Shankar Ghosh Biography in Hindi – इस लेख में हम आपको शंकर घोष की जीवनी, शिक्षा, परिवार, बच्चों और राजनीतिक करियर के बारे में बताएंगे.
Shankar Ghosh Latest News – डॉ. शंकर घोष बंगाल भाजपा के बौद्धिक, पर आक्रामक चेहरा माने जाते है. कुछ बुद्धिजीवी तो उन्हें बंगाल का चाणक्य भी मानते है. सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे घोष को 2024 में पश्चिम बंगाल विधानसभा का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया था. सीपीआई (एम) से अपने राजनीतिक करियर की नींव रखने वाले घोष 2021 में भाजपा में शामिल हो गए थे और जीतकर विधायक बने. 2026 के बंगाल चुनाव में वे फिर से सिलीगुड़ी से चुनाव लड़ रहे है. इस लेख में हम आपको शंकर घोष की जीवनी (Shankar Ghosh Biography in Hindi) के बारें में जानकारी देने वाले है.
डॉ. शंकर घोष का जन्म 12 जून 1974 को पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर में हुआ था. उनके पिता का नाम बिजन कुमार घोष और माता का नाम पारुल घोष है.
उनकी शादी 22 जुलाई 1988 को श्रीमती सुदीपा चौधरी से हुई. चुनाव में दिए गए हलफनामें के अनुसार उनकी पत्नी सूचना प्रौद्योगिकी के काम से जुड़ी हुई है. उनके बच्चे का नाम श्रेयाश घोष है.
शंकर घोष धर्म से हिन्दू है और जाति से कायस्थ (सामान्य वर्ग) है.
उनपर 2 आपराधिक मामलें दर्ज है. [स्रोत -myneta.info -2021]
डॉ. शंकर घोष ने वर्ष 2013 में उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.
पेशे सी शिक्षक रहे डॉ. शंकर घोष की राजनीतिक यात्रा नब्बे के दशक के शुरुआत में छात्र राजनीति से आरंभ हुई. पढाई के दौरान ही वे सीपीआई (एम) में शामिल हो गए. उन दिनों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), जो एक वामपंथी पार्टी है, का राज्य में दबदबा था. छात्रों पर इसका विशेष असर था. वर्ष 1991 में शंकर घोष एसएफआई और फिर वर्ष 1995 में डीवाईएफआई में शामिल हुए. वर्ष 2010 में घोष दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 17वें विश्व युवा एवं छात्र महोत्सव में भारतीय प्रतिनिधिमंडल टीम में हुए. इसके बाद, वर्ष 2015 में सीपीआई (एम) के टिकट पर वे सिलीगुड़ी के वार्ड 24 से पार्षद चुने गए. उन्हें महापौर परिषद (शिक्षा, खेल, संस्कृति और युवा) का सदस्य भी नियुक्त किया गया था. इसके बाद, उन्हें स्वास्थ्य का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया. घोष ने सिलीगुड़ी में प्रशासक मंडल के सदस्य के रूप में भी कार्य किया.
बंगाल चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले डॉ. शंकर घोष 12 मार्च 2021 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. पार्टी में शामिल होने के बाद भाजपा ने उन्हें सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया. बंगाल की सिलीगुड़ी विधानसभा सीट राज्य के दार्जिलिंग जिले में स्थित है और यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात है. बंगाल का यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण है. इसी जगह ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ है, जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है. यही वह मार्ग है, जो भारत के अन्य राज्यों से पूर्वोत्तर को जोड़ता है.
इस चुनाव में शंकर घोष का मुख्य मुकाबला टीएमसी के ओम प्रकाश मिश्रा से था. बंगाल की यह विधानसभा सीट अब भी वाम पार्टियों के लिए एक सुरक्षित गढ़ बनी हुई है, दूसरी सीट की तुलना में विगत के चुनाव में यहां से टीएमसी को कम सफलता मिली है. टीएमसी को यहां केवल 2011 के बंगाल चुनाव में जीत हासिल हुई है. इसलिए डॉ. घोष के लिए इस चुनाव में जीत पाना जहाँ थोड़ा आसान था तो वही कठिन भी, क्योंकि वाम क्षेत्र की मुख्य पहचान यह होती है कि वे जल्दी से बदलाव नहीं चाहते है, चाहे पार्टी हो या फिर कैंडीडेट. फिर भी इस मिथक को तोड़ते हुए डॉ. शंकर घोष यहां से जीतने में सफल रहे. वैसे यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि डॉ. घोष भी इससे पहले वामपंथी पार्टी के ही नेता हुआ करते थे. 2 मई 2021 को, वे तृणमूल कांग्रेस के ओम प्रकाश मिश्रा को 35,586 वोटों से हराकर सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए.
2021 में विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए घोषणापत्र के अनुसार शंकर घोष की कुल संपत्ति 1.54 करोड़ रूपये हैं, जबकि उनपर 28 लाख का कर्ज हैं.
इस लेख में हमने आपको शंकर घोष की जीवनी (Shankar Ghosh Biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है. अगर आपका कोई सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं.