सोशल मीडिया पर एक फैक्ट्री का वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि फैक्ट्री के कर्मचारी अपने सिर पर कैमरा लगाए हुए काम कर रहे हैं। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई है। लोग इसे भविष्य में नौकरियों के लिए खतरा बता रहे हैं। वीडियो में पहले तो नजर आ रहा है कि लंबी लाइनों में बैठे कर्मचारी किसी कपड़े की फैक्ट्री में सिलाई कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही नजर उनके माथे पर लगे छोटे कैमरों पर जाती है, पूरी कहानी बदल जाती है। असल में यह कोई लैब एक्सपेरिमेंट नहीं है, बल्कि फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों पर रियल टाइम में किया जा रहा प्रयोग है।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग थियरी
कर्मचारियों के सिर पर लगे कैमरे उनके काम की एक-एक एक्टिविटी दर्ज हो रही है। इसी को लेकर लोग हैरानी जता रहे हैं कि आखिर कंपनी इन एक्टिविटीज को रिकॉर्ड करके क्या करना चाहती है। हालांकि वीडियो में यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहां का है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग थियरी चल रही हैं। एक थियरी में कहा जा रहा है कि कर्मचारियों के सिर पर लगे कैमरों से दर्ज वीडियो से एआई की ट्रेनिंग दी जा रही है। ऐसी बातें इसलिए कही जा रही हैं क्योंकि कैमरों में कर्मचारियों का पूरा काम बारीकी के साथ रिकॉर्ड हो रहा है। इसमें उनके हाथों का मूवमेंट, हैंड आई को-ऑर्डिनेशन और वो टास्क को कैसे अंजाम दे रहे हैं यह सब। इसके जरिए मशीनों के लिए एक बड़ा डेटाबेस तैयार हो रहा है।
कहीं, रोबोट्स को ट्रेनिंग देना तो मकसद नहीं
अनुमान लगाया जा रहा है कि महंगे मोशन-कैप्चर टूल्स की जगह, कंपनी इस ह्यूमन आई व्यू से रोबोट्स को सिखाने की कोशिश की जाएगी। अगर यह बातें सही साबित होती हैं तो पूरा नजरिया ही बदल जाएगा। असल में जो आज किसी चीज को डॉक्यूमेंट करने की एक कोशिश नजर आ रही है, वह कल की तारीख में एआई ट्रेनिंग का टूल साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि हो सकता है कि इन कर्मचारियों को यह पता ही न हो कि यह सब क्यों हो रहा है। शायद उन्हें यह अंदाजा न हो कि आने वाले वक्त में इसका इस्तेमाल कैसे हो सकता है।
कुछ लोग पक्ष में भी दे रहे तर्क
वहीं, कुछ अन्य लोग अलग तर्क दे रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि यह तकनीक में बदलाव की एक नया चरण हो सकता है। असल में इंडस्ट्रीज तेजी से बदल रही हैं और ऑटोमेशन पिछले कई साल से इस यात्रा का हिस्सा है। ऐसे में अगर इस प्रक्रिया को रोका जाता है तो यह प्रैक्टिकली ठीक नहीं होगा। तर्क यह भी है कि इससे बेहतर होगा कि कर्मचारी एडजस्ट करें और नई स्किल्स सीखने पर ध्यान दें। टेक्नोलॉजी के खिलाफ जाने के बजाए उन्हें इसके साथ काम करने पर ध्यान देना होगा। तभी वह भविष्य में सर्वाइव कर पाएंगे।
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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