Mesh Sankranti: 14 या 15 अप्रैल, मेष संक्राति कब है? जानें सटीक डेट, महत्व और ग्रहदोष शांति के उपाय – hindi.news24online.com

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Mesh Sankranti: अप्रैल के मध्य आते ही मौसम के साथ धार्मिक माहौल भी बदलने लगता है. इस समय सूर्य उत्तरायण में होते हैं और वे मीन राशि से निकालकर मेष राशि में आते हैं. इसे मेष संक्रांति कहते हैं. मेष संक्रांति एक बेहद खास पर्व, जो सौर नव वर्ष की शुरुआत का संकेत देता है. लोग अक्सर तारीख को लेकर उलझन में रहते हैं, लेकिन इस बार स्पष्ट स्थिति है. यह दिन नई शुरुआत, ऊर्जा और शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक माना जाता है. जानिए, 14 या 15 अप्रैल, मेष संक्राति कब है और इसका महत्व क्या है?
साल 2026 में मेष संक्रांति 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी. सूर्य का मेष राशि में प्रवेश सुबह 09:38 बजे होगा. पुण्य काल सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक रहेगा, जबकि महा पुण्य काल 07:30 से 11:47 तक है. इसी दौरान स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है.
मेष संक्रांति: सुबह 09:38 बजे
पुण्य काल: सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक
महा पुण्यकाल: सुबह 07:30 से 11:47 तक
यह दिन सौर कैलेंडर का पहला दिन माना जाता है. सूर्य इस दिन अपनी उच्च राशि मेष में पहुंचते हैं. इससे खरमास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू होते हैं. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य की पूजा करने से आत्मबल और स्वास्थ्य में सुधार आता है. मेष संक्रांति को संकल्प का दिन भी कहा जाता है. लोग इस दिन नए लक्ष्य तय करते हैं. स्वास्थ्य, करियर और परिवार से जुड़े फैसले लेने के लिए यह समय शुभ माना जाता है.
यह भी पढ़ें: Home Vastu Tips: घर की खिड़कियों के ये 5 वास्तु दोष आपको बना सकते हैं कंगाल, करें ये उपाय
मेष संक्रांति को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग नामों से मनाया जाता है. पंजाब में बैसाखी, असम में बोहाग बिहू, बंगाल में पोइला बोइशाख और केरल में विशु के रूप में यह पर्व लोकप्रिय है. हर क्षेत्र में उत्सव का तरीका अलग, लेकिन भाव एक ही रहता है.
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. सत्तू, गुड, तिल और जल का दान शुभ माना जाता है. बिहार और यूपी में इसे सतुआनी कहा जाता है, जहां सत्तू खाने और बांटने की परंपरा है. लोग घरों में ठंडक देने वाली चीजों का दान भी करते हैं, जैसे पंखा और मिट्टी के घड़े.
इस दिन जल्दी उठना शुभ माना जाता है. साफ कपड़े पहनें और पूजा में मन लगाएं. क्रोध और नकारात्मक सोच से बचें. ताजा और हल्का भोजन करें. जरूरतमंदों की मदद करना इस दिन सबसे बड़ा पुण्य माना गया है.
ज्योतिष के अनुसार यह दिन ग्रह दोष दूर करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है:
यह भी पढ़ें: Samudrik Shastra: कानों के आकार से जुड़ा है भाग्य का कनेक्शन, जानें क्या कहता है सामुद्रिक शास्त्र
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Mesh Sankranti: अप्रैल के मध्य आते ही मौसम के साथ धार्मिक माहौल भी बदलने लगता है. इस समय सूर्य उत्तरायण में होते हैं और वे मीन राशि से निकालकर मेष राशि में आते हैं. इसे मेष संक्रांति कहते हैं. मेष संक्रांति एक बेहद खास पर्व, जो सौर नव वर्ष की शुरुआत का संकेत देता है. लोग अक्सर तारीख को लेकर उलझन में रहते हैं, लेकिन इस बार स्पष्ट स्थिति है. यह दिन नई शुरुआत, ऊर्जा और शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक माना जाता है. जानिए, 14 या 15 अप्रैल, मेष संक्राति कब है और इसका महत्व क्या है?
साल 2026 में मेष संक्रांति 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जाएगी. सूर्य का मेष राशि में प्रवेश सुबह 09:38 बजे होगा. पुण्य काल सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक रहेगा, जबकि महा पुण्य काल 07:30 से 11:47 तक है. इसी दौरान स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है.
मेष संक्रांति: सुबह 09:38 बजे
पुण्य काल: सुबह 05:57 से दोपहर 01:55 तक
महा पुण्यकाल: सुबह 07:30 से 11:47 तक
यह दिन सौर कैलेंडर का पहला दिन माना जाता है. सूर्य इस दिन अपनी उच्च राशि मेष में पहुंचते हैं. इससे खरमास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू होते हैं. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य की पूजा करने से आत्मबल और स्वास्थ्य में सुधार आता है. मेष संक्रांति को संकल्प का दिन भी कहा जाता है. लोग इस दिन नए लक्ष्य तय करते हैं. स्वास्थ्य, करियर और परिवार से जुड़े फैसले लेने के लिए यह समय शुभ माना जाता है.
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मेष संक्रांति को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग नामों से मनाया जाता है. पंजाब में बैसाखी, असम में बोहाग बिहू, बंगाल में पोइला बोइशाख और केरल में विशु के रूप में यह पर्व लोकप्रिय है. हर क्षेत्र में उत्सव का तरीका अलग, लेकिन भाव एक ही रहता है.
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. सत्तू, गुड, तिल और जल का दान शुभ माना जाता है. बिहार और यूपी में इसे सतुआनी कहा जाता है, जहां सत्तू खाने और बांटने की परंपरा है. लोग घरों में ठंडक देने वाली चीजों का दान भी करते हैं, जैसे पंखा और मिट्टी के घड़े.
इस दिन जल्दी उठना शुभ माना जाता है. साफ कपड़े पहनें और पूजा में मन लगाएं. क्रोध और नकारात्मक सोच से बचें. ताजा और हल्का भोजन करें. जरूरतमंदों की मदद करना इस दिन सबसे बड़ा पुण्य माना गया है.
ज्योतिष के अनुसार यह दिन ग्रह दोष दूर करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है:
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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