US-Iran War LIVE: 'हम इस्लामाबाद MoU से बस कुछ ही इंच दूर थे, US ने सब बदल दिया', बोले अब्बास अराघची – AajTak

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Israel Lebanon Iran War: हिज़्बुल्लाह ने रविवार को 43 इज़रायली ठिकानों पर किए हमले 
Middle East Crisis: होर्मुज़ स्ट्रेट पर US की नाकेबंदी की तैयारी के बीच तेल की कीमतों में उछाल
Middle East Crisis: होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी पर US ने अभी कोई मदद नहीं मांगी: ऑस्ट्रेलिया 
Middle East Conflict: अमेरिका के साथ कूटनीतिक सफलता मिलना अब भी मुमकिन: ईरान
Middle East Crisis: सोमवार से ईरानी बंदरगाहों पर US की नौसैनिक नाकेबंदी
Iran-US War LIVE: ‘अच्छाई से अच्छाई मिलती है, दुश्मनी से दुश्मनी का जन्म होता है’, इस्लामाबाद वार्ता का जिक्र कर बोले अराघची
Strait of Hormuz Crisis: ईरान के गार्ड्स होर्मुज स्ट्रेट के पास आने वाले सैन्य जहाजों को सीजफायर का उल्लंघन मानेंगे
Middle East Crisis: बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर लेबनान पहुंचे बेंजामिन नेतन्याहू
Middle East Crisis: यूके और फ्रांस ने लेबनान को शामिल करते हुए स्थायी संघर्ष-विराम का समर्थन किया
US-Iran War LIVE Updates: ईरान जंग पर अब तक के बड़े अपडेट्स
Middle East Crisis: ट्रंप की धमकियों का कोई असर नहीं: ईरान
Middle East Crisis: होर्मुज़ में पाकिस्तान के झंडे वाले 2 टैंकरों ने अपना रास्ता बदला
Middle East Crisis: ईरान-यूएस जंग से जुड़े बड़े अपडेट्स
US-Israel-Iran War LIVE News & Latest Updates: दुनिया की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए मिडिल-ईस्ट को लेकर फिलहाल अभी तक समझौता नहीं हो सका है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यूएस-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता रुक गई.  करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके, जिससे सीजफायर पर संकट गहरा गया है.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान ने जंग खत्म करने के लिए यूएस की शर्तें नहीं मानी. बातचीत में रुकावट आने के बाद वेंस अमेरिका लौट गए. दूसरी तरफ, ईरान ने इस बातचीत को नाकाम बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने बहुत ज़्यादा मांगें रखीं.
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत एक अस्थायी दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी समाधान में बदलने के लिए हो रही थी. इस वार्ता में अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ सहित कई सीनियर अधिकारी शामिल हुए.
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हिज़्बुल्लाह ने कहा है कि उसने रविवार को दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इज़रायल में इज़रायली ठिकानों पर 43 हमले किए, जिनमें रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया.
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. इसकी वजह यह थी कि अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की नाकेबंदी की तैयारी कर रही थी, जिससे ईरान से होने वाली तेल की खेप पर रोक लग सकती है. यह कदम तब उठाया गया, जब अमेरिका और ईरान युद्ध को खत्म करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा कि अमेरिका ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की किसी भी नाकेबंदी में मदद करने के लिए नहीं कहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि कैनबरा को इस मामले पर वॉशिंगटन से अब तक कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा कि अगर वॉशिंगटन ‘तानाशाही’ रवैये को छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो अमेरिका के साथ कूटनीतिक सफलता मिलना अब भी मुमकिन है. एक सोशल मीडिया पोस्ट में, पेज़ेशकियान ने कहा कि ऐसी स्थितियों में किसी समझौते तक पहुंचने के रास्ते निश्चित रूप से मिल जाएंगे. यह हालिया तनावों के बावजूद बातचीत के प्रति तेहरान के निरंतर खुलेपन का इशारा है. उन्होंने चल रही वार्ताओं में की गई कोशिशों के लिए ईरान के वार्ता प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की तारीफ़ भी की, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ का ज़िक्र किया और सार्वजनिक रूप से उनका उत्साह बढ़ाया.

US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक, ठअमेरिकी सेनाएं 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे ET से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकेबंदी लागू करना शुरू कर देंगी.” US सेना ने कहा कि यह नाकेबंदी ‘ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का उपयोग करने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से’ लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित सुविधाएं भी शामिल हैं. CENTCOM ने आगे कहा कि वह नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेगा, उन जहाजों के लिए जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की तरफ या वहां से आ-जा रहे हैं.

 
47 सालों में उच्चतम स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी तरह से बातचीत की. लेकिन जब हम ‘इस्लामाबाद MoU’ से बस कुछ ही इंच दूर थे, तो हमें बहुत ज्यादा मांगों, बदलते टार्गेट्स और रुकावटों का सामना करना पड़ा. कोई सबक नहीं सीखा गया. अच्छाई से अच्छाई मिलती है. दुश्मनी से दुश्मनी का जन्म होता है.
In intensive talks at highest level in 47 years, Iran engaged with U.S in good faith to end war.

But when just inches away from “Islamabad MoU”, we encountered maximalism, shifting goalposts, and blockade.

Zero lessons earned

Good will begets good will.
Enmity begets enmity.
 
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट के पास आने की कोशिश करने वाले किसी भी सैन्य जहाज को अमेरिका के साथ दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम का उल्लंघन माना जाएगा और उससे सख़्ती और निर्णायक रूप से निपटा जाएगा.
ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी एक बयान में गार्ड्स ने कहा कि यह स्ट्रेट ईरान की नौसेना के कंट्रोल और ‘स्मार्ट मैनेजमेंट’ के तहत है. उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट नियमों के अनुसार, गैर-सैन्य जहाजों के सुरक्षित गुज़रने के लिए खुला है.
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बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान दौरे के वक्त हिज्बुल्लाह के खतरे को खत्म करने का दावा किया. इस दौरान उन्होंने युद्ध जारी रखने की चेतावनी भी दी.
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UK के डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से बात की, जिसमें दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि एक स्थायी संघर्ष-विराम की जरूरत है, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए.
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का ईरानी राष्ट्र पर कोई असर नहीं पड़ता. उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान बहुत अच्छी पहल की थी, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिली. सरकारी मीडिया में छपे बयानों में, ग़ालिबफ़ ने वॉशिंगटन को चेतावनी भी दी और कहा, “अगर आप लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप तर्क के साथ आगे आएंगे, तो हम भी तर्क के साथ ही पेश आएंगे.”
पाकिस्तान के झंडे वाले दो तेल टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट के पास पहुंचने के बाद वापस लौट गए. इससे डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी के बाद समुद्री आवाजाही में एक बार फिर रुकावट आने का संकेत मिला है. ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि ये जहाज़ खैरपुर और शालिमार इस अहम जलमार्ग से आगे नहीं बढ़ पाए और होर्मुज के पास से ही वापस लौट गए.
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