कोटपुतली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और तालुका बहरोड़ के तत्वावधान में सोमवार को ग्राम पंचायत कायसा में “बाल विवाह मुक्त भारत” विषय पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूक कर
शिविर को संबोधित करते हुए न्याय मित्र किरण ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर सीधा असर डालने वाली गंभीर समस्या है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से लागू बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है।
कानून के बावजूद 23% से अधिक बाल विवाह
न्याय मित्र किरण ने NFHS-5 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में अब भी 23 प्रतिशत से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले कर दी जाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि कानून होने के बावजूद इस कुरीति पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।
जागरूकता ही समाधान, पंचायत स्तर तक चल रहे अभियान
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा स्कूल, कॉलेज और पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि समाज के हर वर्ग तक इस मुद्दे की गंभीरता पहुंचाई जा सके।
‘समाज की सोच बदलना जरूरी’
ग्राम पंचायत कायसा के सरपंच भूपसिंह ने कहा- बाल विवाह मुक्त भारत तभी संभव है, जब समाज इसे केवल कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक शर्म के रूप में देखे। उन्होंने शिक्षा, संवाद, कानूनी जानकारी और आर्थिक सशक्तिकरण को इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में बताया।
शिविर में कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
इस अवसर पर सचिव नवीन सोनी, नवीन कुमार, ब्लॉक संसाधन व्यक्ति बाबूलाल चर्खिया, पूनम कुमारी, मंजू, सरला, सुमन, सुनीता सहित कई गणमान्य नागरिक और ग्रामीण उपस्थित रहे।
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