अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है. इसके लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंसशनिवार (11 अप्रैल 2026) को इस्लामाबाद पहुंच गए थे. अमेरिका-ईरान शांति वार्ता (US Iran War Talk) के लिए इस्लामाबाद (Islamabad Talks) में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. अमेरिका ये तो कह रहा है कि वह इस वार्ता को सकारात्मक रूप से तो देख रहा है, लेकिन बातचीत से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी कुछ और इशारा कर रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ बातचीत (US Iran Ceasefire Talks In Islamabad) के जरिए हल नहीं निकला तो उस पर अब तक का सबसे घातक हमला करेंगे. न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा, ‘हम अपने जहाजों पर अब तक के सबसे बेहतरीन हथियार लोड कर रहे हैं. अगर डील नहीं हुई तो इनका इस्तेमाल होगा.’ पाकिस्तान रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने कहा, अगर ईरानी अच्छी नीयत से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. लेकिन अगर वे हमारे साथ ‘खेल’ खेलने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि वार्ता टीम इतनी भी सहयोगी नहीं है.
तेहरान ने धमकी दी है कि अगर लेबनान पर इजराइल के हमले बंद नहीं हुए, तो वह इस्लामाबाद में निर्धारिच वार्ता से पीछे हट जाएगा. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपायों को अभी तक लागू नहीं किया गया है : लेबनान में युद्ध-विराम और ईरानी संपत्तियों से प्रतिबंध हटाया जाना. वार्ता शुरू होने से पहले इन दोनों शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए.’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान में तेहरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी के साथ फोन पर बातचीत के बाद कहा कि अमेरिका को युद्ध-विराम संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए, जिसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि इसके दायरे में लेबनान भी आएगा.
फ्रांस के राष्ट्रपति मैंक्रों ने युद्ध विराम का पूरी तरह से पालन करने के महत्व पर जोर दिया है. उन्होंने इस युद्ध विराम अपील में लेबनान को भी शामिल किया है. उन्होंने कहा कि फ्रांस लेबनान के अधिकारियों के कामों को अपना पूरा समर्थन देता है. केवल उन्हीं को राज्य की संप्रभुता का प्रयोग करने और लेबनान का भविष्य तय करने का वैध अधिकार है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा, ‘ईरान का डेलीगेशन अपनी पूरी ताकत के साथ देश के हितों का एक मजबूत रक्षक है और इसी भावना के साथ, पूरी हिम्मत से बातचीत में हिस्सा लेगा. किसी भी स्थिति में लोगों की सेवा का हमारा काम एक पल के लिए भी नहीं रुकेगा और बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, सरकार पूरी मजबूती से लोगों के साथ खड़ी है.’
Source: IOCL
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