केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर एक दिलचस्प और अहम तस्वीर सामने आई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहे कई प्रवासी भारतीय वोट डालने के लिए भारत लौट रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोग सिर्फ वोट देने के लिए 2.3 लाख रुपये तक के हवाई टिकट खरीद रहे हैं.
महंगे टिकट के बावजूद लौट रहे प्रवासी
रिपोर्ट के अनुसार, UAE में रहने वाले कई प्रवासी केरल चुनाव में हिस्सा लेने के लिए Dh9,000 यानी करीब 2.3 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं. आमतौर पर हर चुनाव में हजारों प्रवासी केरल लौटते हैं, लेकिन इस बार महंगे हवाई किराए के कारण खाड़ी देशों से आने वाले मतदाताओं की संख्या कम रहने की संभावना है. केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है. राज्य में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है.
10 साल बाद वोट डालने लौटे रॉय जॉर्ज
40 वर्षीय प्रवासी रॉय जॉर्ज, जो कुछ महीने पहले यूनाइटेड किंगडम से केरल लौटे हैं, करीब 10 साल बाद वोट डालने जा रहे हैं. वे अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए लौटे थे, लेकिन अब वे प्रवास और वापसी से जुड़े बड़े मुद्दे का हिस्सा बन गए हैं. कोट्टायम जिले के चंगानाश्शेरी के रहने वाले रॉय का कहना है कि भविष्य में वे वोट दे पाएंगे या नहीं, यह तय नहीं है.
माइग्रेशन बना चुनावी मुद्दा
इस बार चुनाव प्रचार में ‘माइग्रेशन’ यानी पलायन एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है. सभी प्रमुख राजनीतिक दल केरल में बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर देने का वादा कर रहे हैं, ताकि लोगों को विदेश न जाना पड़े. रॉय जॉर्ज का कहना है कि विदेश जाने की वजह सिर्फ नौकरी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘केरल और विदेशों के बीच सैलरी का अंतर बहुत ज्यादा है, जो लोगों को बाहर जाने के लिए आकर्षित करता है.’
परिवारों में आम हो गया विदेश जाना
रॉय के परिवार की कहानी भी इसी ट्रेंड को दिखाती है. उनके माता-पिता खाड़ी देशों से लौटे हैं, जबकि उनके भाई-बहन अभी भी विदेश में काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि आजकल बच्चों की जिंदगी विदेश में ही बस जाती है, जिससे परिवारों के लिए वापस आना मुश्किल हो जाता है.
राजनीतिक दलों के वादे और दावे
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि खराब शिक्षा और औद्योगिक माहौल के कारण छात्र और नौकरी चाहने वाले राज्य छोड़ रहे हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA की रैली में कहा कि केरल में ऐसे अवसर बनाए जाएंगे, जिससे युवाओं को बाहर जाने की जरूरत न पड़े. सत्तारूढ़ LDF ने भी राज्य में पढ़ाई पूरी करने वाले हर युवा को रोजगार देने का वादा किया है.
कांग्रेस का फोकस ‘रुकना चाहने वालों’ पर
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि पार्टी उन लोगों पर ध्यान दे रही है जो केरल में रहना चाहते हैं, लेकिन मजबूरी में बाहर जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ब्रेन ड्रेन को पूरी तरह रोकना मुश्किल है, लेकिन जो लोग अपने परिवार के साथ यहीं रहना चाहते हैं, उनके लिए अवसर पैदा करना जरूरी है.’ इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (IIMD) के चेयरमैन एस इरुदया राजन के अनुसार, 2023 के अनुमान के मुताबिक केरल के 23-25 लाख लोग विदेश में काम कर रहे हैं, जबकि 10-15 लाख लोग भारत के अन्य राज्यों में हैं.
उन्होंने कहा कि माइग्रेशन एक पुराना ट्रेंड है, जिसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता. उनके मुताबिक, सरकार को ‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के बजाय ‘ब्रेन गेन’ पर ध्यान देना चाहिए, यानी विदेश में काम कर चुके लोगों को वापस लाने की योजना बनानी चाहिए.
बदलती सामाजिक तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में रोजगार की कमी नहीं है, क्योंकि दूसरे राज्यों के 35 लाख से ज्यादा लोग यहां काम कर रहे हैं. असल वजह सैलरी का अंतर है, जो लोगों को विदेश जाने के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में काम करने वाले लोग अक्सर बाद में लौट आते हैं, लेकिन यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले लोग स्थायी रूप से वहीं बस जाते हैं. इसका असर यह हो रहा है कि केरल के कई घर खाली पड़े हैं या उनमें सिर्फ बुजुर्ग माता-पिता ही रह रहे हैं.
Source: IOCL
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