राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता तहसील से करीब 1200 किलोमीटर दूर काशी में पढ़ाई करने का सपना एक छात्र ने पूरा करने की ठानी है। छोटे से गांव से निकलकर दुष्यंत अब काशी में रहकर हिंदी साहित्य की पढ़ाई करेगा। इतनी दूर पढ़ने भेजने को लेकर उसके माता-पिता शुरुआत में तैयार नहीं थे, लेकिन दुष्यंत ने अपनी मेहनत और जिद के दम पर उन्हें मना लिया।
दुष्यंत के पिता रामकृपाल दधिच कथा-पूजा कराते हैं। उन्होंने बताया कि 10वीं की परीक्षा के दौरान बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए कहा था कि यदि वह 90 प्रतिशत अंक लाएगा तो उसे गिफ्ट में मोबाइल या जो चाहे दिलाया जाएगा। पिता को अंदाजा नहीं था कि बेटा गिफ्ट में मोबाइल नहीं, बल्कि काशी में पढ़ाई कराने की मांग कर देगा। बेटे की इच्छा और लगन देखकर परिवार ने आखिरकार उसे काशी भेजने का फैसला ले लिया।
इसके लिए दुष्यंत ने बड़ी मेहनत की और रिजल्ट आया तो दोस्त और मां बाप सब चाैंक गए क्योंकि दुष्यंत 93% अंक पाकर अपने कॉलेज का टॉपर और जिले के टॉप-10 टापर्स में अपना स्थान बनाया। इसके बाद उसने अपने पिता से अपने गिफ्ट की याद दिलाई। उसने कहा, उसे आगे हिंदी और साहित्य की पढ़ाई के लिए काशी में जाना होगा।
गूगल पर सर्च किया और पहुंचा क्वींस कॉलेज ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत के दौरान दुष्यंत ने बताया कि वह गूगल पर सर्च किया काशी में वह किस कालेज से हिंदी और साहित्य की पढ़ाई करना बेहतर होगा। इसके जरिए पता चला कि राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज में पढ़ना बेहतर होगा, क्योंकि इसी कॉलेज से हिंदी साहित्य के जाने माने चेहरे मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद की भी पढ़ाई हुई थी।
दुष्यंत ने कहा- उसकी रुचि हिंदी साहित्य में ज्यादा है। वह इस क्षेत्र में दक्ष होना चाहता है। इसलिए वह क्वींस कालेज में एडमिशन के लिए आया है। कहा जाता है कि यहां से निकले बच्चे कवि और साहित्यकार निकलते हैं। अब यहीं से पढ़कर हिंदी का नाम और आगे बढ़ाएंगे। हिंदी पर अच्छी पकड़ बनाकर हम सिविल सर्विसेज में जाएंगे।
प्रिंसिपल बोले- अब ये मेरा छात्र है दुष्यंत जब अपने पिता के साथ क्वींस कालेज पहुंचा तो वह सीधे प्रिंसिपल से मिलना चाहता था। प्रिंसिपल के चेंबर में पहुंचने पर उसने अपने मंशा बताई। प्रिंसिपल सुमीत कुमार श्रीवास्तव ने हिंदी साहित्य से जुड़े उससे कुछ सवाल किए जिसका उसने बिना देरी के जवाब दे दिया। चंद मिनटों में ही प्रिंसिपल बच्चे की प्रतिभा और लगन से रूबरू हो गए। उन्होंने पिता से कहा, अब आप निश्चिंत होकर राजस्थान जाइए, इस बच्चे की जिम्मेदारी इस संस्थान की होगी। इसके रहने आदि की व्यवस्था कैंपस में ही हॉस्टल में होगी। उन्होंने पिता को आश्वस्त किया कि यहां पढ़ने वाला प्रत्येक बच्चा उनका छात्र है। बता दें कि दुष्यंत का बड़ा भाई परीक्षित भी 12वीं की परीक्षा में 91% अंक हासिल किया था।
वहीं, पीएम श्री क्वींस इंटर कॉलेज में इन दिनों बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को हुई प्रवेश परीक्षा में 400 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पहुंचे हुए थे। यह शहर का एक ऐसा सरकारी कालेज है जहां पर एडमिशन के लिए छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। यहां इसी वर्ष से बालिकाओं की शिक्षा बिल्कुल निशुल्क कर दी गई है।
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