100 Octane Petrol Price, Benefits: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते क्रूड-ऑयल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. अब इसका असर आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है. दिल्ली में प्रीमियम फ्यूल इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को अब ज्यादा खर्च करना होगा. 1 अप्रैल से 100 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत में सीधा 11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया है. 
दिल्ली में 100 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं, एडिटिव्स वाले प्रीमियम डीजल के दाम भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं. इससे पहले 20 मार्च को सरकारी तेल कंपनियों ने 95 ऑक्टेन पेट्रोल के दाम में भी 2.35 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी.
हालांकि राहत की बात यह है कि रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसके पीछे सरकार द्वारा हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती है. पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है. फिलहाल दिल्ली में रेगुलर पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. 
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अब चूंकि 100 ऑक्टेन वाले पेट्रोल की कीमतों में तगड़ा इजाफा हुआ है, तो यह समझना जरूरी है कि ये आखिर किस तरह का पेट्रोल होता है. इसमें क्या ख़ास बात होती है जिससे इसकी कीमत इतनी ज्यादा है. क्या आप अपने कार-बाइक में इस पेट्रोल का इस्तेमाल कर सकते हैं? आज हम आपके लिए ऐसे ही कई सवालों के जवाब लेकर आए हैं. 
आपने पेट्रोल की चर्चा के दौरान हाई-ऑक्टेन या लो-ऑक्टेन सुना या पढ़ा होगा. दरअसल, ऑक्टेन रेटिंग पेट्रोल की क्वॉलिटी को मापने का एक तरीका है. यह बताता है कि पेट्रोल इंजन के अंदर जलते समय कितने बेहतर ढंग से काम करेगा और “नॉकिंग” की समस्या से कितना बचाएगा. जब इंजन में पेट्रोल जलता है, तो उसे स्मूद तरीके से जलना चाहिए. लेकिन अगर पेट्रोल ठीक से नहीं जले, तो इंजन में हल्के-हल्के धमाके जैसे होते हैं, जिसे नॉकिंग कहते हैं. यही नॉकिंग इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. 
ऑक्टेन रेटिंग जितनी ज्यादा होगी, पेट्रोल उतना ही बेहतर तरीके से बिना नॉकिंग के जलेगा. 91 ऑक्टेन वाला पेट्रोल सामान्य गाड़ियों के लिए पर्याप्त होता है. 95 या 100 ऑक्टेन पेट्रोल हाई परफॉर्मेंस कार और स्पोर्ट्स बाइक्स के लिए बेहतर माना जाता है. जिन गाड़ियों के इंजन ज्यादा पावरफुल होते हैं, उनमें फ्यूल ज्यादा प्रेशर (compression) में जलता है. ऐसे इंजन को हाई ऑक्टेन पेट्रोल की जरूरत होती है ताकि फ्यूल समय से पहले जलकर इंजन को नुकसान न पहुंचाए.
भारत में इंडियन ऑयल 100 ऑक्टेन पेट्रोल को XP100 के नाम से बेचती है और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ‘Power100’ के नाम से. इंडियन ऑयल द्वारा बेचा जाने वाला XP100 देश का पहला 100 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल है, जिसे खासतौर पर लग्जरी कारों और हाई परफॉर्मेंस बाइक्स के लिए बनाया गया है. यह फ्यूल इंजन की पावर बढ़ाता है, तेज एक्सीलरेशन देता है और माइलेज भी बेहतर करता है. इसमें एंटी-नॉक क्वॉलिटी ज्यादा होते हैं, जिससे इंजन स्मूद चलता है और उसकी लाइफ भी बढ़ती है. साथ ही, यह कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे पर्यावरण को भी कम नुकसान होता है.
इंडियन ऑयल के अनुसार XP100 इस्तेमाल करने से वाहन को तेज रफ्तार पकड़ने में मदद मिलती है और ड्राइविंग ज्यादा स्मूद होती है. यह इंजन में जमा गंदगी को कम करता है और मेंटेनेंस खर्च भी घटाता है. कम बेंजीन और एरोमैटिक कंटेंट के कारण यह हवा को कम प्रदूषित करता है.
अगर आपकी गाड़ी 91 ऑक्टेन पेट्रोल पर चलती है, तब भी आप XP100 का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि स्मूद परफॉर्मेंस और बेहतर माइलेज मिल सकता है. हालांकि इसका पूरा फायदा हाई परफॉर्मेंस इंजन में ही मिलता है.
इंडियन ऑयल के अनुसार, अगर आप 91 और 100 ऑक्टेन पेट्रोल को मिलाकर इस्तेमाल करते हैं तो इससे भी इंजन को कोई नुकसान नहीं होगा. ऐसे में फ्यूल का कुल ऑक्टेन लेवल 91 से ज्यादा हो जाएगा, जिससे गाड़ी पहले से बेहतर परफॉर्म कर सकती है.
कुछ लोग इस बात को लेकर भी चिंतित होते हैं कि एक बार 100 ऑक्टेन पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद रेगुलर फ्यूल पर स्विच करना नुकसानदेह हो सकता है. ऐसे में इंडियन ऑयल का कहना है कि, 100 ऑक्टेन इस्तेमाल करने के बाद आप फिर से 91 ऑक्टेन पेट्रोल पर स्विच कर सकते हैं. इससे इंजन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. गाड़ियां पहले से ही 91 ऑक्टेन के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं.
बीते दिनों E20 फ्यूल के चर्चा में आने के बाद कई कार कंपनियों ने वारंटी को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे. लेकिन 100 ऑक्टेन फ्यूल के साथ ऐसा नहीं है. इंडियन ऑयल के अनुसार, XP100 समेत सभी फ्यूल भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के मुताबिक होते हैं. इसलिए इनका इस्तेमाल करने पर गाड़ी की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता है. बल्कि इसका हाई ऑक्टेन लेवल इंजन में बेहतर कंबशन देता है और परफॉर्मेंस बढ़ता है.
कुल मिलाकर, प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी से हाई-एंड गाड़ियों के मालिकों की जेब पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन आम वाहन चालकों को फिलहाल राहत बनी हुई है. आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल सिचुएशन तय करेंगे कि पेट्रोल-डीजल के दाम आगे किस दिशा में जाते हैं.
 
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