गया के शेरघाटी प्रखंड के सरकारी स्कूल में गलत विषय और माध्यम की पाठ्यपुस्तकों के वितरण का मामला सामने आया है। मध्य विद्यालय कमात और मध्य विद्यालय जोगापुर जैसे हिंदी माध्यम के स्कूलों को उर्दू की किताबें मिली हैं।
इसके उलट, खंडेल उर्दू मध्य विद्यालय में हिंदी की पाठ्यपुस्तकें पहुंचाई गई हैं। इस गलती से कक्षा 6 और 7 के छात्र सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें उनकी पढ़ाई के अनुरूप सही पाठ्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
राजकीय मध्य विद्यालय कमात के हेड मास्टर राजेश कुमार और राजकीय मध्य विद्यालय जोगापुर के प्रधानाध्यापक दिग्विजय सिंह ने इसे गंभीर लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि किताबों के वितरण से पहले संबंधित विभाग की ओर से उचित जांच नहीं की गई। शिक्षकों ने भी इस गड़बड़ी के कारण पढ़ाई बाधित होने और बच्चों को विषय समझाने में आ रही दिक्कतों की पुष्टि की है। छात्रों और अभिभावकों में भी इस पर नाराजगी देखी जा रही है।
बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता
प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यदि इस समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर बच्चों के शैक्षणिक स्तर और परीक्षा परिणामों पर पड़ेगा।
इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, यह सवाल उठ रहा है। प्रशासन और शिक्षा विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द ही इस समस्या का समाधान करेंगे और बच्चों की पढ़ाई को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कृष्ण मुरारी गुप्ता ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इसकी जानकारी लेंगे, लेकिन अगर ऐसा कुछ हुआ है तो इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं है। उनके अनुसार, शिक्षक संबंधित विद्यालयों से किताबें बदलवा सकते हैं।
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